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पश्चिम एशिया संकट: संवाद की राह, पहल से जगी उम्मीद

अमर उजाला Published by: Pavan Updated Sat, 04 Apr 2026 07:57 AM IST
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West Asia crisis: Path to dialogue, initiatives raise hope
संवाद की राह - फोटो : अमर उजाला
ब्रिटेन की अध्यक्षता में 60 से अधिक देशों का होर्मुज जलडमरूमध्य को पुन: खोलने के उपायों पर वर्चुअल चर्चा में शामिल होना पश्चिम एशिया की तनावग्रस्त भू-राजनीति में एक नया अध्याय तो खोलता ही है, यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी अहम है। फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 25 फीसदी कच्चे तेल और लगभग 20 फीसदी प्राकृतिक गैस के निर्यात का गेटवे है। जाहिर है कि ईरान द्वारा इसे अवरुद्ध किए जाने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है।

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उल्लेखनीय है कि इन हालात ने दूसरे विश्वयुद्ध के करीब एक दशक बाद के ऐसे ही एक संकट की याद ताजा कर दी है, जब मिस्र, इस्राइल, ब्रिटेन और फ्रांस के खिलाफ युद्ध में उलझा था और तब वैश्विक व्यापार की जीवन रेखा मानी जाने वाली स्वेज नहर को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था। हालांकि, उस वक्त वैश्विक शक्ति समीकरण आज की तुलना में अलग थे और वर्तमान की आक्रामकता के उलट अमेरिका ने भी तब कूटनीतिक समाधान को ही तरजीह दी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह संकेत दे चुके हैं कि होर्मुज का उपयोग करने वाले ही इसे खोलने की व्यवस्था देखें। गौरतलब है कि होर्मुज के संचालन के मुद्दे पर देशों की यह वार्ता अमेरिका की उस नीति से अलग है, जो जलमार्ग को खुलवाने के लिए ताकत के इस्तेमाल की बात करती है। हाल ही में, फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसकी पुष्टि करते हुए ईरान से बातचीत करने को ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य तरीका बताया है। भारत की तरफ से भी इसी नीति का समर्थन करते हुए कहा गया है कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।

ध्यान देने वाली बात है कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक जरूर है, जिनके जहाज ईरान की अनुमति के बाद होर्मुज से गुजर रहे हैं, लेकिन जैसा वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी उल्लेख किया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भी वह एकमात्र देश है। होर्मुज का संकट वैश्विक सहयोग और शक्ति संतुलन की भी परीक्षा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का कहना बिल्कुल ठीक है कि होर्मुज का मामला जटिल है, किंतु ऐसी बहुपक्षीय पहलों से यह उम्मीद तो जगती ही है कि संकट का स्थायी समाधान संयम, सहयोग और संवाद में ही निहित है। 
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