उत्तराखंड: चार बड़े जिलों में पहली बार शत प्रतिशत मदिरा दुकानों का हुआ व्यवस्थापन, हर साल रह जाती थी खाली
उत्तराखंड में चार बड़े जिलों में पहली बार शत प्रतिशत मदिरा दुकानों का व्यवस्थापन हुआ है। मदिरा दुकानों से इस वर्ष का 2604 करोड़ रुपये राजस्व लक्ष्य रखा गया है। हर वर्ष नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में दुकानें खाली रह जाती थीं।
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प्रदेश में पहली बार चार बड़े जिलों में शत प्रतिशत मदिरा दुकानों के व्यवस्थापन में आबकारी विभाग ने कामयाबी हासिल की है। ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल के साथ-साथ इस बार तीन पहाड़ी जिलों में भी शत प्रतिशत दुकानों के लिए बोलियां लग चुकी हैं। इनमें चंपावत, टिहरी और चमोली शामिल हैं। बाकी जिलों में आबकारी विभाग ने दोबारा विज्ञप्ति जारी की है।
गौरतलब है कि बीते 10 वर्षों से चारों बड़े जनपदों में हर साल दुकानें खाली रह जाती थीं। इनमें कहीं दुकानों को दूसरी जगह पहुंचाने का मसला रहता था तो किसी के साथ कोई और समस्या रह जाती थी। इस बार पहले से ही आबकारी विभाग ने इसके लिए होमवर्क पूरा कर लिया था। आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि सभी जिलों में पहले से ही तैयारियां की जा रही थीं।
हर प्रकार की समस्या का समय से समाधान किया गया था। इसी का परिणाम है कि दुकानों का सात जिलों में शत प्रतिशत व्यवस्थापन हो चुका है। विभाग ने दुकानों से प्राप्त होने वाले लक्ष्य का भी निर्धारण किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह लक्ष्य 2604 करोड़ रुपये रखा गया है। जबकि, अगले वित्तीय वर्ष के लिए यह लक्ष्य 2693 करोड़ रुपये है। मौजूदा वित्तीय वर्ष का कुल राजस्व लक्ष्य 5400 करोड़ रुपये है।
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इनमें से 2604 करोड़ रुपये सिर्फ दुकानों से प्राप्त होने वाला लक्ष्य है। आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि हर वर्ष संचालन में अनियमितताएं देखने को मिलती थीं लेकिन अब सुव्यवस्थित व्यवस्था लागू की गई है। इससे राजस्व लक्ष्य में बढ़ोतरी भी देखने को मिलेगी।