पिलंग गांव: सड़क अधूरी, पुल अधूरा और अब रास्ता भी टूटा; लोग बोल्डरों और मलबे के बीच कर रहे आवाजाही
पिलंग गांव के लोग आज भी गांव तक पहुंचने के लिए करीब आठ से नौ किमी की पैदल दूरी तय करते हैं। पिछले छह वर्षों में उनके गांव को जोड़ने के लिए सड़क और पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
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भटवाड़ी विकासखंड के सबसे दूरस्थ पिलंग गांव को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर भारी भूस्खलन होने से ग्रामीणों का संपर्क कट गया है। भूस्खलन से पैदल मार्ग सहित निर्माणाधीन सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि छह वर्षों से गांव को जोड़ने के लिए सड़क और पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में अब ग्रामीण बड़े-बड़े बोल्डरों व मलबे के बीच जान जोखिम में पत्थर और घास पकड़ कर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
पिलंग गांव के लोग आज भी गांव तक पहुंचने के लिए करीब आठ से नौ किमी की पैदल दूरी तय करते हैं। पिछले छह वर्षों में उनके गांव को जोड़ने के लिए सड़क और पुल का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। स्थानीय निवासी रविंद्र रावत, उत्तम सिंह, हिमानी, विजमा देवी, सावित्री, अत्तरा देवी, अनिता, धर्मा देवी, विनीता और प्रकाशी का कहना है कि उनको सड़क से जोड़ने के लिए एक मात्र पैदल मार्ग पर भारी भूस्खलन होने के कारण वह गांव में कैद हो गए हैं।
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पैदल मार्ग के निर्माण के नाम पर भी विकासखंड कार्यालय की ओर से करीब पांच लाख की धनराशि खर्च की गई थी। अब स्थिति यह है कि लोगों को बैंक, तहसील और बाजार के काम से आने के लिए जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि भूस्खलन वाले क्षेत्र में मलबा और बोल्डरों के दौरान अगर नियंत्रण खो दिया तो करीब दो सौ मीटर गहरी खाई में गिरने का भय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि वह वर्षों से इस परेशानी का झेल रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव में कोई बीमार और गर्भवती को अस्पताल पहुंचाना हो तो उसके लिए कहीं पर पैदल मार्ग भी नहीं बचा हुआ है। साथ ही मलबा और बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ है। बीते रविवार को वहां पर भूस्खलन होने से एक युवक बाल-बाल बचा। कहा कि अब बरसात के बाद उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।