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पिथौरागढ़: नौकरी छोड़ सेब उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे मनोज, 25 पौधे लगाकर शुरू किया था काम
Wed, 07 Jul 2021 02:16 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
दीपक कापड़ी, अमर उजाला, पिथौरागढ़
दीपक कापड़ी, अमर उजाला, पिथौरागढ़
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 07 Jul 2021 02:16 PM IST
सार
मनोज ने वर्ष 2015-16 में सिंतोली के धूरा तोक में सेब के 25 पौधे लगाकर सेब का उत्पादन शुरू किया।
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दादा से प्रेरणा लेकर सेब का बगीचा तैयार किया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एक तरफ पहाड़ के गांव पलायन से खाली होते जा रहे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहरों से अच्छी नौकरी छोड़ गांव में सेब, सब्जी का उत्पादन कर सिंतोली धूरा तोक के मनोज खड़ायत ने मिसाल कायम की है। मनोज बिना किसी सरकारी सहायता के सेब और सब्जी का उत्पादन कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने अपने दादा से प्रेरणा लेकर सेब का बगीचा तैयार किया है।
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मनोज ने वर्ष 2015-16 में सिंतोली के धूरा तोक में सेब के 25 पौधे लगाकर सेब का उत्पादन शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने गाला, स्टारलेट, सुपरचीफ, रेड स्पट, रेड बिलौक्स, रूट स्टाक एम-19, एम-111 के सेब के पौधे लगाए। उनकी मेहनत दूसरे साल ही रंग लाने लगी। उनके सेब के पौधों में फल आने लगे। इसके बाद उन्होंने सेब के पौधों की संख्या बढ़ा दी और अब उन्होंने गांव में ही सुंदर बगीचा तैयार किया है। मनोज का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1995-96 में एमए इतिहास से किया।
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इसके बाद उन्होंने हल्द्वानी सहित कई शहरों में 10 साल तक प्रिंटिंग प्रेस का काम किया। इसी दौरान उन्होंने कंप्यूटर कोर्स भी पूरा कर लिया। उन्होंने बताया कि उनके मन हमेशा कहता था कि प्राइवेट नौकरी से बजाए खुद का काम शुरू किया जाए। इसके बाद वह गांव सिंलोती धूरा वापस लौट आए। गांव आकर देखा तो उनके दादा की ओर से तैयार सेब, खुबानी, अखरोट का बाग पूरी तरह बर्बाद हो गया था। किसी काम से हिमाचल जाना हुआ तो देखा कि वहां सेब का अच्छा उत्पादन होता है।
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उन्होंने किसानों से सेब उत्पादन की जानकारी ली। इसके बाद इंडोडच हार्टीकल्चर लिमिटेड चार्सी भीमताल से 25 पौधे सेब के लाकर उन्होंने बगीचे में लगाए। 2016 में उन्होंने फिर सेब के 600 पौधे लगाए। अब वह सेब का उत्पादन कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी ओर से उत्पादित गाला, गाला मीमा डार्क बैरन गाला, सैनिगो रेड गाला 180 रुपये और डेलिसिस 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। मनोज का कहना है कि उनके दादा सेब का उत्पादन करते थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने सेब और सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। (संवाद)
युवाओं को ऑनलाइन सेब उत्पादन के गुर भी सिखा रहे
मनोज खड़ायत आधुनिक तरीके से सेब और सब्जियों के पौधों की सिंचाई करते हैं। वह सिंचाई के लिए वर्षा जल संरक्षण, ड्रिप, मल्चिंग विधि का इस्तेमाल करते हैं। इससे कम पानी में अच्छी सिंचाई होती है और पानी की बर्बादी नहीं होती है। मनोज फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिये सीमांत जिले के युवाओं के साथ-साथ जम्मू कश्मीर, हिमाचल और विदेशी युवाओं को सेब उत्पादन के गुर भी सिखा रहे हैं।
उन्होंने इसके लिए फेसबुक पर खड़ायत फार्मा पेज और व्हाट्सएप पर ऑर्गेनिक एप्पल ग्रोवर ग्रुप बनाया है। जिसमें मुनस्यारी, डीडीहाट, कनालीछीना, मूनाकोट, कनारीपाभैं आदि क्षेत्र के युवा जुड़े हैं। धूरा के लिए सड़क न होने से सेब, सब्जियों के ट्रांसपोर्ट में मनोज खड़ायत को दिक्कत हो रही है। उन्हें अपने उत्पादों को एक किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है। उन्होंने शीघ्र सड़क निर्माण की मांग की है।
सरकार और शासन प्रशासन ने नहीं मिला प्रोत्साहन
मनोज का कहना है कि वह पिथौरागढ़ जिले को एप्पल इंड्रस्ट्री के रूप में विकसित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि सरकार की एप्पल मिशन योजना पहाड़ के किसानों के लिए नहीं है। उसमें किसान के पास एक एकड़ भूमि होना आवश्यक है। पहाड़ के किसानों के पास इतनी भूमि नहीं होती है। इसलिए सरकार को योजना के मानक बदलने चाहिए, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके। साथ ही पहाड़ के किसानों के लिए छोटी योजनाएं बनाने की मांग की है, जिससे उन्हें प्रोत्साहन मिल सके।