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भक्ति और संस्कार ही जीवन की सच्ची दिशा : देवकीनंदन ठाकुर
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Iकथा के चाैथे दिन महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सूत्र बताएI
रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार के सामने हाथ फैलाने के बजाय भगवान से ही मांगना चाहिए, क्योंकि सच्चा सहारा वही हैं। देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार और विनम्रता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान से अटूट संबंध ही जीवन का सच्चा आधार है और यही मनुष्य को सही दिशा देता है।
उन्होंने बच्चों में बचपन से ही पूजा-पाठ और भक्ति के संस्कार विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि बचपन में किए गए अच्छे संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं। कथा के दौरान उन्होंने टपकेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख करते हुए इसे महाभारत काल से जुड़ा बताया।
देवकीनंदन ने कथा के माध्यम से अश्वत्थामा और गुरु द्रोणाचार्य का प्रसंग सुनाया। बताया कि जब अश्वत्थामा को भूख लगी तो गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें संसार से मांगने के बजाय भगवान से प्रार्थना करने को कहा। इसके बाद भगवान शिव ने गुफा से दूध की धारा प्रवाहित कर उनकी भूख शांत की। इसके बाद अश्वत्थामा की भूख मिटाने के लिए भगवान शिव ने गुफा से दूध की धारा प्रवाहित की थी जो आज टपकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है और आज भी वहीं से जल टपकता है। इसी कारण इस स्थान को दूधेश्वर महादेव भी कहा जाता है।कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। भजनों और आकर्षक झांकियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और रेंजर्स ग्राउंड कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया।
महाराज ने एकादशी व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह व्रत मन की शुद्धि और पापों के नाश का माध्यम है। उन्होंने अभिमान को मनुष्य के पतन का मुख्य कारण बताते हुए विनम्रता और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
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रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार के सामने हाथ फैलाने के बजाय भगवान से ही मांगना चाहिए, क्योंकि सच्चा सहारा वही हैं। देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति, संस्कार और विनम्रता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान से अटूट संबंध ही जीवन का सच्चा आधार है और यही मनुष्य को सही दिशा देता है।
उन्होंने बच्चों में बचपन से ही पूजा-पाठ और भक्ति के संस्कार विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि बचपन में किए गए अच्छे संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं। कथा के दौरान उन्होंने टपकेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख करते हुए इसे महाभारत काल से जुड़ा बताया।
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देवकीनंदन ने कथा के माध्यम से अश्वत्थामा और गुरु द्रोणाचार्य का प्रसंग सुनाया। बताया कि जब अश्वत्थामा को भूख लगी तो गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें संसार से मांगने के बजाय भगवान से प्रार्थना करने को कहा। इसके बाद भगवान शिव ने गुफा से दूध की धारा प्रवाहित कर उनकी भूख शांत की। इसके बाद अश्वत्थामा की भूख मिटाने के लिए भगवान शिव ने गुफा से दूध की धारा प्रवाहित की थी जो आज टपकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है और आज भी वहीं से जल टपकता है। इसी कारण इस स्थान को दूधेश्वर महादेव भी कहा जाता है।कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। भजनों और आकर्षक झांकियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और रेंजर्स ग्राउंड कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया।
महाराज ने एकादशी व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह व्रत मन की शुद्धि और पापों के नाश का माध्यम है। उन्होंने अभिमान को मनुष्य के पतन का मुख्य कारण बताते हुए विनम्रता और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।