{"_id":"697335cff3421916cc016b69","slug":"t20-world-cup-row-manoj-tiwary-slams-political-interference-says-players-are-paying-the-price-2026-01-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आईसीसी vs बीसीबी: खिलाड़ियों की कीमत पर राजनीति? पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का बड़ा हमला, बांग्लादेश को लताड़ा","category":{"title":"Cricket","title_hn":"क्रिकेट","slug":"cricket"}}
आईसीसी vs बीसीबी: खिलाड़ियों की कीमत पर राजनीति? पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का बड़ा हमला, बांग्लादेश को लताड़ा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 23 Jan 2026 02:19 PM IST
विज्ञापन
सार
मनोज तिवारी ने बांग्लादेश के विश्व कप बहिष्कार को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि असली नुकसान खिलाड़ियों का हो रहा है। बीसीबी का तर्क सुरक्षा पर आधारित है, जबकि आईसीसी ने खतरे को नकार कर स्कॉटलैंड जैसे विकल्पों की तैयारी शुरू कर दी है। संकट गहराने से बांग्लादेश पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
बांग्लादेश टीम और मनोज तिवारी
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
बांग्लादेश के भारत में टी20 विश्व कप 2026 न खेलने के फैसले पर भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तिवारी ने कहा कि इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा नुकसान बांग्लादेशी खिलाड़ियों का हुआ है, जिन्हें अपने करियर का सुनहरा मौका गंवाना पड़ रहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि मामला क्रिकेट से हटकर राजनीति में बदल चुका है और खिलाड़ी बेबस हैं।
तिवारी ने कहा, 'यह बांग्लादेश खिलाड़ियों का नुकसान है। कोई भी खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना और विश्व कप खेलना चाहेगा। इससे उनका करियर आगे बढ़ता है। लेकिन खिलाड़ियों के हाथ में कुछ भी नहीं था। आईसीसी का निर्णय भी स्पष्ट था- खेलो या हटो।'
Trending Videos
तिवारी ने कहा, 'यह बांग्लादेश खिलाड़ियों का नुकसान है। कोई भी खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना और विश्व कप खेलना चाहेगा। इससे उनका करियर आगे बढ़ता है। लेकिन खिलाड़ियों के हाथ में कुछ भी नहीं था। आईसीसी का निर्णय भी स्पष्ट था- खेलो या हटो।'
विज्ञापन
विज्ञापन
'यह बोर्ड का फैसला नहीं, मंत्रालय का आदेश'
तिवारी ने आगे सवाल उठाया कि यह स्थिति आखिर कैसे यहां तक पहुंची। उन्होंने दावा किया कि निर्णय का नियंत्रण बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के हाथ में नहीं था, बल्कि यह खेल मंत्रालय से निर्देशित था। उन्होंने कहा, 'आईसीसी चेयरमैन और आईसीसी बहुत शक्तिशाली हैं। कोई नहीं जानता कि बांग्लादेश बोर्ड ने यह फैसला क्यों लिया। बाहर से साफ दिखता है कि यह बोर्ड का नहीं, वहां के खेल मंत्रालय का फैसला है।'
तिवारी ने खेल में राजनीति के प्रवेश पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा कहता हूं कि अगर राजनीति खेल में आएगी, तो ऐसे ही नजारे देखने को मिलेंगे। सिर्फ राजनीति की वजह से एक टेस्ट खेलने वाली टीम विश्व कप से बाहर हो रही है। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है।'
तिवारी ने आगे सवाल उठाया कि यह स्थिति आखिर कैसे यहां तक पहुंची। उन्होंने दावा किया कि निर्णय का नियंत्रण बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के हाथ में नहीं था, बल्कि यह खेल मंत्रालय से निर्देशित था। उन्होंने कहा, 'आईसीसी चेयरमैन और आईसीसी बहुत शक्तिशाली हैं। कोई नहीं जानता कि बांग्लादेश बोर्ड ने यह फैसला क्यों लिया। बाहर से साफ दिखता है कि यह बोर्ड का नहीं, वहां के खेल मंत्रालय का फैसला है।'
तिवारी ने खेल में राजनीति के प्रवेश पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा कहता हूं कि अगर राजनीति खेल में आएगी, तो ऐसे ही नजारे देखने को मिलेंगे। सिर्फ राजनीति की वजह से एक टेस्ट खेलने वाली टीम विश्व कप से बाहर हो रही है। यह इतिहास में पहली बार हो रहा है।'
बांग्लादेश का संकट गहराया
22 जनवरी को खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने दोबारा पुष्टि की कि बांग्लादेश भारत में विश्व कप नहीं खेलेगा। आईसीसी ने पहले बीसीबी को अंतिम मौका दिया था, लेकिन उसने अपनी सुरक्षा चिंताओं के आधार पर फैसला बदला नहीं। बीसीबी ने अपने मैच श्रीलंका में कराने का अनुरोध भी किया था, जिसे आईसीसी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि भारत में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है।
बीसीबी मानता है कि इस रुख से टीम को टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता है। बोर्ड, सीनियर खिलाड़ियों और अंतरिम सरकार के बीच बैठकें हुईं, लेकिन खिलाड़ी किसी भी तरह फैसले में प्रभाव नहीं डाल पाए। खिलाड़ियों ने इस प्रक्रिया को गर्वनमेंट कॉल बताया है, यानी अंतिम फैसला सरकार का था।
22 जनवरी को खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने दोबारा पुष्टि की कि बांग्लादेश भारत में विश्व कप नहीं खेलेगा। आईसीसी ने पहले बीसीबी को अंतिम मौका दिया था, लेकिन उसने अपनी सुरक्षा चिंताओं के आधार पर फैसला बदला नहीं। बीसीबी ने अपने मैच श्रीलंका में कराने का अनुरोध भी किया था, जिसे आईसीसी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि भारत में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है।
बीसीबी मानता है कि इस रुख से टीम को टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता है। बोर्ड, सीनियर खिलाड़ियों और अंतरिम सरकार के बीच बैठकें हुईं, लेकिन खिलाड़ी किसी भी तरह फैसले में प्रभाव नहीं डाल पाए। खिलाड़ियों ने इस प्रक्रिया को गर्वनमेंट कॉल बताया है, यानी अंतिम फैसला सरकार का था।
खिलाड़ियों की हताशा
खिलाड़ी महेदी हसन ने हाल में कहा कि सरकार और बोर्ड उनके गार्जियन हैं, जिससे साफ है कि टीम के पास निर्णय में कोई एजेंसी नहीं है। बांग्लादेश ने 2000 में टेस्ट दर्जा मिलने के बाद आज तक कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीता, ऐसे में विश्व कप से बाहर होना एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
खिलाड़ी महेदी हसन ने हाल में कहा कि सरकार और बोर्ड उनके गार्जियन हैं, जिससे साफ है कि टीम के पास निर्णय में कोई एजेंसी नहीं है। बांग्लादेश ने 2000 में टेस्ट दर्जा मिलने के बाद आज तक कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीता, ऐसे में विश्व कप से बाहर होना एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
भविष्य पर भी जोखिम
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर सिर्फ इस विश्व कप तक सीमित नहीं रहेगा। बांग्लादेश को भविष्य में क्वालिफायर मार्ग से गुजरना पड़ सकता है, जिससे आईसीसी के साथ संबंध और जटिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर सिर्फ इस विश्व कप तक सीमित नहीं रहेगा। बांग्लादेश को भविष्य में क्वालिफायर मार्ग से गुजरना पड़ सकता है, जिससे आईसीसी के साथ संबंध और जटिल हो सकते हैं।