समय बदलने के साथ भले ही लोग मिट्टी से दूर होते गए, लेकिन मिट्टी से बने उत्पादों का चलन कम नहीं हुआ है। मिट्टी के उत्पादों के विक्रेता व कुम्हारों की आजीविका मिट्टी से ही जुड़ी हुई है। रंग और आकार में परिवर्तन कर नए कलेवर में मिट्टी के उत्पाद बाजार में अपनी धमक बनाए हुए हैं। वहीं परंपराओं और मान्यताओं की वजह से मिट्टी के बाजार का अस्तित्व बरकरार है।
दीपावली 2021: फैंसी बाजार की चकाचौंध को टक्कर दे रही माटी, बढ़ा मिट्टी के बने उत्पादों का चलन, तस्वीरें
दीपावली समेत कई त्योहारों के साथ विभिन्न समुदायों की परंपराओं में मिट्टी के उत्पादों का विशेष महत्व है। यही कारण है कि लोगों को मिट्टी से लगाव बरकरार है।
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कुकर - 1200 रुपये
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सजावट का सामान
फ्लोटिंग कैंडल - 1200 रुपये
लैंप - 150 से 400 रुपये तक
दीया - एक रुपये से 50 रुपये तक
खिलौने - 50 रुपये से 1000 तक
मयंक प्रजापति ने बताया कि 20-25 साल से हमारा परिवार यहां पर काम कर रहा है। पहले दादा और मेरे पिता ये काम करते थे। अब मैं करता हूं। पिछले पांच साल में मिट्टी के उत्पादों के चलन में तेजी आई है। इसकी खास वजह यह है कि अब इन्हें सजाया जा रहा है। पहले कुछ ही सामान बनता था। अब बर्तनों से लेकर खिलौने और घर की सजावट का सामान बन रहा है।
चकराता रोड किनारे मिट्टी के उत्पादों के विक्रेता राकेश प्रजापति ने बताया कि अब लोग मिट्टी के बर्तन खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। हमने भी थोड़े से रंग भर कर मिट्टी के उत्पादों को नए कलेवर में पेश किया है। इससे कारोबार को गति मिली है। अब मिट्टी के उत्पादों को भी कई डिजाइन के साथ बनाया जा रहा है।