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कॉलेज एनुअल डे सिर्फ जश्न नहीं, आगे की दिशा तय करने का मौका : तरनजीत सिंह संधू
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एलजी ने कहा-पढ़ाई का मतलब सिर्फ ज्ञान नहीं, उसे सही तरीके से जीवन में लागू करना जरूरी
माता सुंदरी कॉलेज के एनुअल डे कार्यक्रम में पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने माता सुंदरी कॉलेज के एनुअल डे पर कहा कि ये दिन केवल उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अहम मौका भी होता है। ये दिन संस्थान की उपलब्धियों, आत्ममंथन और आगे की योजना का एक अहम पड़ाव होता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वुमेन के वार्षिक समारोह में उपराज्यपाल ने कहा कि छात्रों के लिए ये सिर्फ अकादमिक प्रगति का संकेत नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और दुनिया से जुड़ने की क्षमता का भी प्रतीक है। 1967 में शुरू हुआ ये संस्थान आज हजारों छात्रों का एक मजबूत शैक्षणिक केंद्र बन चुका है, जहां पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाता है। उन्होंने माता सुंदरी की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जीवन नेतृत्व, धैर्य और जिम्मेदारी की मिसाल है। खासकर महिला शिक्षा के संदर्भ में ये विरासत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सत्य सबसे बड़ा गुण : एलजी ने कॉलेज के आदर्श वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य सबसे बड़ा गुण है, लेकिन सच्चे जीवन का आचरण उससे भी बड़ा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जानकारी आसानी से मिल जाती है, लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं। महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब वूमन डेवलपमेंट से आगे बढ़कर वूमन-लेड डेवलपमेंट की ओर बढ़ रहा है। इसमें शिक्षा की भूमिका सबसे अहम है, जो न सिर्फ व्यक्तिगत विकास बल्कि समाज और संस्थाओं को भी मजबूत बनाती है।
नई चुनौतियों को अपनाएं और मूल्यों से जुड़ें : उन्होंने छात्रों से कहा कि वे सीखने की प्रक्रिया को कभी न रोकें, नई चुनौतियों को अपनाएं और अपने मूल्यों से जुड़े रहें। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया।
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माता सुंदरी कॉलेज के एनुअल डे कार्यक्रम में पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने माता सुंदरी कॉलेज के एनुअल डे पर कहा कि ये दिन केवल उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अहम मौका भी होता है। ये दिन संस्थान की उपलब्धियों, आत्ममंथन और आगे की योजना का एक अहम पड़ाव होता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वुमेन के वार्षिक समारोह में उपराज्यपाल ने कहा कि छात्रों के लिए ये सिर्फ अकादमिक प्रगति का संकेत नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और दुनिया से जुड़ने की क्षमता का भी प्रतीक है। 1967 में शुरू हुआ ये संस्थान आज हजारों छात्रों का एक मजबूत शैक्षणिक केंद्र बन चुका है, जहां पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाता है। उन्होंने माता सुंदरी की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जीवन नेतृत्व, धैर्य और जिम्मेदारी की मिसाल है। खासकर महिला शिक्षा के संदर्भ में ये विरासत और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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सत्य सबसे बड़ा गुण : एलजी ने कॉलेज के आदर्श वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य सबसे बड़ा गुण है, लेकिन सच्चे जीवन का आचरण उससे भी बड़ा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जानकारी आसानी से मिल जाती है, लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं। महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब वूमन डेवलपमेंट से आगे बढ़कर वूमन-लेड डेवलपमेंट की ओर बढ़ रहा है। इसमें शिक्षा की भूमिका सबसे अहम है, जो न सिर्फ व्यक्तिगत विकास बल्कि समाज और संस्थाओं को भी मजबूत बनाती है।
नई चुनौतियों को अपनाएं और मूल्यों से जुड़ें : उन्होंने छात्रों से कहा कि वे सीखने की प्रक्रिया को कभी न रोकें, नई चुनौतियों को अपनाएं और अपने मूल्यों से जुड़े रहें। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया।
