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Delhi AIIMS: आयुर्विज्ञान संस्थान में चार माह के शिशु के फेफड़े की दुर्लभ सर्जरी सफल, डॉक्टर बोले- हम उपलब्धि
Thu, 16 Jul 2026 06:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 16 Jul 2026 06:36 AM IST
सार
विशेषज्ञों ने पूरे फेफड़े का हिस्सा निकालने के बजाय केवल रोगग्रस्त ऊतक हटाकर फेफड़ों को सुरक्षित रखा। यह देश के सबसे कम उम्र के मरीजों में सफलतापूर्वक की गई ऐसी चुनिंदा सर्जरी में शामिल है।
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Delhi AIIMS
- फोटो : ANI
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विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के डॉक्टरों ने महज चार महीने के शिशु की दुर्लभ और अत्यंत जटिल फेफड़ा सर्जरी सफलतापूर्वक कर चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जन्मजात कंजेनिटल पल्मोनरी एयरवे मैलफॉर्मेशन (सीपीएएम) से पीड़ित इस शिशु के दोनों फेफड़े प्रभावित थे। विशेषज्ञों ने पूरे फेफड़े का हिस्सा निकालने के बजाय केवल रोगग्रस्त ऊतक हटाकर फेफड़ों को सुरक्षित रखा। यह देश के सबसे कम उम्र के मरीजों में सफलतापूर्वक की गई ऐसी चुनिंदा सर्जरी में शामिल है।
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डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान ही जांच में बच्चे में सीपीएएम की पहचान हो गई थी। इस बीमारी में फेफड़े का कुछ हिस्सा असामान्य रूप से विकसित होकर गांठ जैसी संरचना बना लेता है, जो सांस लेने की प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं देता। सामान्यतः यह समस्या एक ही फेफड़े तक सीमित रहती है, लेकिन इस शिशु के दोनों फेफड़े प्रभावित थे, जिससे उपचार और भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
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चूंकि दोनों फेफड़ों में बीमारी थी, इसलिए फेफड़े का बड़ा हिस्सा निकालना बच्चे के भविष्य के श्वसन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता था। इसे देखते हुए डॉक्टरों ने अत्यंत सूक्ष्म तकनीक अपनाते हुए केवल संक्रमित हिस्से को हटाने का निर्णय लिया।
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बाएं फेफड़े की दूसरे चरण में होगी सर्जरी
फिलहाल बच्चे के बाएं फेफड़े का प्रभावित हिस्सा सुरक्षित रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ महीने बाद, जब बच्चा और अधिक मजबूत हो जाएगा, तब दूसरे चरण की सर्जरी की जाएगी। वर्तमान में शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और ऑपरेशन के केवल दो दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बेहद चुनौतीपूर्ण होता है वन लंग वेंटिलेशन
यह जटिल सर्जरी एम्स के बाल चिकित्सा शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया टीम ने इतनी कम उम्र के शिशु में एक-एक फेफड़े से सांस दिलाने (वन लंग वेंटिलेशन) की विशेष तकनीक का सफल उपयोग किया, जिसे चिकित्सा विज्ञान में अत्यधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।