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Rajat Patidar: 'मैं कोहली...डिविलियर्स', जब दो दोस्तों के फोन पर अचानक आए क्रिकेटर्स के कॉल, जानें पूरा मामला
Sun, 10 Aug 2025 11:53 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 10 Aug 2025 11:53 AM IST
सार
ये किसी फिल्म की कहानी जैसा लग रहा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग छेत्र के मडागांव में दो दोस्तों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। उनकी जिंदगी ने अचानक ऐसी करवट ली कि सब सोच में पड़ गए।
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कोहली और रजत
- फोटो : PTI
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विस्तार
सोचिए...आप अपने गांव में किसी किराने की दुकान पर बैठे हो और आपक फोन बज उठे। कॉल की दूसरी साइड से कोई बोले...हैलो! मैं विराट कोहली बोल रहा हूं। कुछ देर बाद दूसरा कॉल आए और दूसरी साइड से कोई बोले...हैलो! मैं एबी डिविलियर्स बोल रहा हूं। आप सोच में पड़ जाएंगे और लगेगा कि कोई प्रैंक या फिर मजाक कर रहा है। फिर कुछ देर बाद एक और कॉल आए और सामने वाला शख्स बोले...हैलो! मैं रजत पाटीदार बोल रहा हूं।
ये किसी फिल्म की कहानी जैसा लग रहा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग छेत्र के मडागांव में दो दोस्तों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। उनकी जिंदगी ने अचानक ऐसी करवट ली कि सब सोच में पड़ गए। मडागांव के दो दोस्त मनीष और खेमराज ने खुद को अचानक वीआईपी के कॉन्टैक्ट लिस्ट में पाया और हैरान रह गए। बाद में जब पूरा मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस को इसका हल निकालना पड़ा। आइए पूरी कहानी जानते हैं...
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ये किसी फिल्म की कहानी जैसा लग रहा होगा, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग छेत्र के मडागांव में दो दोस्तों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। उनकी जिंदगी ने अचानक ऐसी करवट ली कि सब सोच में पड़ गए। मडागांव के दो दोस्त मनीष और खेमराज ने खुद को अचानक वीआईपी के कॉन्टैक्ट लिस्ट में पाया और हैरान रह गए। बाद में जब पूरा मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस को इसका हल निकालना पड़ा। आइए पूरी कहानी जानते हैं...
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28 जून को मनीष ने खरीदा था सिमकार्ड
दरअसल, इस कहानी की शुरुआत 28 जून को हुई। मनीष ने आसपास के एक दुकान से एक नया सिमकार्ड खरीदा। सिमकार्ड के लिए वही प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे आमतौर पर सबको गुजरना पड़ता है। हालांकि, ट्विस्ट तब आया, जब वह सिमकार्ड चालू हुआ और मनीष ने व्हाट्सएप इंस्टॉल किया। उस नंबर के व्हाट्सएप पर प्रोफाइल पिक्चर में रजत पाटीदार की तस्वीर दिखी। मनीष और खेमराज ने सोचा कि यह कोई मजाक है। लेकिन इसके कुछ दिन बाद उस नंबर पर कॉल आने शुरू हो गए। ये कॉल पड़ोसी या फिर रिलेटिव्स के नहीं, बल्कि क्रिकेट स्टार्स और उनसे जुड़े लोगों के थे। किसी ने खुद को विराट कोहली बताया तो किसी ने एबी डिविलियर्स।
दरअसल, इस कहानी की शुरुआत 28 जून को हुई। मनीष ने आसपास के एक दुकान से एक नया सिमकार्ड खरीदा। सिमकार्ड के लिए वही प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे आमतौर पर सबको गुजरना पड़ता है। हालांकि, ट्विस्ट तब आया, जब वह सिमकार्ड चालू हुआ और मनीष ने व्हाट्सएप इंस्टॉल किया। उस नंबर के व्हाट्सएप पर प्रोफाइल पिक्चर में रजत पाटीदार की तस्वीर दिखी। मनीष और खेमराज ने सोचा कि यह कोई मजाक है। लेकिन इसके कुछ दिन बाद उस नंबर पर कॉल आने शुरू हो गए। ये कॉल पड़ोसी या फिर रिलेटिव्स के नहीं, बल्कि क्रिकेट स्टार्स और उनसे जुड़े लोगों के थे। किसी ने खुद को विराट कोहली बताया तो किसी ने एबी डिविलियर्स।
दोनों दोस्त
- फोटो : Twitter
मनीष और खेमराज ने खुद को धोनी बताना शुरू किया
मनीष और खेमराज को लगा कि किसी का प्रैंक है। उन्होंने भी प्रैंक करने का सोचा। इसके बाद जब भी क्रिकटर्स की ओर से फोन आता, तो उन्होंने खुद को 'महेंद्र सिंह धोनी' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। 15 जुलाई को मनीष को एक अनजान नंबर से एक और कॉल आया। इस बार एक विनम्र आवाज ने कहा, 'भाई, मैं रजत पाटीदार हूं। जिस नंबर से तुम बात कर रहे हो, वह मेरा नंबर है, कृपया इसे वापस कर दें।' तब भी मनीष और खेमराज चिढ़ाने के मूड में थे और उन्होंने जवाब दिया, 'और हम एमएस धोनी हैं।'
मनीष और खेमराज को लगा कि किसी का प्रैंक है। उन्होंने भी प्रैंक करने का सोचा। इसके बाद जब भी क्रिकटर्स की ओर से फोन आता, तो उन्होंने खुद को 'महेंद्र सिंह धोनी' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। 15 जुलाई को मनीष को एक अनजान नंबर से एक और कॉल आया। इस बार एक विनम्र आवाज ने कहा, 'भाई, मैं रजत पाटीदार हूं। जिस नंबर से तुम बात कर रहे हो, वह मेरा नंबर है, कृपया इसे वापस कर दें।' तब भी मनीष और खेमराज चिढ़ाने के मूड में थे और उन्होंने जवाब दिया, 'और हम एमएस धोनी हैं।'
मनीष और खेमराज ने सिम पुलिस को लौटाया
पाटीदार ने धैर्यपूर्वक समझाया कि यह नंबर उनके लिए महत्वपूर्ण है। इस नंबर की वजह से वह अपने कोच, दोस्तों और क्रिकेट बिरादरी से जुड़े हुए हैं। जब मनीष और खेमराज की मस्ती बंद नहीं हुई, तो पाटीदार ने चेतावनी दी, 'ठीक है, मैं पुलिस भेजूंगा।' 10 मिनट के अंदर, पुलिस उनके दरवाजे पर थी। तभी मनीष और खेमराज का दिमाग कौंधा और उन्हें पता चला कि वे असली रजत पाटीदार या फिर विराट कोहली या फिर एबी डिविलियर्स से बात कर रहे थे। उन दोनों ने सिम बिना किसी हिचकिचाहट के वापस कर दिया।
पाटीदार ने धैर्यपूर्वक समझाया कि यह नंबर उनके लिए महत्वपूर्ण है। इस नंबर की वजह से वह अपने कोच, दोस्तों और क्रिकेट बिरादरी से जुड़े हुए हैं। जब मनीष और खेमराज की मस्ती बंद नहीं हुई, तो पाटीदार ने चेतावनी दी, 'ठीक है, मैं पुलिस भेजूंगा।' 10 मिनट के अंदर, पुलिस उनके दरवाजे पर थी। तभी मनीष और खेमराज का दिमाग कौंधा और उन्हें पता चला कि वे असली रजत पाटीदार या फिर विराट कोहली या फिर एबी डिविलियर्स से बात कर रहे थे। उन दोनों ने सिम बिना किसी हिचकिचाहट के वापस कर दिया।
एक सिम ने बदल दी खेमराज की जिंदगी
विराट कोहली के फैन खेमराज के लिए दुर्घटनावश आए फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। खेमराज ने मुस्कुराते हुए बताया, 'गलत नंबर की वजह से मुझे कोहली से बात करने का मौका मिला। मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हो गया है।' गांव वाले अब मडागांव के 'क्रिकेट के नक्शे पर' होने जैसा मजाक करते हैं। वहीं, मनीष और खेमराज को उम्मीद है कि पाटीदार इस बार फिर से अपने सिम के लिए नहीं, बल्कि धन्यवाद कहने के लिए फोन करेंगे।
विराट कोहली के फैन खेमराज के लिए दुर्घटनावश आए फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। खेमराज ने मुस्कुराते हुए बताया, 'गलत नंबर की वजह से मुझे कोहली से बात करने का मौका मिला। मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हो गया है।' गांव वाले अब मडागांव के 'क्रिकेट के नक्शे पर' होने जैसा मजाक करते हैं। वहीं, मनीष और खेमराज को उम्मीद है कि पाटीदार इस बार फिर से अपने सिम के लिए नहीं, बल्कि धन्यवाद कहने के लिए फोन करेंगे।
एक दुकान क्रिकेट हॉटलाइन में बदली
दूरसंचार कंपनियां 90 दिनों से अधिक समय तक निष्क्रिय रहने वाले नंबरों को रीसायकल करती हैं। पाटीदार का पुराना नंबर निष्क्रिय कर दिया गया था और मनीष ने वह नंबर गलती से खरीद लिया था। सिमकार्ड की वजह से अनजाने में एक छोटी किराने की दुकान 'क्रिकेट हॉटलाइन' में बदल गई थी। रजत पाटीदार फिलहाल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टीम के कप्तान हैं और इसी साल उनकी कप्तानी में आरसीबी ने आईपीएल खिताब का सूखा समाप्त किया था।
दूरसंचार कंपनियां 90 दिनों से अधिक समय तक निष्क्रिय रहने वाले नंबरों को रीसायकल करती हैं। पाटीदार का पुराना नंबर निष्क्रिय कर दिया गया था और मनीष ने वह नंबर गलती से खरीद लिया था। सिमकार्ड की वजह से अनजाने में एक छोटी किराने की दुकान 'क्रिकेट हॉटलाइन' में बदल गई थी। रजत पाटीदार फिलहाल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टीम के कप्तान हैं और इसी साल उनकी कप्तानी में आरसीबी ने आईपीएल खिताब का सूखा समाप्त किया था।