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Dehradun News: हरिद्वार से रेफर लावारिस मरीजों की संख्या बढ़ने से बेड का संकट
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दून अस्पताल में भर्ती लावारिस मरीजों की देखभाल करने में अब प्रबंधन के हाथ-पैर फूल रहे हैं। कावड़ के दौरान हरिद्वार से रेफर होने वाले लावारिस मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद यह परेशानी और अधिक बढ़ गई है। ठीक होने के बाद लंबे समय तक भर्ती रहने से अस्पताल में बेड के लिए संकट भी पैदा होने लगा है। मरीजों के सुरक्षित निवास के लिए प्रबंधन ने जिलाधिकारी आशीष चौहान को पत्र भेजा है।
जानकारी के मुताबिक दून अस्तपाल में हर रोज बड़ी संख्या में लावारिस मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। किसी न किसी के माध्यम से एंबुलेंस की मदद से मरीज अस्पताल तो पहुंच जाते हैं लेकिन ठीक होने के बाद अस्पताल प्रबंधन उन्हें किनके सुपुर्द कर यह बड़ी परेशानी बन गई है। जिन मरीजों की स्थिति जाने लायक है उनके परिवार से संपर्क कर भेज दिया जाता है लेकिन बड़ी संख्या में मरीज ठीक होने के बाद भी भर्ती रह जाते हैं।
वर्तमान में 20 से भी अधिक लावारिस मरीज भर्ती हैं। इनमें से कई मरीज तो ऐसे हैं जो तीन से चार महीने से भर्ती हैं। अब जब बेड का संकट पैदा होने लगा तो अस्पताल प्रबंधन ने जिलाधिकार से मांग की कि लावारिस मरीजों सुरक्षित निवास पर जल्द से जल्द शिफ्ट करवाया जाए। इस पर अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि ठीक होने के बाद लंबे समय तक मरीजों के भर्ती रहने से बेड खाली नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों को देखभाल करने में भी दिक्कत आ रही है।
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जानकारी के मुताबिक दून अस्तपाल में हर रोज बड़ी संख्या में लावारिस मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। किसी न किसी के माध्यम से एंबुलेंस की मदद से मरीज अस्पताल तो पहुंच जाते हैं लेकिन ठीक होने के बाद अस्पताल प्रबंधन उन्हें किनके सुपुर्द कर यह बड़ी परेशानी बन गई है। जिन मरीजों की स्थिति जाने लायक है उनके परिवार से संपर्क कर भेज दिया जाता है लेकिन बड़ी संख्या में मरीज ठीक होने के बाद भी भर्ती रह जाते हैं।
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वर्तमान में 20 से भी अधिक लावारिस मरीज भर्ती हैं। इनमें से कई मरीज तो ऐसे हैं जो तीन से चार महीने से भर्ती हैं। अब जब बेड का संकट पैदा होने लगा तो अस्पताल प्रबंधन ने जिलाधिकार से मांग की कि लावारिस मरीजों सुरक्षित निवास पर जल्द से जल्द शिफ्ट करवाया जाए। इस पर अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि ठीक होने के बाद लंबे समय तक मरीजों के भर्ती रहने से बेड खाली नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों को देखभाल करने में भी दिक्कत आ रही है।
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