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Roorkee: गोशाला बनी ऊर्जा का केंद्र, खत्म हुई एलपीजी पर निर्भरता, ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम की सोच लाई रंग

अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: Renu Saklani Updated Mon, 18 May 2026 07:24 AM IST
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सार

महंगाई और बढ़ती एलपीजी जरूरतों के बीच रुड़की के एक गांव ने आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है। यहां गोशाला अब सिर्फ पशुओं के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल बन चुकी है। ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम की सोच और पहल से गोबर गैस के जरिए एलपीजी पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है, वहीं अब गांव में बिजली उत्पादन की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

Electricity generate from cowshed village head Swami Ghanshyam presented model cowshed Roorkee News
गोबर गैस से जल रहे चूल्हे के साथ खड़े ग्राम प्रधान एवं परिवार के लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

एलपीजी की बढ़ती जरूरत और महंगाई के दौर में एक ग्राम प्रधान ने आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो देश के लिए अनुकरणीय मॉडल बन सकती है। ग्राम प्रधान की दूरदर्शी सोच ने न सिर्फ लावारिस गोवंश को नया जीवन दिया, बल्कि गांव को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस पर निर्भरता से मुक्त कर दिया है। अब गोशाला से बिजली तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है।


 

इब्राहिमपुर मसाई ग्राम पंचायत के हलजौरा गांव के प्रधान स्वामी घनश्याम ने बताया कि दो साल पहले ऊर्जा संकट होने पर मन में गोबर गैस संयंत्र बनाने का विचार आया। गोशाला बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन स्वजल हरिद्वार के अधिकारियों से संपर्क किया और एक विस्तृत परियोजना बनाकर सौंपी, जिसे अधिकारियों ने पसंद किया। वर्ष 2023 में स्वजल निधि से ग्राम पंचायत को 20 लाख रुपये की धनराशि मिली।

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प्रत्येक परिवार 300 रुपये महीना ग्राम पंचायत को जमा कर रहा

उन्होंने बताया कि इससे करीब एक बीघा भूमि में गड्ढा बनाया गया, जिसे भीतर से पक्का किया गया। इसके बाद लोहे का एयर टाइट डाइजेस्टर चैंबर बनाया। जैसे-जैसे इसमें गैस की मात्रा बढ़ती है, यह चैंबर ऊपर उठता जाता है। यहां से गैस खोल दी जाती है, जो पाइप के जरिए गांव के 40 घरों तक पहुंचती है। संयंत्र के रखरखाव और विस्तार के लिए प्रत्येक परिवार 300 रुपये महीना ग्राम पंचायत को जमा कर रहे हैं।


 

ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम ने बताया कि अब गोशाला के जरिए गांव के लिए खुद की बिजली बनाने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। इसका प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है, जिसके तहत गोशाला में बैल और बछड़े बिजली बनाने वाली टरबाइन को घुमाएंगे। इससे गांव के लिए बिजली तैयार होगी। यह कदम गांव को ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा। 

 



 

सिर्फ एक गाय देती है दूध, फिर भी आत्मनिर्भर है गोशाला

यह गोशाला देश भर के लिए नजीर है। इसमें 51 गोवंश हैं, जिनमें 40 बछड़े और बैल शामिल हैं। बाकी 11 गायों में से महज एक गाय दूध देती है। फिर भी गोबर गैस संयंत्र जैसे कदम से आत्मनिर्भर बन गई है। साथ ही गोवंश सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गोशाला नहीं बनाने पर गोबर बाहर से लाना पड़ता, जिसमें किराया और डीजल खर्च होता। इस पहल से गोसेवा भी हो रही है और पशुओं के चारे का खर्च भी शून्य है। सभी पशु जंगल में चरते हैं और शाम को आश्रय स्थल में आराम करते हैं।
 

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गैस प्लांट में बनने वाली खाद हाथों-हाथ बिक रही

गोबर से बनी खाद इतनी बढ़िया होती है कि किसान उसे हाथों-हाथ खरीदकर ले जाते हैं। अब केंचुओं से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने पर भी काम चल रहा है।

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