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Uttarakhand: नौसेना की गौरवशाली तस्वीर है कुरसुरा पनडुब्बी, 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

विशाखापट्टनम से भूपेंद्र राणा Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 11 Feb 2026 01:20 PM IST
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सार

कुरसुरा पनडुब्बी नौसेना की गौरवशाली तस्वीर है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में कुरसुरा महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है।

Kursura submarine is a proud symbol of the Navy played a crucial role in the 1971 Indo-Pak War
कुरसुरा पनडुब्बी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

बंगाल की खाड़ी से सटे विशाखापट्टनम के तट पर पनडुब्बी संग्रहालय में मौजूद आईएनएस कुरसुरा एस-20 नौसेना की गौरवशाली तस्वीर दिखा रही है। 1971 के भारत–पाक युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाली ऐतिहासिक पनडुब्बी आईएनएस कुरसुरा पर्यटकों के लिए नौ सेना शक्ति का प्रतीक है।

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पूर्वी-दक्षिणी एशिया का एक मात्र पनडुब्बी संग्रहालय विशाखापट्टनम में है। लगभग 1945 टन क्षमता की कुरसुरा को 1969 में भारत ने तत्कालीन सोवियत रूस से खरीदा था। इसी से 1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। नौ सेना में 31 साल की सेवा के बाद फरवरी 2001 आईएनएस पनडुब्बी कुरसुरा को सेवा मुक्त कर दिया गया था।

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सोनार सिस्टम ईको से दुश्मनों की निगरानी करता
91.3 मीटर लंबी पनडुब्बी में सात कंपार्टमेंट हैं। कुरसुरा पनडुब्बी की खासियत यह है कि 48 दिन तक पानी के अंदर 280 मीटर गहराई तक रह सकती है। समुद्र के अंदर निगरानी के लिए पनडुब्बी में सोनार व ऊपरी सतह पर रडार सिस्टम है। सोनार सिस्टम ईको से दुश्मनों की निगरानी करता है, इसमें टॉरपीडो लांचर भी है।

पनडुब्बी संग्रहालय की देखरेख कर रहे पूर्व सब लेफ्टिनेंट अनिल चौधरी ने आईएनएस पनडुब्बी कुरसुरा के संचालन, रणनीति और तकनीकी क्षमताओं के बारे में विस्तार से बताया। भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने टॉरपीडो कक्ष, कमांड रूम, क्रू क्वार्टर, इंजन रूम के बारे में भी जानकारी ली।

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लंबी दूरी की समुद्री निगरानी में महारथ था टीयू 142

विशाखापट्टनम विमानन संग्रहालय में रखे टीयू 142 विमान को लंबी दूरी तक समुद्र के अंदर निगरानी करने में महारथ हासिल थी। यह विमान अपनी उत्कृष्ट तकनीक, लंबी उड़ान क्षमता और रणनीतिक महत्व के कारण भारतीय नौसेना की शक्ति का प्रतीक रहा है। वर्ष 2017 में सेवा निवृत्त होने के बाद इसे संग्रहालय के रूप में स्थापित किया गया था, ताकि आमजन और युवाओं को नौसेना के इतिहास से परिचित कराया जा सके।

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