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विडंबना: उत्तराखंड के 275 सरकारी स्कूलों में बिजली नहीं, भीषण गर्मी में बच्चों के बीमार होने का बना है खतरा

बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Thu, 30 Apr 2026 05:00 AM IST
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सार

तेज गर्मी और उमस के कारण बच्चे कक्षाओं में असहज महसूस कर रहे हैं। कई जगहों पर हालात ऐसे हैं कि बच्चों के लिए कक्षा में बैठना तक मुश्किल हो रहा है। इससे लू लगने और बीमार होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे अभिभावक और बच्चे दोनों चिंतित हैं।

Uttarakhand News 275 Government Schools in Lack Electricity Risk of Children Falling Ill Amidst Scorching Hea
बिजली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। राज्य के 275 सरकारी स्कूल आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं, तेज गर्मी में इसका सीधा असर बच्चों की सेहत और पढ़ाई दोनों पर पड़ रहा है।

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तेज गर्मी और उमस के कारण बच्चे कक्षाओं में असहज महसूस कर रहे हैं। कई जगहों पर हालात ऐसे हैं कि बच्चों के लिए कक्षा में बैठना तक मुश्किल हो रहा है। इससे लू लगने और बीमार होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे अभिभावक और बच्चे दोनों चिंतित हैं। इसमें सबसे अधिक प्रभावित पौड़ी जिला है, जहां 66 स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है।
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वहीं, अल्मोड़ा में 58, बागेश्वर में 14, चमोली में नौ, देहरादून में छह, नैनीताल में 54, पिथौरागढ़ में 43, टिहरी गढ़वाल में 17 और उत्तरकाशी जिले के आठ प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में बिजली नहीं है। यह आंकड़ा बताता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

शिक्षकों का कहना है कि बिजली न होने से तेज गर्मी न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डालती है, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता और एकाग्रता को भी प्रभावित करती है। ऐसे माहौल में पढ़ाई करना बच्चों के लिए बेहद कठिन हो जाता है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा बताते हैं कि पहाड़ के कई स्कूलों में पंखे तो दूर बिजली की लाइन तक नहीं है। वहीं, इस साल स्कूलों के रखरखाव के लिए भी विभाग की ओर से पैसा नहीं मिला।

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पेयजल के लिए भी तरस रहे बच्चे
प्रदेश के कई सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में गर्मी में पीने के पानी की भी समस्या बनी है। शिक्षा विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 191 स्कूल पेयजल विहीन हैं। इसमें सबसे अधिक 89 स्कूल पिथौरागढ़ जिले के हैं। जबकि अल्मोड़ा के 15, चंपावत के 13, देहरादून के सात, नैनीताल के 43, पौड़ी के 15, रुद्रप्रयाग के दो, टिहरी का एक और उत्तरकाशी के छह स्कूल पेयजल विहीन हैं।

जिन स्कूलों में बिजली नहीं है, उनमें से कई ऐसे हैं जिनका बिजली का बिल समय पर जमा नहीं हुआ। इसके अलावा कुछ जगह बिजली के खंभे ही नहीं हैं। सभी स्कूलों में बिजली की सुविधा के लिए स्कूलों से प्रस्ताव मांगा जाएगा। रही स्कूलों के रखरखाव के लिए पैसा न मिलने की बात तो बता दें कि विभाग को यह धनराशि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के अंतिम दिन मिली, जिसे प्रक्रिया में नहीं लाया जा सका।
- कंचन देवराड़ी, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा

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