फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Tamaknala Chamoli Scientists to determine experienced heavy rainfall or a cloudburst Uttarakhand news

Uttarakhand: तमकनाला में बारिश ज्यादा हुई या फटा बादल, वैज्ञानिक अध्ययन होगा, सचिव आपदा प्रबंधन ने भेजा पत्र

Wed, 12 Aug 2026 11:46 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 12 Aug 2026 11:46 AM IST
सार

चीन सीमा को जोड़ने वाले हाईवे पर नीती घाटी में भारी बारिश के कारण तमक नाला उफान पर आने से वैली ब्रिज बहने के बाद बाधित हुई वाहनों की आवाजाही को जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के त्वरित प्रयासों से सुचारू कर दिया गया है। तमकनाला में बारिश ज्यादा हुई या बादल फटा। इसका वैज्ञानिक अध्ययन होगा। सचिव आपदा प्रबंधन ने प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों को इस संबंध में पत्र भेजा है।

विज्ञापन
Tamaknala Chamoli Scientists to determine experienced heavy rainfall or a cloudburst Uttarakhand news
तमक नाले में तबाही - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में 10 अगस्त को अचानक बढ़े जलप्रवाह और भारी मलबे की असली वजह अब वैज्ञानिक अध्ययन से सामने आएगी। आपदा प्रबंधन विभाग ने घटना के कारणों का पता लगाने के लिए प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों को पत्र भेजा है। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि जलप्रवाह सामान्य बारिश, अत्यधिक स्थानीय बारिश, बादल फटने, तीव्र सतही बहाव या किसी अन्य जल वैज्ञानिक कारण से बढ़ा।

विज्ञापन

विभाग ने वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस), उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (यू-सैक), भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के निदेशकों को पत्र भेजा है।

विज्ञापन

संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी
वैज्ञानिक संस्थानों से तमकनाला के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का अध्ययन कर अचानक बढ़े जलप्रवाह के वास्तविक स्रोत की पहचान करने को कहा गया है। साथ ही नाले में आए भारी मलबे के स्रोत और उत्पत्ति क्षेत्र का पता लगाने के अलावा ऊपरी क्षेत्र में भूस्खलन, भू-धंसाव, ढलान विफलता, चट्टानों के टूटने अथवा अन्य भू-आकृतिक गतिविधियों की भूमिका का परीक्षण भी किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन


संभावित ग्लेशियर झील के जोखिम का भी आकलन होगा।सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ा होने के साथ स्थानीय जनजीवन, आवागमन और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में घटना के कारणों और भविष्य के संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।

15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया

सचिव आपदा प्रबंधन सुमन ने संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों से अपने-अपने विशेषज्ञता क्षेत्र के अनुसार अध्ययन व परीक्षण कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्राप्त वैज्ञानिक निष्कर्षों के आधार पर क्षेत्र में भविष्य के जोखिमों को कम करने एवं निगरानी तथा पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विशेषज्ञ सुझाव प्राप्त होंगे।

बारिश की तीव्रता और अवधि का होगा अध्ययन

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययन में घटना से पूर्व एवं घटना के बाद क्षेत्र की स्थिति के तुलनात्मक आकलन के लिए उपग्रह चित्रों, उच्च रिजॉल्यूशन रिमोट सेंसिंग, ड्रोन सर्वेक्षण एवं जीआईएस आधारित विश्लेषण सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है। संबंधित संस्थानों से क्षेत्र में संभावित भूस्खलन, रॉकफॉल, मलबा प्रवाह, फ्लैश फ्लड अथवा अन्य तीव्र भू-जलवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रमाणों का वैज्ञानिक परीक्षण करने को कहा गया है।

ये भी पढे़ं...Uttarakhand: प्रदेश में एक माह में मात्र एक फीसदी मदरसों ने ली मान्यता, प्राधिकरण को सौंपी गई जांच रिपोर्ट

अर्ली वार्निंग एवं रियल टाइम मॉनिटरिंग पर भी विशेषज्ञ राय

पत्र में क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम, रियल टाइम मॉनिटरिंग, वर्षामापी एवं जलस्तर सेंसर, कैमरा आधारित निगरानी अथवा अन्य आधुनिक निगरानी तंत्र स्थापित किए जाने की आवश्यकता के संबंध में भी विशेषज्ञ राय उपलब्ध कराने को कहा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed