{"_id":"6a821804acf83cc66a03c9ce","slug":"pm-modi-sold-tea-whereas-i-sold-chaat-at-the-haridwar-bus-stand-harak-singh-dehradun-news-c-5-drn1043-1043377-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम मोदी ने चाय तो हमने हरिद्वार बस अड्डे पर चाट बेची : हरक सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम मोदी ने चाय तो हमने हरिद्वार बस अड्डे पर चाट बेची : हरक सिंह
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय बेची तो मैंने भी छात्र जीवन में हरिद्वार बस अड्डे पर चाट बेची है। जब पैसे नहीं थे तो दुकानदार के पास घड़ी गिरवी रख दी थी।
रविवार को प्रेस क्लब में सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ.हरक सिंह रावत ने अपने संघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा, श्रीनगर में 11वीं की पढ़ाई कर रहा था, उस समय मैंने ट्रेन नहीं देखी थी। बिना घरवालों को बताए घर से कोटद्वार पहुंच गया था, वहां पहली बार ट्रेन और ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखा। डॉ.रावत ने बताया कि ट्रेन बैठ गया, लेकिन उन्हें पता नहीं था ट्रेन कहां जा रही है। लक्सर स्टेशन पहुंच गया। उस समय उनके पास पैसे नहीं थे, स्टेशन के पास ही साइकिल स्टैंड पर काम किया। स्टैंड के मालिक की मिठाई की दुकान भी थी। एक दिन उन्हें दुकान के मालिक ने बर्तन साफ करने के लिए डांटा तो उनके आंसू निकल गए। दुकान में चाय पी रहे रोडवेज कंडक्टर उन्हें अपने साथ हरिद्वार ले आए। तीन दिन तक हरिद्वार में चाट बेची। 20 रुपये के लिए उन्होंने दसवीं पास करने पर पिता से गिफ्ट में मिली घड़ी को दुकानदार के पास गिरवी रख दिया। पिता के हस्तक्षेप से 20 रुपये देने के बाद दुकानदार ने घड़ी वापस लौटाई। पिता फौज में थे। घर के लिए 50 रुपये का मनीआर्डर आता था। इसमें 40 रुपये उनकी पढ़ाई पर खर्चा था, बाकी 10 रुपये से परिवार चलता था। परिवार ने फल, सब्जी, घास व लकड़ी भी भेजी। कहा माता-पिता का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा, आज माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई व कोचिंग के लिए गहने तक बेच रहे हैं। यदि पेपर लीक हो जाए तो माता-पिता के सपने टूट जाते हैं।
विज्ञापन
रविवार को प्रेस क्लब में सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ.हरक सिंह रावत ने अपने संघर्ष को साझा किया। उन्होंने कहा, श्रीनगर में 11वीं की पढ़ाई कर रहा था, उस समय मैंने ट्रेन नहीं देखी थी। बिना घरवालों को बताए घर से कोटद्वार पहुंच गया था, वहां पहली बार ट्रेन और ब्लैक एंड व्हाइट टीवी देखा। डॉ.रावत ने बताया कि ट्रेन बैठ गया, लेकिन उन्हें पता नहीं था ट्रेन कहां जा रही है। लक्सर स्टेशन पहुंच गया। उस समय उनके पास पैसे नहीं थे, स्टेशन के पास ही साइकिल स्टैंड पर काम किया। स्टैंड के मालिक की मिठाई की दुकान भी थी। एक दिन उन्हें दुकान के मालिक ने बर्तन साफ करने के लिए डांटा तो उनके आंसू निकल गए। दुकान में चाय पी रहे रोडवेज कंडक्टर उन्हें अपने साथ हरिद्वार ले आए। तीन दिन तक हरिद्वार में चाट बेची। 20 रुपये के लिए उन्होंने दसवीं पास करने पर पिता से गिफ्ट में मिली घड़ी को दुकानदार के पास गिरवी रख दिया। पिता के हस्तक्षेप से 20 रुपये देने के बाद दुकानदार ने घड़ी वापस लौटाई। पिता फौज में थे। घर के लिए 50 रुपये का मनीआर्डर आता था। इसमें 40 रुपये उनकी पढ़ाई पर खर्चा था, बाकी 10 रुपये से परिवार चलता था। परिवार ने फल, सब्जी, घास व लकड़ी भी भेजी। कहा माता-पिता का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा, आज माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई व कोचिंग के लिए गहने तक बेच रहे हैं। यदि पेपर लीक हो जाए तो माता-पिता के सपने टूट जाते हैं।
विज्ञापन