Virat Kohli: 'खुशी बांटना मेरा सौभाग्य, ट्रॉफियां गुरुग्राम में मां के पास', जीत के बाद कोहली ऐसा क्यों बोले?
भारतीय दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में 28,000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे कर नया रिकॉर्ड बनाया। मैच के बाद उन्होंने कहा कि लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने की क्षमता उन्हें गर्व और आभार से भर देती है। उन्होंने अपनी उपलब्धियों, मानसिकता, इनिंग की रणनीति और अपनी ट्रॉफियों को मां के पास भेजने की बात भी कही।
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भारत के 37 वर्षीय स्टार क्रिकेटर विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सबसे तेजी से 28,000 रन पूरे करके एक और बड़ा उपलब्धि हासिल की। उन्होंने यह मुकाम अपनी 624वीं पारी में लेग स्पिनर आदित्य अशोक की गेंद पर चौका लगाकर पूरा किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था, जिन्होंने 644 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था।
कोहली अब तेंदुलकर के बाद दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं। कोहली ने 91 गेंद में आठ चौके और एक छक्के की मदद से 93 रन की पारी खेली। इसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड से भी नवाजा गया।
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'यह सफर किसी सपने के सच होने जैसा'
मैच के बाद कोहली ने अपने करियर को याद करते हुए कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो अगर मैं अपने पूरे सफर को देखूं तो यह किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। जब मैं आया था तो मुझे हमेशा अपनी क्षमताओं पर भरोसा था और आज मैं जिस जगह पर हूं वहां पहुंचने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी।'उन्होंने आगे कहा, 'भगवान ने मुझे इतना कुछ दिया है कि मेरे पास शिकायत करने के लिए कुछ नहीं है इसलिए मुझे सिर्फ आभार महसूस होता है। मैं हमेशा अपने पूरे सफर को बहुत सम्मान और अपने दिल में बहुत आभार के साथ देखता हूं और मुझे इस पर गर्व महसूस होता है।' कोहली ने कहा, 'इतने सारे लोगों को खुशी और मुस्कान दे पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।'
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रणनीति पर कोहली के विचार
कोहली ने 91 गेंदों में 93 रन बनाकर भारत की जीत में मुख्य भूमिका निभाई। उन्हें करियर में 45वीं बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया। अपनी पारी के बारे में उन्होंने कहा, 'अगर मैं सच कहूं तो जिस तरह से मैं अभी खेल रहा हूं मैं बिल्कुल भी उपलब्धियों के बारे में नहीं सोच रहा हूं।' उन्होंने रणनीति को लेकर कहा, 'अगर हम पहले बल्लेबाजी कर रहे होते तो शायद मैं और तेजी से खेलता क्योंकि बोर्ड पर एक स्कोर था इसलिए मुझे थोड़ा संभलकर खेलना पड़ा। मुझे लग रहा था कि मैं और अधिक बाउंड्री लगाऊं।'साझेदारी पर उन्होंने कहा, 'मुझे बस लगा कि अगर मैं शुरुआती 20 गेंद पर जोर लगाऊं तो हम रोहित का विकेट गिरने के तुरंत बाद एक साझेदारी बना सकते हैं जिससे विरोधी टीम बैकफुट पर चली जाएगी और असल में यही मैच में अंतर साबित हुआ।'
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ट्रॉफियां मां के पास
विराट कोहली ने अपने निजी पक्ष की झलक दिखाते हुए बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग 18 साल के करियर में मिले उनके सभी व्यक्तिगत अवॉर्ड्स वह अपनी मां के गुरुग्राम स्थित घर भेज देते हैं। मैच के बाद की प्रस्तुति के दौरान पूर्व भारतीय कप्तान ने स्वीकार किया कि वह खुद इन सम्मानों का हिसाब नहीं रखते।नकोहली से जब उनकी बढ़ती ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ ट्रॉफियों के संग्रह के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मुझे कोई अंदाजा नहीं है'।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं ट्रॉफियां गुरुग्राम में अपनी मां को भेज देता हूं। उन्हें ट्रॉफियां संभालकर रखना पसंद है। अगर मैं अपने पूरे सफर को देखूं तो यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। मुझे हमेशा अपनी क्षमताओं पर भरोसा रहा है, जहां मैं आज हूं वहां पहुंचने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। भगवान ने मुझे बहुत ज्यादा दिया है और मेरे दिल में बहुत आभार है, मुझे गर्व महसूस होता है।'