पहाड़ और पीड़ा: शराब ने छीन ली गांव की सौंधी सुगंध, कैसे लड़ें यहां तो झुंड में शराब पीते हैं लोग
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उत्तराखंड में टिहरी से करीब 25 किमी दूर पहाड़ों की नैसर्गिक सुषमा देखते ही बनती है। धनोल्टी यहां से 15 किमी दूर रह जाता है। दाईं ओर सौड़ गांव पर नजर जाती है जो सड़क से बहुत नीचे हैं, जहां महिलाएं सिर पर घास के गट्ठर लिए गांव की ओर जा रही हैं। ये महिलाएं खड़ी चढ़ाई से नहीं डरती। दो किमी दूर कुएं से पानी लाने में नहीं थकती।
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उत्तराखंड में टिहरी से करीब 25 किमी दूर पहाड़ों की नैसर्गिक सुषमा देखते ही बनती है। धनोल्टी यहां से 15 किमी दूर रह जाता है। दाईं ओर सौड़ गांव पर नजर जाती है जो सड़क से बहुत नीचे हैं, जहां महिलाएं सिर पर घास के गट्ठर लिए गांव की ओर जा रही हैं। ये महिलाएं खड़ी चढ़ाई से नहीं डरती। दो किमी दूर कुएं से पानी लाने में नहीं थकती।
गांव से दूर जंगल जाना उन्हें नहीं अखरता। वे तब भी नहीं बिखरतीं, जब दिनभर की मेहनत के बाद सुनती हैं कि तूने किया क्या। वह टूटी है गांव में फैली नशे की लत से। शराब जिसने गांव की सौंधी सुगंध छीन ली।
जिसकी वजह से महिलाओं के अपने रास्ते उन्हें डराते हैं। उनकी सहजता खत्म हो गई। घर में उत्पीड़न सहती हैं। बाहर भी सहमी हुई रहती हैं। ऐसा नहीं कि महिलाओं ने कुछ नहीं किया।
उन्होंने नशाबंदी को लेकर रैली निकाली। घर-घर जाकर सबको समझाया। शराब लेकर जा रहे ट्रक को रोकने की कोशिश की लेकिन वह तेज रफ्तार में भाग निकला। पुलिस से भी शिकायत की, पर गांव नशे से मुक्त न हो सका।
पूरा दिन काम में गुजर जाता है और शाम को भी सुकून नहीं मिलता
कहती हैं कि बच्चे पर गलत असर पड़ता है। उन्हें बहुत समझाया पर नहीं सुनते। पूरा दिन काम में गुजर जाता है। शाम को भी सुकून नहीं मिलता। जंगल में शराब लिए बैठे मिलते हैं। हम लोग इकट्ठे जंगल जाते हैं। पानी भी दो किमी दूर से लाते हैं। गांव का रास्ता नहीं है। ऊंची-नीची पगडंडियां हैं।
विमला के पति ठांगदा में काम करते हैं। बताती हैं जो लोग शराब बेचते हैं, हम उनके घर भी गए। उन्हें समझाया पर वे नहीं माने। बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। हम बाहर अकेले नहीं जा सकते। शादी-ब्याह में भी खूब शराब चलती है। बेचने वाले नाबालिग बच्चों को भी दे रहे हैं। सड़क पर महिलाओं का जाना मुश्किल हो गया है।
गुड्डी के पति घर में ही रहते हैं। कभी-कभी गाड़ी चलाते हैं। दोनों बेटे बड़े हैं। वह खुद खेतीबाड़ी करती हैं। कहती हैं कोई और दिक्कत हो तो निबट भी लें। नशे से कैसे लड़ें। झुंड में लोग शराब पीते हैं। हम बचते हुए रास्तों से निकलते हैं। शाम को पति मारपीट करते हैं।
शीशा त हमारू वू ही छन, अगर पिंदा न
उसके बाद इस उत्पीड़न को सहकर रात भर दर्द से कराहती हैं। सुमित्रा के पति मजदूरी करते हैं। कहती हैं पति जितना कमाते हैं उतना ही समाते हैं। मना करने पर भी नहीं मानते। महिलाओं की अथक मेहनत की बत सुनकर मैंने पूछा आप लोगों को शीशा देखने का वक्त मिलता है, शर्मिला के जवाब में बड़ा मर्म है, शीशा त हमारू वू ही छन, अगर पिंदा न। मतलब शीशा तो हमारा पति ही है अगर वह शराब न पीए।
कई गांवों में बंद कराई कॉकटेल पार्टी
ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति रानीचौरी चंबा की महिलाएं इस गांव में भी नशा मुक्ति के लिए काम कर रही हैं। संस्था की कुंभी बाला भट्ट कहती हैं यहां हम महिलाओं के साथ मीटिंग करते हैं तो पुरुष हमें धमकाते हैं। 90 गांवों में महिला मंगल दल हैं। 50 गांवों में स्वयं सहायता समूह हैं।
इस क्षेत्र की शादियों में शराब का बहुत प्रचलन है। हमने गांवों में मीटिंग कर कई शादियों में कॉकटेल पार्टी बंद कराई है। एक बार हम लोगों ने कणाताल से जड़ीपानी तक नशा मुक्ति के लिए रैली निकाली। कुछ गांवों में लोग मान जाते हैं पर सौड़ में अब तक किए सारे प्रयास निष्फल ही रहे। पुलिस की मदद से ही गांव में नशे को रोका जा सकता है।