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Dehradun News: प्रदेश के बहादुर बच्चों को इस साल से मिलेगा बाल वीरता पुरस्कार

Mon, 17 Aug 2026 12:47 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:47 AM IST
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Brave children from the state will receive the Child Bravery Award starting this year.
देहरादून। प्रदेश के बहादुर बच्चों को इस साल से बाल वीरता पुरस्कार मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसकी घोषणा कर अमर उजाला की तीन फरवरी 2025 को प्रकाशित खबर पर मुहर लगा दी। अमर उजाला ने प्रदेश के बहादुर बच्चों को राज्य स्तर पर मिलेगा वीरता पुरस्कार शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। सीएम की घोषणा से बहादुर बच्चों को वीरता पुरस्कार मिलने का रास्ता साफ हो गया।
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राज्य के बहादुर बच्चों को हर साल गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाता रहा है, लेकिन किन्हीं वजहों से पिछले कुछ वर्षों से इन बच्चों को सम्मानित नहीं किया जा रहा है। भारतीय बाल कल्याण परिषद की ओर से इन बच्चों से आवेदन तक नहीं लिए जा रहे हैं। जबकि राज्य में गुलदार से दूसरों की जान बचाकर अदम्य साहस का परिचय देने वाले बच्चों के मामले अक्सर सामने आते हैं। इसके अलावा प्रदेश के वीर बच्चे अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में बहने से दूसरे को बचाने जैसे कई बहादुरी के काम करते रहे हैं।
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उत्तराखंड के 15 बाल वीर अब तक राष्ट्रीय स्तर पर हो चुके पुरस्कृत
देहरादून। राज्य के 15 बाल वीरों को अब तक राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार मिल चुका है। टिहरी गढ़वाल के हरीश राणा को वर्ष 2003, हरिद्वार की माजदा को 2004, अल्मोड़ा की पूजा कांडपाल को 2007, देहरादून के प्रियांशु जोशी को 2010, देहरादून की दिवंगत श्रुति लोधी को 2010, रुद्रप्रयाग के दिवंगत कपिल नेगी को 2011, चमोली की दिवंगत मोनिका उर्फ मनीषा को 2014, देहरादून के लाभांशु को 2014, टिहरी के अर्जुन को 2015, देहरादून के सुमित ममगाई को 2016, टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल को 2017, पौड़ी गढ़वाल की राखी को 2019, नैनीताल के सनी को 2020, पिथौरागढ़ के मोहित चंद उप्रेती को 2020 और रुद्रप्रयाग के नितिन रावत को 2022 में यह पुरस्कार मिल चुका है।
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राखी ने गुलदार से बचाई थी अपने भाई की जान
देहरादून। पौड़ी जिले की बहादुर बिटिया राखी अपने चार साल के छोटे भाई की जान बचाने के लिए गुलदार से भिड़ गई थी। उसकी इस वीरता को देखते हुए उसे पूर्व में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। राज्य में बाल वीरों के इस तरह के कई मामले हैं।
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