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Uttarakhand: अब कम अंतराल में कॉर्बेट से राजाजी पहुंचेंगे पांच बाघ, बढ़ेगा कुनबा, योजना में इस बार बदलाव

Mon, 29 Jun 2026 08:03 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 29 Jun 2026 08:03 AM IST
सार

उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच बाघ लाने की तैयारी है। इस बार पहले की तुलना में ट्रांसलोकेशन की प्रक्रिया तेज होगी और एक से दो साल के भीतर सभी बाघों को राजाजी पहुंचाने की योजना है।

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Rajaji Tiger Reserve Prepares to Bring Five Tigers from Corbett with Revised Strategy Uttarakhand news
बाघ - फोटो : संवाद

विस्तार

राजाजी टाइगर रिजर्व में कार्बेट टाइगर रिजर्व से पांच बाघ लाने की तैयारी है। पर इस बार पिछली बार की तुलना में योजना में बदलाव होगा। राजाजी टाइगर रिजर्व में पांच बाघों को अधिक अंतराल में नहीं बल्कि कुछ ही अवधि में लाया जाएगा। वहीं, अलवर में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रिइंट्रोडक्शन एंड पापुलेशन रिकवरी आफ टाइगर इन इंडिया रिपोर्ट जारी की है। इसमें इस प्रयास के बारे में जिक्र कर इसे बेहतर कदम बताया गया है।

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राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बहुत कम है। इसके बाद यहां पर संख्या बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किया गया। 2020 से 2025 तक पांच बाघों को पहुंचया गया। इस तरह औसत एक साल में एक बाघ को ट्रांसलोकेट किया जा सका। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे बताते हैं कि पांच बाघों को सीटीआर से लाया जाना है। इनको एक से दो साल के भीतर राजाजी टाइगर रिजर्व में लाया जाएगा।

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रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

रिपोर्ट में बताया गया है कि राजाजी टाइगर रिजर्व बाघों की आबादी बढ़ाने का एक अच्छा उदाहरण बन गया है। राजाजी के पश्चिमी हिस्से में सिर्फ दो बाघिन ही रह गई थीं, इस स्थिति को सुधारने के लिए सीटीआर से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों को स्थानांतरित किया गया। यह कार्यक्रम बताता है कि जहां प्राकृतिक रूप से बाघ वापस नहीं आ पाते, वहां पर बाहर से बाघों के लाना उपयोगी साबित हो सकता है।

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एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई ने तैयार की रिपोर्ट

अलवर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वन मंत्री ने रोड मैप फार एक्टिव मैनेजमेंट और टाइगर इन इंडिया रिपोर्ट-2026 भी जारी की है। इस रोड मैप को बाघों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बाघों को संरक्षित किया जाना है। डब्ल्यूआईआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक बिलाल बताते हैं कि आने वाले दिनों में बाघ के संरक्षण कैसे काम किया जा सकता है, उसका उल्लेख किया गया है। संरक्षण के दृष्टिगत कैसे वास स्थल को ठीक करना है, जन सहभागिता को बढ़ाना है समेत सभी पहलू का उल्लेख किया गया है।



 

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