दिल्ली में बाल तस्करी: एक और अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, चार बच्चों को बचाया; 10 आरोपी भी गिरफ्तार
मध्य जिला पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद भी किया है।
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नवजात बच्चों की खरीद फरोख्त के एक और अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और अस्पताल संचालक से लेकर असली माता-पिता तक शामिल हैं। मध्य जिला पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद भी किया है।
इससे पहले, पुलिस ने 5 जून को एक और अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा कर नवजात समेत 5 बच्चों को मुक्त कराया था। गिरोह की पड़ताल के दौरान दूसरे गिरोह का पता चला। अब तक नौ बच्चों को इससे मुक्त कराया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में गुजरात के साबरकांठा निवासी जैविक माता-पिता, सहयोगी शंकर गमार, रोहिणी की गरिमा जैन, उसके ससुर सतीश जैन, ऋषिकेश की केतकी गुप्ता, हरिद्वार निवासी दंपती आभा सिंह व अमित प्रताप सिंह और सेवानिवृत्त शिक्षक रामप्रकाश निषाद शामिल हैं। मुक्त कराए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश कर संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स सेल ने पांच जून को पहाड़गंज में नकली ग्राहक बनकर जाल बिछाया था। इसी ग्राहक को दो महिलाओं और ललित नाम के एक अन्य आरोपी ने चार-पांच दिन के नवजात को बेचने का प्रयास किया था। पुलिस ने बच्चे को छुड़ाकर टोकन मनी के 20 हजार रुपये बरामद किए थे। जांच के दौरान गुजरात और दिल्ली में जैविक माता-पिता की पहचान की गई।
16 दिन से 8 माह तक के बच्चे बरामद
- दिल्ली : रोहिणी से 16 दिन का नवजात
- उत्तराखंड : ऋषिकेश से एक माह का लड़का और हरिद्वार से आठ माह का लड़का
- यूपी : मथुरा से 13 माह का लड़का
बैंक खातों में लाखों का लेन-देन
पुलिस को बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कई लाख रुपये के बैंक लेन-देन का भी पता चला है। पुलिस बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के जरिए पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
एक राज्य से दूसरे राज्य में बेच रहे थे नवजात
- गिरोह विभिन्न राज्यों से नवजात बच्चों को लेकर उन्हें उन दंपतियों को ऊंची कीमत पर बेचता था, जिनकी संतान नहीं थी या जो बेटे की चाहत रखते थे
- आरोपी जैविक माता-पिता से संपर्क कर बच्चे की डिलीवरी तक की पूरी व्यवस्था करते थे। फिर जरूरतमंद दंपती को लाखों रुपये में बच्चा बेच देेते
- जांच में सामने आया कि एक जैविक मां से बच्ची लेकर उसे कोई भुगतान नहीं किया। इसके अलावा, गुजरात के दंपती से एक नवजात बच्चे को खरीदा गया। बाद में उसे हरियाणा के एक दंपती को कई गुना अधिक कीमत पर बेच दिया गया
संतान की चाह में गंदा खेल...गिरफ्तार आरोपियों की अलग-अलग भूमिका
- गुरुग्राम की महिला : बच्चों की खरीद-फरोख्त में बिचौलिया
- गुजरात का शंकर गमार : जैविक माता-पिता से बच्चों की व्यवस्था कराने का काम करता था
- साबरकांठा के कांतिभाई गमार और उनकी पत्नी : अपना नवजात बच्चा बेचा
- गरिमा जैन : हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से बच्चा लिया। उसके ससुर सतीश जैन ने महिला डॉक्टर को आठ लाख दिए
- केतकी गुप्ता (ऋषिकेश) : चार लाख में बच्चा खरीदा
- सेवानिवृत्त शिक्षक राम प्रकाश निषाद : 2025 में एक लड़का खरीदा
- अमित प्रताप व आभा सिंह (हरिद्वार) : बेटे की चाहत में करीब पांच लाख देकर बच्चा खरीदा