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Dehradun News: तिब्बती समुदाय ने रैली निकालकर बुलंद की आवाज
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मसूरी। 11वें पंचेन लामा के गायब होने के 31 वर्ष पूरे होने पर तिब्बती समुदाय ने शहर में रैली निकालकर मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। तिब्बती महिला संघ ने कहा कि आज भी पंचेन लामा और उनके परिवार के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।रविवार को तिब्बती महिला संघ के नेतृत्व में समुदाय ने हैप्पीवैली से लेकर मालरोड होते हुए लाइब्रेरी चौक तक रैली निकाली है।
तिब्बती महिला संघ द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 14 मई 1995 को पारंपरिक तिब्बती रीति-रिवाजों के तहत गेधुन चोएक्यी न्यिमा को 10वें पंचेन लामा का वास्तविक पुनर्जन्म घोषित किया गया था। इसके तीन दिन बाद 17 मई 1995 को चीनी सरकार द्वारा उन्हें उनके परिवार और सहयोगियों सहित हिरासत में ले लिया गया। तब से उनका कोई अता-पता नहीं है। तिब्बती महिला संघ ने कहा कि उस समय पंचेन लामा की आयु छह वर्ष से भी कम थी, जिसके चलते उन्हें दुनिया का सबसे कम उम्र का राजनीतिक कैदी माना गया। संगठन ने इसे बच्चों और मानवाधिकारों के अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया। बयान में चीनी सरकार के तथाकथित ऑर्डर नंबर 5 का भी विरोध किया गया, जिसे तिब्बती बौद्ध परंपरा और पुनर्जन्म की मान्यता में हस्तक्षेप बताया गया है। संघ का कहना है कि यह कदम तिब्बती लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
तिब्बती महिला संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बती लोगों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाने और चीन पर दबाव बनाने की अपील की है, ताकि पुनर्जन्म संबंधी तिब्बती परंपराओं में हस्तक्षेप करने वाले सभी आदेश वापस लिए जा सकें। संघ ने 11वें पंचेन लामा के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनके सुरक्षित और सम्मानजनक रूप से वापस लौटने की आशा व्यक्त की।
तिब्बती महिला संघ द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 14 मई 1995 को पारंपरिक तिब्बती रीति-रिवाजों के तहत गेधुन चोएक्यी न्यिमा को 10वें पंचेन लामा का वास्तविक पुनर्जन्म घोषित किया गया था। इसके तीन दिन बाद 17 मई 1995 को चीनी सरकार द्वारा उन्हें उनके परिवार और सहयोगियों सहित हिरासत में ले लिया गया। तब से उनका कोई अता-पता नहीं है। तिब्बती महिला संघ ने कहा कि उस समय पंचेन लामा की आयु छह वर्ष से भी कम थी, जिसके चलते उन्हें दुनिया का सबसे कम उम्र का राजनीतिक कैदी माना गया। संगठन ने इसे बच्चों और मानवाधिकारों के अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया। बयान में चीनी सरकार के तथाकथित ऑर्डर नंबर 5 का भी विरोध किया गया, जिसे तिब्बती बौद्ध परंपरा और पुनर्जन्म की मान्यता में हस्तक्षेप बताया गया है। संघ का कहना है कि यह कदम तिब्बती लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
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तिब्बती महिला संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बती लोगों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाने और चीन पर दबाव बनाने की अपील की है, ताकि पुनर्जन्म संबंधी तिब्बती परंपराओं में हस्तक्षेप करने वाले सभी आदेश वापस लिए जा सकें। संघ ने 11वें पंचेन लामा के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए उनके सुरक्षित और सम्मानजनक रूप से वापस लौटने की आशा व्यक्त की।