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Uttarakhand: राज्य में 91 सड़कें बंद, सबसे अधिक पिथौरागढ़ जिले में 16 मार्ग बंद,  ऊखीमठ-चोपता सड़क धंसी

Sat, 01 Aug 2026 04:41 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून/ रुद्रप्रयाग
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून/ रुद्रप्रयाग Published by: Renu Saklani Updated Sat, 01 Aug 2026 04:41 PM IST
सार

राज्य में सबसे अधिक पिथौरागढ़ जिले में 16 मार्ग बंद हैं। वहीं बारिश से ऊखीमठ-चोपता सड़क धंस गई। यहां ताला में 25 मीटर हिस्से पर खतरा बढ गया है। इधर, यमुनोत्री हाईवे पर भूस्खलन के कारण बार-बार बंद होने से स्याना चट्टी सहित कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जान जोखिम में डालकर पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।
 

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Uttarakhand roads closed 91 highest number of closures 1 in Pithoragarh Ukhimath-Chopta road caved
सड़कें बंद (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तराखंड में 91 मार्ग बंद है। सबसे अधिक पिथौरागढ़ जिले में 16 मार्ग बंद है। इसके अलावा चमोली और टिहरी में 15-15 मार्ग बंद है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के जारी बुलेटिन के अनुसार अल्मोड़ा चार, बागेश्वर सात, देहरादून आठ और नैनीताल में चार मार्ग बंद। रुद्रप्रयाग 11 और उत्तरकाशी में छह मार्ग पर आवाजाही ठप है।

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इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बारिश के चलते नदियों का जल स्तर भी बढ़ रहा है। रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। इसी तरह चमोली जिले में पिंडर और नंदाकिनी नदी, पिथौरागढ़ जिले में काली, गोरी नदी का जल स्तर भी खतरे के निशान के पास पहुंच गया। शारदा बैराज में जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया।
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बारिश से धंसी ऊखीमठ-चोपता सड़क, ताला में 25 मीटर हिस्से पर बढ़ा खतरा
ऊखीमठ-चोपता मोटर मार्ग (एनएच-107ए) पर ताला के पास सड़क का हिस्सा धंस गया है। संयुक्त तकनीकी निरीक्षण में सामने आया है कि अत्यधिक वर्षा के कारण जल निकासी बाधित होने और पाइप कल्वर्ट के क्षतिग्रस्त होने से करीब 20 से 25 मीटर हिस्से में स्थानीय धंसाव हुआ है।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड रुद्रप्रयाग और निर्माण खंड उखीमठ के अधिशासी अभियंताओं ने शनिवार को संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण कर ओंकार पांडे अधिशासी अभियंता एनएच खंड ने बताया कि पहाड़ी की ओर बनी गैबियन संरचनाएं सुरक्षित हैं, जबकि घाटी की ओर बनी गैबियन दीवार में 0.50 से एक मीटर तक स्थानीय धंसाव हुआ है।


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अत्यधिक बारिश के कारण पाइप कल्वर्ट क्षतिग्रस्त होकर खिसक गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हुई और सड़क का हिस्सा धंस गया। उन्होंने बताया कि तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र पहले से ही भू धंसाव क्षेत्र के रूप में चिह्नित है और इसके स्थायी उपचार के लिए डीपीआर तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल क्षतिग्रस्त पाइप कल्वर्ट की मरम्मत, अतिरिक्त कल्वर्ट लगाने, घाटी की ओर गैबियन संरचना के पुनर्निर्माण, आरबीएम भराव तथा जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का कार्य तत्काल शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों को अगले एक-दो दिन में आगे बढ़ाया जाएगा, जबकि स्थायी समाधान डीपीआर के अनुसार कराया जाएगा।
 

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