एक्सक्लूसिव: पलायन की मार, उत्तराखंड के इस गांव में रह गए हैं अब केवल पांच परिवार
- महज तीन किमी सड़क नहीं बनने से नगरीय क्षेत्रों में जा रहे हैं ग्रामीण
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उत्तराखंड में टिहरी जिला मुख्यालय की सीमा से लगा हुआ केमसारी गांव पलायन का दंश झेल रहा है। 1990 के दौर में बसाए गए नई टिहरी नगर की टीनशेड कालोनी से महज आधा किमी दूर यह राजस्व गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है, जिससे गांव में अब बस पांच परिवार ही रह गए हैं। अधिकतर लोग गांव छोड़कर नगरीय क्षेत्रों में बस गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केमसारी से पैन्यूला तक तीन किमी बाईपास सड़क बनती है, तो सीमित क्षेत्र में बसे नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण के लिए पर्याप्त जगह मिल सकती है।
सारज्यूला पट्टी का केमसारी गांव नगरपालिका क्षेत्र की सीमा से लगा हुआ है। जिला मुख्यालय की स्थापना से ही गांव के लोग सड़क की आस लगाए हुए हैं, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी ग्राम पंचायत पैन्यूला का राजस्व गांव केमसारी सड़क से नहीं जुड़ पाया है। जिससे गांव में इन 30 सालों में विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लग पाई है।
वर्षों बाद भी जब नगर क्षेत्र की सीमा से महज आधा किमी दूर बसा यह गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया, तो एक दशक पहले से लोगों ने गांव छोड़ना शुरू कर दिया। जिससे 20 परिवारों के इस गांव में अब सिमट कर पांच परिवार ही रह गए हैं।
सड़क न होने से कर रहे पलायन
गांव के गुरु प्रसाद बेलवाल कहते हैं कि सड़क के लिए कई बार प्रस्ताव दिए गए। क्षेत्र और जिला पंचायत से भी सड़क बनाने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। टीनशेड कालोनी से केमसारी गांव होते हुए पैन्यूला तक तीन किमी बाईपास सड़क बनती है, तो नगर क्षेत्र के विस्तारीकरण के लिए भी काफी जगह मिल जाती। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिए जाने के कारण गांव से अधिकतर लोगों ने पलायन कर दिया है।
जिला मुख्यालय की सीमा से सटे केमसारी गांव को सड़क से जोड़ने के लिए जल्द ही गांव में बैठक की जाएगी। उसके बाद टीनशेड कालोनी से केमसारी होते हुए पैन्यूला तक सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार कर विधायक के माध्यम से लोनिवि को भेजा जाएगा।
- मुन्नी देवी चौहान, प्रधान ग्राम पंचायत पैन्यूला।
केमसारी गांव के लिए सड़क का प्रस्ताव मुझे नहीं मिला है। ग्रामीण सांसद या विधायक के माध्यम से प्रस्ताव देते हैं, तो उनका प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।
- केएस नेगी, ईई लोनिवि प्रांतीय खंड बौराड़ी।