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पाकिस्तान का पाखंड: आतंक पर दोहरी नीति, वैश्विक मंच पर दावों की खुली पोल

अमर उजाला Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Fri, 13 Feb 2026 05:24 AM IST
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सार
कनाडा स्थित जियोपॉलिटिकल मॉनिटर की हालिया रिपोर्ट भी कहती है कि पाकिस्तान को इस सूची से हटाना समय से पहले लिया गया निर्णय था, क्योंकि देश में आतंकी गतिविधियां और इनके लिए फंडिंग लगातार जारी है। पाकिस्तान को सिर्फ जैश ही नहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मामले में भी तगड़ा झटका लगा है।
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un report exposes pakistan role jaish-e-Mohammed red fort attack Masood Azhar Terror Policy Lashkar-e-Taiba
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद - फोटो : ANI/Reuters

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की नवीनतम रिपोर्ट, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को पिछले वर्ष नवंबर में दिल्ली के लाल किले के पास हुए घातक हमले से जोड़ा गया है, ने एक बार फिर पाकिस्तान की पाखंडपूर्ण नीति को बेनकाब किया है। गौरतलब है कि इस हादसे में धीमी गति से चल रही एक कार में हुए भीषण विस्फोट से 15 निर्दोष मारे गए थे और दर्जनों घायल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक सदस्य देश ने जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जो साबित करता है कि यह आतंकी संगठन अब भी पूरी तरह से सक्रिय है। इससे पाकिस्तान के उन दावों की पोल भी खुलती है, जिनमें वह जैश जैसे आतंकी संगठनों के पूरी तरह से खत्म होने की डींगे हांकता रहा है। रिपोर्ट यह खुलासा भी करती है कि जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने पिछले वर्ष अक्तूबर में ही अपनी महिला विंग जमात-उल-मुमिनात भी बनाई थी। रिपोर्ट में सदस्य देशों के बीच जैश की स्थिति की लेकर विरोधाभास दिखता है, लेकिन इससे साफ संकेत मिलता है कि यह आतंकी संगठन न केवल सक्रिय है, बल्कि अपने नेटवर्क के विस्तार की योजना भी बना रहा है। दरअसल, पाकिस्तान का पाखंड लंबे समय से जगजाहिर है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है, पर हकीकत कुछ और ही है। इससे पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे सूची से बाहर किए जाने पर भी सवाल उठते हैं। कनाडा स्थित जियोपॉलिटिकल मॉनिटर की हालिया रिपोर्ट भी कहती है कि पाकिस्तान को इस सूची से हटाना समय से पहले लिया गया निर्णय था, क्योंकि देश में आतंकी गतिविधियां और इनके लिए फंडिंग लगातार जारी है। पाकिस्तान को सिर्फ जैश ही नहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मामले में भी तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि बीएलए को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्ट में पहलगाम हमले का भी जिक्र है, जिसे द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अंजाम दिया था, जो लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है। यह तथ्य ही है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की संरचना, विचारधारा, प्रशिक्षण और फंडिग के स्रोत भी समान हैं, बस अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने के लिए नाम बदले गए हैं। लिहाजा, यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि अगर पाकिस्तान को जवाबदेह नहीं बनाया गया, तो यहां आतंकवाद की जड़ें और गहरी होंगी।
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