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Uttarakhand: अनोखी विवाह परंपरा, यहां दुल्हन लेकर आती है बरात, एक परिवार की छह शादियां बनेंगी मिसाल

मुकेश जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, चकराता Published by: Renu Saklani Updated Wed, 22 Apr 2026 02:04 PM IST
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सार

उत्तराखंड की एक ऐसी जगह जहां विवाह की अनोखी परंपरा है। 29 अप्रैल को एक परिवार की छह शादियां मिसाल बनेंगी। जिसकी खूब चर्चा हो रही है। आइए आपको बताते हैं क्या है यहां खास...

Unique Wedding Bride Arrives with Wedding Procession Six Weddings in a Single Family Jaunsar Bawar Uttarakhand
शादी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आमताैर पर जहां दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर पहुंचता है, वहीं जाैनसार बावर में पुरानी परंपरा आज भी अलग पहचान बनाए हुए है। यहां दुल्हन खुद बरात लेकर दूल्हे के घर जाती है। इस अनोखी परंपरा (जोजोड़े) के साथ एक ही परिवार में पहली बार छह शादियां संपन्न होंगी। 29 अप्रैल को चकराता ब्लाॅक के खारसी गांव में होने वाले इस समारोह को लेकर न सिर्फ परिजनों में बल्कि क्षेत्रवासियों में भी उत्साह है।

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जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक रहन-सहन के लिए प्रसिद्ध है। यहां तीज-त्योहारों को मनाने का अंदाज भी खास होता है जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है। इसके तहत एक ही परिवार में बड़े स्तर पर सामूहिक विवाह का आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे एक ऐतिहासिक पहल भी माना जा रहा है।

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खारसी गांव निवासी दौलत सिंह चौहान के परिवार में आयोजित इस समारोह में उनके पांच पुत्र नरेंद्र, प्रीतम, राहुल, अमित, प्रदीप और पुत्री राधिका का विवाह एक साथ होगा। संयुक्त परिवार में जहां दादा, पिता और बेटे की संतानें एक ही छत के नीचे रहती हैं और एक ही चूल्हे पर भोजन बनता है, वहीं इस तरह के आयोजन से पारिवारिक एकता भी झलकती है।

धरोहर को संजोने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम

उनका कहना है जहां एकल विवाह में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं वहीं सामूहिक आयोजन से खर्च में काफी कमी आती है और सभी रस्में एक साथ संपन्न हो जाती हैं। उन्होंने जौनसार बावर की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया। स्थानीय लोग भी इस आयोजन को क्षेत्रीय गौरव का प्रतीक मान रहे हैं। आधुनिक दौर में जहां संयुक्त परिवार की परंपरा धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है, वहीं इस तरह के आयोजन यह साबित करते हैं कि सामाजिक एकता, परंपरा और सहयोग की भावना आज भी जीवित है।
 

दुल्हन का सम्मान, संस्कृति की बड़ी पहचान

परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान ने बताया कि सभी पांच पुत्रों और एक पुत्री का विवाह जौनसारी परंपरा जोजोड़े के तहत होगा। इस परंपरा में लड़का बरात लेकर दुल्हन के घर नहीं जाता, बल्कि दुल्हन ही बरात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है, जो इस क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।

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सामाजिक सहमति से सादगी पर जोर

बीते वर्ष गांव में स्याणा शूरवीर सिंह पंवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सामाजिक कार्यक्रमों में सादगी अपनाने पर सहमति बनी थी। इसके तहत महिलाओं के आभूषण पहनने की सीमा भी तय की गई। कान की झुमकी, नाक की फूली, हाथ में अंगूठी और गले में मंगलसूत्र तक ही सीमित रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही महंगे आभूषणों और अंग्रेजी शराब व बियर पर भी प्रतिबंध लगाया गया।

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