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'विलेन' वाली छवि पर गंभीर का बड़ा बयान: कहा- एक दिन मेरी ईमानदारी मेरा बचाव करेगी; मीडिया और आलोचना पर भी बोले
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Swapnil Shashank
Updated Wed, 11 Mar 2026 04:14 PM IST
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सार
टी20 विश्व कप 2026 जीत के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने मीडिया में अपनी 'विलेन' वाली छवि पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर टीम को व्यक्ति से बड़ा बताने के कारण उन्हें विलेन कहा जाता है तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक दिन उनकी ईमानदारी खुद उनका बचाव करेगी।
गौतम गंभीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत के टी20 विश्वकप जीतने के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने मीडिया में अपनी छवि को लेकर खुलकर बात की है। अक्सर अपनी बेबाक राय और सख्त रवैये के लिए पहचाने जाने वाले गंभीर ने कहा कि अगर टीम को व्यक्ति से बड़ा बताने के कारण उन्हें विलेन बना दिया जाता है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि समय आने पर उनकी ईमानदारी खुद उनका बचाव करेगी।
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'हीरो और विलेन की कहानी मीडिया बनाता है'
गंभीर ने कहा कि मीडिया अक्सर किसी भी कहानी में हीरो और विलेन ढूंढने की कोशिश करता है और इसी वजह से कई बार लोगों की गलत छवि बन जाती है। उन्होंने कहा, 'यह भी मीडिया का ही तोहफा है कि किसी कहानी में किसी को हीरो और किसी को विलेन बना दिया जाता है। हर फिल्म में हीरो और विलेन होता है, तो किसी को तो विलेन बनाना ही है। अगर मुझे बनाना है तो बना दीजिए।' गंभीर ने कहा कि वह हमेशा टीम को व्यक्ति से बड़ा मानते हैं और इसी विचार के कारण उन्हें कई बार आलोचना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई यह कहता है कि टीम व्यक्ति से बड़ी है और उसी वजह से उसे विलेन बना दिया जाता है, तो ठीक है। लेकिन मैं बाहर जाकर खुद को सही साबित करने की कोशिश नहीं करूंगा। एक दिन मेरी ईमानदारी ही मेरा बचाव करेगी।'
गंभीर ने कहा कि मीडिया अक्सर किसी भी कहानी में हीरो और विलेन ढूंढने की कोशिश करता है और इसी वजह से कई बार लोगों की गलत छवि बन जाती है। उन्होंने कहा, 'यह भी मीडिया का ही तोहफा है कि किसी कहानी में किसी को हीरो और किसी को विलेन बना दिया जाता है। हर फिल्म में हीरो और विलेन होता है, तो किसी को तो विलेन बनाना ही है। अगर मुझे बनाना है तो बना दीजिए।' गंभीर ने कहा कि वह हमेशा टीम को व्यक्ति से बड़ा मानते हैं और इसी विचार के कारण उन्हें कई बार आलोचना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'अगर कोई यह कहता है कि टीम व्यक्ति से बड़ी है और उसी वजह से उसे विलेन बना दिया जाता है, तो ठीक है। लेकिन मैं बाहर जाकर खुद को सही साबित करने की कोशिश नहीं करूंगा। एक दिन मेरी ईमानदारी ही मेरा बचाव करेगी।'
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'मैं अपनी जिंदगी काले और सफेद में जीता हूं'
गंभीर ने यह भी कहा कि वह अपनी जिंदगी को बहुत स्पष्ट तरीके से देखते हैं और उनके लिए सही और गलत के बीच ज्यादा ‘ग्रे एरिया’ नहीं होता। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कह सकता कि लोग मुझे गलत समझते हैं या नहीं, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं बेहद ईमानदार हूं। मैं अपनी जिंदगी काले और सफेद में जीता हूं और मेरे लिए ज्यादा ग्रे एरिया नहीं हैं।'
गंभीर ने यह भी कहा कि वह अपनी जिंदगी को बहुत स्पष्ट तरीके से देखते हैं और उनके लिए सही और गलत के बीच ज्यादा ‘ग्रे एरिया’ नहीं होता। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कह सकता कि लोग मुझे गलत समझते हैं या नहीं, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं बेहद ईमानदार हूं। मैं अपनी जिंदगी काले और सफेद में जीता हूं और मेरे लिए ज्यादा ग्रे एरिया नहीं हैं।'
चयन प्रक्रिया पर भी दी सफाई
टीम चयन को लेकर भी कई बार गंभीर को आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में चयन प्रक्रिया सामूहिक रूप से होती है और इसमें कोच या चयनकर्ता में से कोई भी अकेले फैसला नहीं करता। उन्होंने कहा, 'चाहे चयन समिति के अध्यक्ष हों, चयनकर्ता हों या हेड कोच, सभी का लक्ष्य एक ही होता है कि भारतीय क्रिकेट अच्छा प्रदर्शन करे। मतभेद होना अच्छी बात है, लेकिन अंत में फैसला क्रिकेट के हित में होना चाहिए।'
गंभीर ने चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि हमारे पास अजीत अगरकर जैसे ईमानदारी से काम करने वाले चयन समिति अध्यक्ष हैं। बीसीसीआई ने भी चयनकर्ताओं और कोच को सही फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता दी है।'
टीम चयन को लेकर भी कई बार गंभीर को आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में चयन प्रक्रिया सामूहिक रूप से होती है और इसमें कोच या चयनकर्ता में से कोई भी अकेले फैसला नहीं करता। उन्होंने कहा, 'चाहे चयन समिति के अध्यक्ष हों, चयनकर्ता हों या हेड कोच, सभी का लक्ष्य एक ही होता है कि भारतीय क्रिकेट अच्छा प्रदर्शन करे। मतभेद होना अच्छी बात है, लेकिन अंत में फैसला क्रिकेट के हित में होना चाहिए।'
गंभीर ने चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि हमारे पास अजीत अगरकर जैसे ईमानदारी से काम करने वाले चयन समिति अध्यक्ष हैं। बीसीसीआई ने भी चयनकर्ताओं और कोच को सही फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता दी है।'
‘अंडररेटेड’ शब्द से नफरत
गंभीर ने क्रिकेट में ‘अंडररेटेड’ शब्द के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह शब्द खिलाड़ियों के साथ अन्याय करता है। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट में सबसे खराब चीज तब होती है जब किसी खिलाड़ी को ‘अंडररेटेड’ कहा जाता है। खिलाड़ी भारत के लिए खेलने के लिए बहुत मेहनत और त्याग करते हैं। अगर किसी खिलाड़ी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स कम हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका प्रदर्शन कम महत्वपूर्ण है।'
गंभीर ने क्रिकेट में ‘अंडररेटेड’ शब्द के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह शब्द खिलाड़ियों के साथ अन्याय करता है। उन्होंने कहा, 'क्रिकेट में सबसे खराब चीज तब होती है जब किसी खिलाड़ी को ‘अंडररेटेड’ कहा जाता है। खिलाड़ी भारत के लिए खेलने के लिए बहुत मेहनत और त्याग करते हैं। अगर किसी खिलाड़ी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स कम हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका प्रदर्शन कम महत्वपूर्ण है।'
हर खिलाड़ी की मेहनत बराबर
गंभीर का मानना है कि टीम में हर खिलाड़ी का योगदान बराबर होता है, चाहे वह सुपरस्टार हो या कोई नया खिलाड़ी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फाइनल में शिवम दुबे के निचले क्रम में बनाए गए रन उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि टूर्नामेंट में संजू सैमसन के बनाए रन। इसी तरह उन्होंने युवा तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन को भी उतना ही अहम बताया जितना कि स्टार गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का योगदान। उन्होंने कहा, 'मैं कभी किसी के प्रदर्शन को कम नहीं आंकूंगा। क्योंकि मैं जानता हूं कि दबाव में प्रदर्शन करना कितना मुश्किल होता है।'
गंभीर का मानना है कि टीम में हर खिलाड़ी का योगदान बराबर होता है, चाहे वह सुपरस्टार हो या कोई नया खिलाड़ी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फाइनल में शिवम दुबे के निचले क्रम में बनाए गए रन उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि टूर्नामेंट में संजू सैमसन के बनाए रन। इसी तरह उन्होंने युवा तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह के प्रदर्शन को भी उतना ही अहम बताया जितना कि स्टार गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का योगदान। उन्होंने कहा, 'मैं कभी किसी के प्रदर्शन को कम नहीं आंकूंगा। क्योंकि मैं जानता हूं कि दबाव में प्रदर्शन करना कितना मुश्किल होता है।'
हर खिलाड़ी को मिले बराबर सम्मान
गंभीर ने कहा कि खिलाड़ियों को कमतर आंकना या उनके प्रदर्शन को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने कहा, 'किसी खिलाड़ी को कमतर या अंडररेटेड कहना सही नहीं है। भारत जैसे देश में 140 करोड़ लोगों के बीच सिर्फ 15 खिलाड़ी टीम में जगह बनाते हैं। ऐसे में हर खिलाड़ी को बराबर सम्मान मिलना चाहिए।'
गंभीर ने कहा कि खिलाड़ियों को कमतर आंकना या उनके प्रदर्शन को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने कहा, 'किसी खिलाड़ी को कमतर या अंडररेटेड कहना सही नहीं है। भारत जैसे देश में 140 करोड़ लोगों के बीच सिर्फ 15 खिलाड़ी टीम में जगह बनाते हैं। ऐसे में हर खिलाड़ी को बराबर सम्मान मिलना चाहिए।'