टीम इंडिया के अनुभवी स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में अपने प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींचा। चेन्नई के 34 वर्षीय क्रिकेटर ने अपने घरेलू मैदान में इतिहास रचा और गेंदबाजी में पांच विकेट लेने के बाद शतकीय पारी भी खेली। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद अश्विन ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार वापसी की। उन्होंने यहां गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी छाप छोड़ी। ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं अश्विन से जुड़ी कुछ बेहद खास बातों पर।
इंजीनियरिंग कर चुके अश्विन हर मैच के बाद क्या लिखते हैं? कुछ ऐसे सुधारते हैं गलतियां
बुद्धिमान और चतुर खिलाड़ी
अश्विन भारतीय क्रिकेट टीम के बुद्धिमान और चतुर खिलाड़ियों में से एक हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अश्विन विश्लेषण में माहिर हैं और अपनी गलतियों से तुरंत सीखने की कोशिश करते हैं। वे अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए-नए प्रयोग और खोज करते रहते हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे हर मैच के आंकड़ों को डायरी में लिखते हैं। अश्विन के बचपन के कोच सुनील सुब्रमण्यम उनके बारे में बताते हैं कि इस स्पिनर को सब कुछ मालूम है। उसे पता रहता है कि बल्लेबाज को कितनी लंबी या छोटी गेंद किस जगह पर डालनी है और उसके लिए कैसी फील्डिंग लगानी है।
आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने
अश्विन खुद कहते हैं कि वे क्रिकेट के मामले में बचपन से प्रतिभाशाली नहीं रहे, लेकिन खेल में नए-नए तरीके और प्रयोगों ने उनके खेल को बेहतर बनाया। चेन्नई टेस्ट में मैच जिताऊ पारी खेलने के बाद हाल ही में वह आईसीसी के टॉप-5 ऑलराउंडर्स में शामिल हुए। अश्विन को 2016 में आईसीसी ने क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना था। उस वक्त अश्विन के अलावा राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर को यह सम्मान हासिल था। हालांकि बाद में 2017-18 में विराट कोहली दो बार लगातार आईसीसी क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने। अश्विन फोर्ब्स की इंडिया सेलिब्रिटी सूची में रह चुके हैं।
अंडर-17 टीम में ओपनर थे अश्विन
अश्विन के पिता भी एक क्रिकेटर थे, वे क्लब क्रिकेट में तेज गेंदबाजी करते थे। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए अश्विन भी क्रिकेटर बन गए। लेकिन वे बचपन से बल्लेबाजी, तेज और स्पिन गेंदबाजी के बीच रोलर-कोस्टर की तरह रहे। जूनियर लेवल क्रिकेट में ओपनर अश्विन का चयन जब इंडिया की अंडर-17 टीम में हुआ तब वे ओपनिंग में असफल रहे। खराब खेल के चलते टीम से बाहर हुए। इसके बाद उन्होंने ऑफ स्पिन गेंदबाजी करनी शुरू की।
अपनी गेंदबाजी में करते हैं प्रयोग
अश्विन असफलता से प्रभावित नहीं होते हैं और उससे सबक लेते हुए अपनी गलतियों में सुधार करने की कोशिश करते हैं, इसके लिए वे प्रयोग करने से भी नहीं चूकते हैं। 2008 के एशिया कप के दौरान उन्होंने कैरम बॉल करना शुरू कर दी। स्पिन गेंदबाजी के इस तरीके में गेंद अंगूठे और अंगुली के बीच दबाकर फ्लिक की जाती है। अश्विन बताते हैं कि चेन्नई में गली क्रिकेट के दौरान उन्होंने ये गेंदबाजी सीखी थी।