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Dehradun News: पूर्व व वर्तमान पुलिस अफसर आए खुलकर सामने, की कांग्रेस की निंदा
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एसएसपी नैनीताल के हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में कांग्रेस के हंगामे व धरना देने और उनकी (अनुपस्थिति में) अपशब्द कहे जाने के विरोध में पूर्व व वर्तमान अधिकारी खुलकर सामने आ गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब आईपीएस, पीपीएस व सेवानिवृत्त अधिकारियों की एसोसिएशन ने इस पर प्रकार से अपना विरोध दर्ज कराया है। सभी ने इस घटना की घोर निंदा की। यही नहीं सभी जिला पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट कर इस घटना की निंदा की। पुलिस अफसरों ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध और असहमति जताने का अधिकार है लेकिन सरकारी कार्यालय की गरिमा भूलना और अफसर के साथ गाली गलौज अमर्यादित व शर्मनाक है।
हल्द्वानी में शनिवार को कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा हुई थी। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर कार्यकर्ताओं की बसों को रोक रही है। इसका विरोध जताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ कांग्रेसियों का दल एसएसपी के कैंप कार्यालय पहुंच गया। यहां उत्तेजना में प्रदेश अध्यक्ष ने भी एसएसपी को अपशब्द कहे और दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल होना चाहा।
हालांकि, वह वहां नहीं मिले तो आरोप है कि उन्हें और भी अपमानजक भाषा में धमकियां तक दी गईं। इसके बाद उन्होंने वहां धरना शुरू कर दिया। उस वक्त नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत कई बड़े कांग्रेसी नेता मौजूद थे। इसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई। इस घटना के बाद से पुलिस अधिकारियों में भारी नाराजगी है। पुलिस ने अपनी नाराजगी को विभिन्न पत्र और सोशल मीडिया के जरिए जाहिर किया है।
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आईपीएस एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव आईपीएस बरिंदरजीत सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी लोकसेवक से गाली गलौज, अभद्रता, अपमानजनक व्यवहार करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यह आचरण न केवल उनका अपमान है बल्कि पुलिस की संस्थागत गरिमा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति गंभीर असम्मान है।
उत्तराखंड पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार सिंह की ओर से भी पत्र जारी किया गया है। उन्होंने अमर्यादित व्यवहार किए जाने पर कांग्रेस की घोर निंदा की है। इनके अलावा पीपीएस (सेवानिवृत्त) ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन और पुलिस पेंशनर्स कल्याण समिति की ओर से भी निंदा पत्र जारी किए गए हैं।
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सभी 13 जिलों की पुलिस ने सोशल मीडिया पर की निंदा
इस घटना के विरोध में सभी जिलों की पुलिस की ओर से भी सोशल मीडिया पर निंदा की गई है। हरिद्वार पुलिस ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि विरोध दर्ज करना अधिकार है जबकि शासकीय कार्यालय की गरिमा रखना दायित्व। ऊधमसिंह नगर पुलिस ने लिखा है कि तथ्य स्पष्ट हैं, आरोप निराधार हैं। ऊधमसिंह नगर पुलिस इस प्रकरण की घोर निंदा करती है। चंपावत पुलिस ने लिखा है कि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है। अमर्यादित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं। टिहरी पुलिस की ओर से लिखा गया है कि मर्यादा का सम्मान करें सहयोग से समाधान। उत्तरकाशी पुलिस ने भी लिखा कि लोकतंत्र में असहमति का स्थान है लेकिन अनुशासनहीनता का नहीं। राजधानी देहरादून पुलिस ने भी निंदा करते हुए लिखा कि शासकीय कार्यालयों की गरिमा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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हल्द्वानी में शनिवार को कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा हुई थी। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर कार्यकर्ताओं की बसों को रोक रही है। इसका विरोध जताने के लिए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ कांग्रेसियों का दल एसएसपी के कैंप कार्यालय पहुंच गया। यहां उत्तेजना में प्रदेश अध्यक्ष ने भी एसएसपी को अपशब्द कहे और दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल होना चाहा।
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हालांकि, वह वहां नहीं मिले तो आरोप है कि उन्हें और भी अपमानजक भाषा में धमकियां तक दी गईं। इसके बाद उन्होंने वहां धरना शुरू कर दिया। उस वक्त नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत कई बड़े कांग्रेसी नेता मौजूद थे। इसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई। इस घटना के बाद से पुलिस अधिकारियों में भारी नाराजगी है। पुलिस ने अपनी नाराजगी को विभिन्न पत्र और सोशल मीडिया के जरिए जाहिर किया है।
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आईपीएस एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव आईपीएस बरिंदरजीत सिंह की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी लोकसेवक से गाली गलौज, अभद्रता, अपमानजनक व्यवहार करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यह आचरण न केवल उनका अपमान है बल्कि पुलिस की संस्थागत गरिमा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति गंभीर असम्मान है।
उत्तराखंड पीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार सिंह की ओर से भी पत्र जारी किया गया है। उन्होंने अमर्यादित व्यवहार किए जाने पर कांग्रेस की घोर निंदा की है। इनके अलावा पीपीएस (सेवानिवृत्त) ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन और पुलिस पेंशनर्स कल्याण समिति की ओर से भी निंदा पत्र जारी किए गए हैं।
सभी 13 जिलों की पुलिस ने सोशल मीडिया पर की निंदा
इस घटना के विरोध में सभी जिलों की पुलिस की ओर से भी सोशल मीडिया पर निंदा की गई है। हरिद्वार पुलिस ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि विरोध दर्ज करना अधिकार है जबकि शासकीय कार्यालय की गरिमा रखना दायित्व। ऊधमसिंह नगर पुलिस ने लिखा है कि तथ्य स्पष्ट हैं, आरोप निराधार हैं। ऊधमसिंह नगर पुलिस इस प्रकरण की घोर निंदा करती है। चंपावत पुलिस ने लिखा है कि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है। अमर्यादित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं। टिहरी पुलिस की ओर से लिखा गया है कि मर्यादा का सम्मान करें सहयोग से समाधान। उत्तरकाशी पुलिस ने भी लिखा कि लोकतंत्र में असहमति का स्थान है लेकिन अनुशासनहीनता का नहीं। राजधानी देहरादून पुलिस ने भी निंदा करते हुए लिखा कि शासकीय कार्यालयों की गरिमा एवं कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।