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उत्तराखंड: मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर, गंगा का जलस्तर बढ़ा, ऋषिकेश में कई घाट डूबे

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 19 Jun 2021 08:51 PM IST
सार

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला में गंगा घाट, त्रिवेणी घाट, मायाकुण्ड, चंद्रेश्वर नगर में पानी भर गया है। 

मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर
मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तराखंड में मानसून शुरुआत से ही खौफनाक रूप दिखा रहा है। कई घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं। बरसाती नालों में भी पानी बढ़ गया है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। जिस कारण अलर्ट जारी किया गया है। गंगा, गोरी, शारदा, अलकनंदा, मंदाकिनी और नंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बदरीनाथ, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा हाईवे सहित कई मार्ग बंद हैं।



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पहाड़ों और मैदानी भागों में हो रही लगातार बारिश के कारण योगनगरी में गंगा का जलस्तर बढ़ गया। गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी। शनिवार शाम पांच तक गंगा का जलस्तर 340.50 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों ने बताया कि गंगा नदी वॉर्निंग लेवल 339.50 मीटर से डेंजर लेवल 340.50 के ऊपर नीचे बह रही थी। 

गंगा नदी में सिल्ट और लकड़ी की डाट बहकर आने से पशुलोक बैराज के सभी 15 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं चीला शक्ति नहर में पानी न जाने से उत्पादन ठप हो गया है। यूजेवीएनएल (उत्तराखंड जल विद्युत निगम) की ओर से हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम, त्रिवेणी और लक्ष्मण झूला के लगभग सभी गंगा घाट डूब गए हैं। मायाकुण्ड, चंद्रेश्वर नगर में पानी भर गया है। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम का कथा स्थल भी जलमग्न हो गया है। 

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तपोवन नगर और मुनिकीरेती में आश्रमों और होटलों को अलर्ट जारी किया गया है। टिहरी, पौड़ी और ऋषिकेश प्रशासन लगातार मुनादी करवा रहा है। रायवाला के गौहरी माफी, प्रतीतनगर व श्यामपुर के खदरी माफी में लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा जा रहा है।

देवप्रयाग में खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर बही अलकनंदा

भारी बारिश से अलकनंदा में आए उफान से यहां गंगा खतरे के निशान को पार कर गई। गंगा का जल स्तर तीन मीटर बढ़ने से तीर्थवासियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में गंगा का जल स्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली। खतरे को देखते हुए पुलिस ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की। 

शनिवार को अलकनंदा लगातार तीन घंटे तक 466 मीटर पर बहती रही। यहां खतरे का निशान 463 मीटर है। सुबह नौ बजे के बाद बारिश धीमी होने से अलकनंदा और गंगा के जल स्तर में कमी आई। रामकुंड, संगम स्थल, वशिष्ठ गुफा, सूर्य गुफा, फुलारी घाट, शांता घाट, वेताल शिला सहित नमामि गंगे घाट पानी में डूब गए हैं। श्मशान घाट भी पानी में डूबे हुए हैं। 

दूसरे दिन भी बंद रहा बदरीनाथ हाईवे
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दूसरे दिन भी यातायात के लिए नहीं खुल पाया। राजमार्ग कौड़ियाला से करीब एक किलोमीटर आगे बोल्डर आने के कारण अवरुद्ध है। वहीं, मुनिकीरेती से सिरोहबगड़ तक राजमार्ग पर जगह-जगह पत्थर गिर रहे हैं। इस के कारण ऋषिकेश से श्रीनगर के बीच चंबा-नरेंद्रनगर रूट से यातायात संचालित हो रहा है। 

वहीं कौड़ियाला, तोताघाटी, महादेव चट्टी, सौड़पानी, पंतगांव, मूल्यागांव, डुंगरीपंत, चमधार, कलियासौड़ समेत अन्य स्थानों पर राजमार्ग पर पत्थर गिर रहे हैं। पीडब्लूडी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता बलराम मिश्रा का कहना है कि कौड़ियाला में मलबा हटाने का काम चल रहा है। राजमार्ग पर गिरे पत्थरों को हटाने के लिए मशीनें काम कर रही हैं।

पुल के एक छोर पर सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त
भारी बारिश से श्रीनगर और कीर्तिनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। प्रशासन ने एहतियातन अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं अलकनंदा नदी के कटाव से श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस के नीचे स्थित पुल के एक छोर पर सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है।

मलारी हाईवे पर वैली ब्रिज की एप्रोच रोड टूटी
चमोली जनपद में बारिश से प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। ऋषि गंगा का जल स्तर बढ़ने से मलारी हाईवे पर रैणी गांव के समीप स्थापित वैली ब्रिज की एप्रोच रोड व आधार क्षतिग्रस्त हो गया है। निजमूला घाटी के ईराणी गांव के पैदल रास्ते में लकड़ी की अस्थाई पुलिया वीर गंगा के उफान में बह गई है। जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। 

धारी देवी मंदिर के दो मीटर नीचे तक पहुंचा पानी

श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील (अलकनंदा नदी) में खंभों के सहारे खड़े धारी देवी मंदिर के लगभग दो मीटर नीचे तक पानी पहुंच गया। शनिवार सुबह के बाद जलस्तर कम हो गया। 

केदारनाथ में उफान पर मंदाकिनी और सरस्वती नदी
केदारनाथ धाम में मंदाकिनी, सरस्वती और दुग्ध गंगा उफान पर है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से गरुड़चट्टी को जोड़ने वाले वैकल्पिक पुल से आवाजाही बंद कर दी गई है। लगातार हो रही बारिश से धाम में ठंड भी बढ़ गई है। साथ ही पुनर्निर्माण कार्यों पर भी व्यापक असर पड़ा है। 

अलकनंदा नदी में बहा बैली ब्रिज 
अलकनंदा नदी के बढ़ते जलस्तर से रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे के रैंतोली बाईपास पर निर्मित बैली ब्रिज क्षतिग्रस्त होकर बह गया है। पिछले 40 घंटे से अधिक समय से हो रही बारिश के कारण अलकनंदा व मंदाकिनी का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे निवास कर रहे 20 परिवारों को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है। 

लगातार हो रही बारिश के चलते तुंगनाथ घाटी के आपदा प्रभावित ग्राम पंचायत उषाड़ा, मक्कूमठ और दैड़ा के 63 परिवार तीन दिन से रतजगा कर रहे हैं। जबकि 22 परिवारों ने अपने घरों को छोड़कर अन्यत्र शरण ले ली है। नारायणबगड़ और बगोली के बीच कई स्थानों पर कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाईवे क्षतिग्रस्त होने से लंबी दूरी के यात्री फंसे रहे। प्रशासन व पुलिस द्वारा रात्रि में उन्हें नलगांव व नारायणबगड़ लाया गया और उनके ठहरने तथा खाने की व्यवस्था की। 

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 107 रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग मलबा आने के कारण अवरुद्ध चल रहा है। टिहरी जिले के सभी क्षेत्रों में रात भर से लगातार बारिश हो रही है। फिलहाल नुकसान की कोई सूचना नहीं है। ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर सामान्य रूप से वाहनों का आवागमन हो रहा है। अगस्त्यमुनि में मंदाकिनी का जलस्तर उफान पर है। वहीं लगातार बारिश से श्रीनगर में रात 2 बजे अलकनंदा खतरे के निशान को पार कर गई। 

शनिवार की सुबह अलकनंदा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे हो गया है। जल स्तर बढ़ने पर पुलिस रात में धारी मंदिर पहुंची। श्रीनगर में रात से विद्युत आपूर्ति ठप है। वहीं नदी में गाद आने से आज घरों में पानी नहीं आएगा। विकासखंड बीरोंखाल में बीते 36 घंटे से लगातार मूसलाधार बारिश जारी है। बारिश से पूर्वी न्याय नदी उफान पर है। स्थित खतरनाक बनी हुई है, यदि पंचपुरी मोटर पुल के पास पुस्ता उजड़ा तो बैजरो थैलीसैंण व जिला मुख्यालय का सम्पर्क रामनगर व कोटद्वार से कट जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बारिश से कोटद्वार में खोह नदी उफान पर है। नदी के तेज बहाव के कारण सिद्धबली के पास नदी किनारे एक हाथी फंस गया।

नदी के उफान से घाट-सलबगड़ सड़क 20 मीटर बही 

नंदाकिनी नदी के उफान पर आने से घाट-सलबगड़ सड़क का करीब 20 मीटर हिस्सा बह गया, जिससे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही ठप पड़ गई है। 

थराली में पिंडर नदी के कटाव से आवासीय मकान खतरे की जद में 
पिंडर नदी उफान पर है। नदी के कटाव से नदी किनारे रह रहे ग्रामीणों के भवन खतरे की जद में आ गए हैं। नदी का बहाव चेपडों और थराली बाजार के समीप पहुंचने आवासीय मकानों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। तहसील मुख्यालय के सामने बैनोली गांव की अनुसूचित बस्ती तक पिंडर नदी का सैलाब पहुंच गया है। नदी के किनारे बसे अखोड़सारी, सिमसारी, कल्याणी, जोला,चेपडों, सेरा, बैनोली, थराली, सिमलसैण, सुनला, अंगतोली, कुलसारी, सुनाऊं तल्ला सहित 20 से अधिक गांवों की कृषि भूमि नदी के कटाव में आ गई है। भूस्खलन के बाद पिंडर नदी के सैलाब से लिंगणी गांव के उनी बगड़ तोक में आलम राम का मकान बह गया। साथ ही वीरेंद्र राम के मकान के चौक को भी पिंडर नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। 

थराली क्षेत्र में 15 सड़कें बंद होने से लोग परेशान 
भारी बारिश से थराली क्षेत्र में 15 सड़कें अवरुद्ध हो गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्र तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट गए हैं। क्षेत्र के 16 से अधिक गांवों को जोड़ने वाला थराली-डुंगरी-घाट मोटर मार्ग सहित थराली-कुराड़-पार्था, नंदकेशरी-ग्वालदम, सेरा-विजयपुर-तलवाड़ी, नंदकेशरी जोला, सौगांव-जूनिधार-गोठिंडा, डुंगरी-रतगांव, डुंगरी-बूंगा-कोलपुड़़ी, ग्वालदम-खंपाधार-चिड़ंगा मल्ला, कुलसारी-रेई सड़कों पर आवाजाही बंद हो गई है। 

कुमाऊं में 7 हाईवे, 4 स्टेट हाईवे और 89 ग्रामीण सड़कें बंद
कुमाऊं में दो दिन से लगातार हो रही बारिश से जहां-तहां हाईवे और ग्रामीण सड़कें बंद हो गईं हैं। लोहाघाट-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से कैंटर चालक की मौत हो गई है। इस घटना एक अन्य व्यक्ति मामूली रूप से चोटिल हो गया। 

इधर, रामनगर में टेड़ा गांव के पास दिल्ली के पर्यटकों की इनोवा कार अनियंत्रित होकर पलट गई। गनीमत यह रही कि किसी को चोट नहीं आई। इनोवा कार में चार युवक सवार थे। शनिवार सुबह मानिला के कुणीधार निवासी बैंक कर्मचारी शंकर दत्त भट्ट भिकियासैंण स्थित यूको बैंक के लिए अपनी स्कूटी से निकले थे।

मानिला-भिकियासैंण मार्ग पर नैलवाल पाली गांव के निकट खल्टा गधेरे का पानी सड़क पर आ गया था। इसके तेज बहाव में वह स्कूटी समेत बह गए। वहां से गुजर रही टैक्सी जीप में बैठे युवाओं ने उफनाए गधेरे से बैंक कर्मी को निकाल लिया। जबकि स्कूटी बह गई। अल्मोड़ा में रानीखेत मार्ग पर भैरव मंदिर के पास उडियारी जा रही एक कार पर बड़ा पत्थर आ गिरा। कार में सवार लोगों को मामूली चोटें आईं हैं। 

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में छह नेशनल हाईवे, चार स्टेट हाईवे और 18 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। चंपावत में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग और 37 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। अल्मोड़ा-बागेश्वर में 34 से अधिक आंतरिक सड़कें बंद हो गई हैं। इनके अलावा भी तमाम सड़कों पर घंटों यातायात बाधित रहा। बागेश्वर में बदियाकोट सड़क के बंद होने से पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण समेत कई लोग तीन दिन से बदियाकोट में फंसे हैं। 

घंटों जाम रहा अल्मोड़ा-भवाली हाईवे

भवाली-अल्मोड़ा राजमार्ग पर पत्थर गिरने से घंटों जाम लगा रहा। भवाली सैनिटोरियम के पास भूस्खलन से बिजली के तीन बड़े टावर धराशायी हो गए हैं। रामनगर में कोसी नदी के उफानने से चुकुम गांव का संपर्क जिले से टूट गया है। धनगढ़ी व पनोद नाले भी उफान पर हैं। नालों के दोनों ओर बैरियर लगाकर यातायात रोका गया। 

नैनी झील के जलस्तर में एक फीट 10 इंच की बढ़ोतरी हुई है। शनिवार शाम तक झील का जलस्तर 4 फीट 6 इंच पहुंच गया है। गौला नदी का जलस्तर 51016 क्यूसेक जलस्तर रिकॉर्ड किया गया है। जून में पिछले 11 वर्षों में भारी बारिश से गौला का जलस्तर सर्वाधिक रिकॉर्ड किया गया। उधर, रामनगर में कोसी बैराज पर कोसी नदी का जलस्तर 33 हजार 148 क्यूसेक पहुंच गया। बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। 

ये हाईवे हैं बंद
पिथौरागढ़ जिले में बंद हुए नेशनल हाईवे में चीन सीमा को जोड़ने वाले तवाघाट-घटियाबगड़ हाईवे, तवाघाट-सोबला, घटियाबगड़-लिपुलेख, सोबला-दर-तिदांग और जौलजीबी-मुनस्यारी और पिथौरागढ़-टनकपुर शामिल हैं। 

ये स्टेट हाईवे बंद 
बंद हुए स्टेट हाईवे में थल-मुनस्यारी, कपकोट-शामा-तेजम, अल्मोड़ा-बेड़ीनाग-अस्कोट और थल-पिथौरागढ़ सड़क शामिल है। चौथे दिन शुक्रवार की शाम खुली पिथौरागढ़-घाट बारहमासी सड़क चार स्थानों पर बंद हो गई है। पिथौरागढ़-थल-बेड़ीनाग सड़क पर भी कई स्थानों पर मलबा आने से पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय का शेष जगत से संपर्क कटा हुआ है।

89 ग्रामीण सड़कें बंद
पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिले में करीब 78 ग्रामीण सड़कें मलबे से बंद हो गई हैं। पिथौरागढ़ जिले में 18 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। अल्मोड़ा-बागेश्वर में 34 से अधिक आंतरिक सड़कें बंद हो गई हैं। बदियाकोट की सड़क तीन दिन बाद भी नहीं खुल सकी। चंपावत में 37 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। इस कारण 103 गांवों की आवाजाही पर असर पड़ा है।
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