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Indirapuram Fire: गौड़ ग्रीन सोसाइटी की आग में जली इमारत के सरिये पिघले, पिलर में दरार; विशेषज्ञ करेंगे जांच
राजू मलिक, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 01 May 2026 07:13 AM IST
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सार
करीब चार घंटे तक उच्च तापमान झेलने के कारण इसके मुख्य पिलर में तीन फीट लंबी दरार पड़ गई है। सरिये भी कमजोर हो गए हैं। इससे कंक्रीट की पकड़ ढीली पड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में इमारत की भार वहन क्षमता घट जाती है। मामूली भूकंप में भी ढहने का खतरा रहता है।
इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी के फ्लैटों में लगी भीषण आग। file
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदिरापुरम स्थित गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में भीषण आग से प्रभावित टावर डी की इमारत को भारी क्षति पहुंची है। करीब चार घंटे तक उच्च तापमान झेलने के कारण इसके मुख्य पिलर में तीन फीट लंबी दरार पड़ गई है। सरिये भी कमजोर हो गए हैं। इससे कंक्रीट की पकड़ ढीली पड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में इमारत की भार वहन क्षमता घट जाती है। मामूली भूकंप में भी ढहने का खतरा रहता है।
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इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने विशेषज्ञों से इमारत की जांच कराने का फैसला लिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय किया जाएगा कि यहां लोगों को रहने की अनुमति दी जाए या नहीं। आरडब्ल्यूए ने भी सुरक्षा और ढांचे को मजबूत बनाने के लिए टावर का स्ट्रक्चर ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
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सोसाइटी में बुधवार को भड़की आग के दौरान टावर डी के आठ फ्लैट प्रभावित हुए। इनमें से सात पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। यहां रखे फर्नीचर, पीवीसी वर्क व घरेलू सामान ने आग को और भड़काया।
करीब 12 एसी और एक दर्जन से ज्यादा फ्रिज में ब्लास्ट हुए। स्टील के पंखे पिघलकर लटक गए।
घटना की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दीवारों पर लगीं स्टील की एंगल आग की चपेट में आने से प्लास्टिक की भांति पिघल गईं और उनकी धातु बूंद-बूंद कर जमीन पर आ गिरी। प्लास्टर गिरने से छत और दीवारें भी कमजोर हो गई हैं।
अग्निशमन विभाग के पूर्व सीएफओ के मुताबिक, लंबे समय तक आग का ताप झेलने से पिलर और दीवारों में दरार स्वाभाविक है। उच्च तापमान में लोहे के सरिये पिघलकर नरम पड़ जाते हैं। इससे कंक्रीट और लोहे का बंधन टूट जाता है, जिससे स्ट्रक्चर कमजोर हो जाता है।
जांच के बाद ही मिलेगा रहने का सर्टिफिकेट
जिलाधिकारी ने बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसमें प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। तीन दिन में रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि बिल्डिंग को खाली कराया जाएगा या स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट देकर लोगों को रहने की अनुमति दी जाएगी। फ्लैट्स के फर्नीचर, पीवीसी वर्क और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने आग में घी का काम किया। टीम पीवीसी वर्क की भी जांच करेगी।
आरडब्ल्यूए का सोसाइटी के सभी टावरों को जोड़ने के लिए स्काई ब्रिज का प्रस्ताव
बृहस्पतिवार को दिनभर आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने सुरक्षा और ढांचे को मजबूत बनाने पर मंथन किया। फिलहाल टावर डी का स्ट्रक्चर ऑडिट कराने का फैसला लिया गया है। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही मरम्मत और रखरखाव कार्यों की विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी। आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष दिनेश त्यागी ने बताया कि आग से इमारत को हुए नुकसान का आकलन रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा और उसी के अनुसार आवश्यक कार्य कराए जाएंगे।
उन्होंने राहत जताई कि हादसे में कोई व्यक्ति झुलसा तक नहीं। साथ ही कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत किया जाएगा। त्यागी ने बताया कि जीडीए के समक्ष दो टावरों के बीच हर तीन से चार मंजिल पर स्काई ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। अनुमति मिलने पर इस पर काम शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि स्काई ब्रिज बनने से किसी एक टावर में आपात स्थिति होने पर निवासी दूसरे टावर में सुरक्षित पहुंचकर वहां की लिफ्ट से नीचे उतर सकेंगे। इसके अलावा जल्द ही सोसायटी की जीबीएम बुलाई जाएगी, जिसमें सुरक्षा, रखरखाव और अन्य सुधार कार्यों पर व्यापक चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
