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Chamoli: तमक नाला बना सिरदर्द, एक दशक में तीन बार बह चुका पुल, हर साल पानी में बह रही है आवाजाही की व्यवस्था

Wed, 12 Aug 2026 01:26 PM IST
Renu Saklani प्रदीप भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
प्रदीप भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Published by: Renu Saklani Updated Wed, 12 Aug 2026 01:26 PM IST
सार

तमक नाला बीआरओ के लिए सिरदर्द बना हुआ है। एक दशक में तीन बार पुल बह चुका है। हर साल आवाजाही की व्यवस्था पानी में बह रही है।

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Tamak Nala  trouble for administration-BRO for several years China border connects Jyotirmath Malari highway
तमक नाले में तबाही - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

चीन सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ज्योतिर्मठ-मलारी हाईवे पर तमक नाला प्रशासन और बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के लिए कई वर्षों से सिरदर्द बना हुआ है। इस गदेरे पर आवाजाही के लिए जो भी व्यवस्था की जाती है वह हर साल पानी में बह जाती है। पिछले दस साल में पुल तीन बार बह चुका है जबकि कई बार अस्थायी व्यवस्था भी बह चुकी है।

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वर्ष 2016 में यह नाला उफान पर आया था। उस वक्त यहां बीआरओ की ओर से बनाया गया पक्का पुल क्षतिग्रस्त होकर तिरछा हो गया था। इसके बाद बीआरओ ने ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी व्यवस्था की तो कभी अस्थायी पुल बनाया जाता लेकिन हर बार आवाजाही के लिए की गई व्यवस्था एक झटके में बहती गई। बीआरओ ने फिर यहां पर पक्का पुल बनाया लेकिन पिछले साल रात को नाला उफान पर आया और इस पुल का नामोनिशान खत्म हो गया। पिछले महीने यहां पर बैली ब्रिज बनकर तैयार हुआ था जो सोमवार को तिनके की तरह बह गया। 2016 से पूर्व भी यहां पर कई बार पुल व अस्थायी व्यवस्था की जाती रही लेकिन हर बार यह नाला उसे तोड़ता रहा है।

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लोगों ने वर्ष 2016 में छोड़ दिए थे घर

तमक नाले के आसपास लोगों ने आवासीय घर बना दिए थे लेकिन वर्ष 2016 में जब नाला उफान पर आया तो लोगों के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। उसके बाद लोगों ने इन घरों को छोड़ दिया। अब यह घर मलबे में दफन हो चुके हैं।

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मलबे में बह गए सेब व अखरोट के पेड़

तमक नाले के उफान पर आने से आसपास की भूमि पर ग्रामीणों की ओर से तैयार किए गए सेब, खुमानी, आड़ू के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। काश्तकार नंदन सिंह के सेब के 50 पेड़ बह गए हैं। कल्याण सिंह के 20 पेड़, विशन सिंह के 30 पेड़, हुकम सिंह के 10 पेड़ बह गए हैं। पदम सिंह के सेब और अखरोट के पेड़ बहे हैं। हुकम सिंह, दरवान सिंह, शंकर सिंह, अजब सिंह, श्यामा देवी, बुद्धि देवी और प्रेम सिंह के सेब के पौधों को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही वन विभाग की चौकी और मत्स्य पालन के लिए बनाए गए तालाबों को भी काफी नुकसान हुआ है।

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