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MCD Elections: वार्ड समितियों में भाजपा का दबदबा, 12 में से 10 पर कब्जा, 'छोटे' चुनाव में आप को बड़ा झटका
Thu, 16 Jul 2026 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 16 Jul 2026 03:46 AM IST
सार
पिछले साल भाजपा आठ और आम आदमी पार्टी (आप) चार वार्ड समितियों में अध्यक्ष पद जीतने में सफल रही थी, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
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विस्तार
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों के चुनाव में भाजपा ने अपनी राजनीतिक बढ़त को और मजबूत करते हुए 10 समितियों के अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। पिछले साल भाजपा आठ और आम आदमी पार्टी (आप) चार वार्ड समितियों में अध्यक्ष पद जीतने में सफल रही थी, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा ने आप के कब्जे वाली शहरी-सदर पहाड़गंज (सिटी एसपी) और पश्चिमी वार्ड समिति भी अपने नाम कर ली। वहीं आप केवल रोहिणी और करोल बाग वार्ड समिति तक सिमट गई।
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हालांकि भाजपा की इस बड़ी जीत के बीच सबसे बड़ा झटका उसे महापौर प्रवेश वाही के प्रभाव वाले रोहिणी जोन में लगा। यहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर भाजपा उम्मीदवारों को एक-एक वोट से हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि पूरे चुनाव में रोहिणी ही ऐसी प्रमुख समिति रही, जहां भाजपा अपना वर्चस्व कायम नहीं रख सकी। वार्ड समिति चुनावों की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी केवल जीत-हार नहीं रही, बल्कि क्रॉस वोटिंग, दल-बदल और बदले हुए स्थानीय समीकरण रहे। कई समितियों में मतदान के दौरान ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने चुनावी नतीजों की दिशा बदल दी।
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इन चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि एमसीडी की राजनीति में भाजपा ने अपनी स्थिति पहले से अधिक मजबूत कर ली है। दो नई समितियां अपने खाते में जोड़कर उसने निगम की वार्ड समितियों में स्पष्ट बढ़त बना ली है। दूसरी ओर आप का प्रभाव सीमित होता दिखाई दिया। हालांकि रोहिणी और पश्चिमी वार्ड समिति के नतीजों ने यह भी संकेत दिया कि स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत संबंध, क्रॉस वोटिंग और क्षेत्रीय समीकरण अभी भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
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पश्चिमी वार्ड : आप के 25 में से थे 13 पार्षद...वोट मिले सिर्फ 11
पश्चिमी वार्ड समिति का परिणाम भी पूरे चुनाव में सबसे अलग रहा। समिति में आप के 25 में से 13 पार्षद होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार हरीश ओबेरॉय ने अध्यक्ष पद पर 14-11 से जीत दर्ज कर ली। यह परिणाम साफ तौर पर क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा करता है। हालांकि उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और आप की डिंपल आहूजा 13-12 से निर्वाचित हुईं। इससे यह संकेत भी मिला कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण हर पद पर अलग-अलग तरीके से काम कर रहे थे।
मतदान शुरू होने के ढाई घंटे पहले आप के पार्षद भगवा खेमे में शामिल हो गए
सबसे नाटकीय घटनाक्रम शहरी-सदर पहाड़गंज (सिटी एसपी) वार्ड समिति में देखने को मिला। मतदान शुरू होने से करीब ढाई घंटे पहले आप के पार्षद विकास टांक भाजपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने समिति का पूरा गणित बदल दिया। भाजपा उम्मीदवार उषा शर्मा ने अध्यक्ष पद पर 7-5 से जीत दर्ज कर यह समिति आप से छीन ली। दिलचस्प यह भी रहा कि आप के एक अन्य पार्षद और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक के पार्षद ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया। पिछले वर्ष यह समिति आप के कब्जे में थी।
रोहिणी वार्ड : कांग्रेस के दोनों पार्षद दो खेमों में बंट गए
पूरे चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ा नुकसान रोहिणी वार्ड समिति में उठाना पड़ा। महापौर प्रवेश वाही के प्रभाव वाले इस जोन में अध्यक्ष पद पर आप की पुष्पा और उपाध्यक्ष पद पर रमेश चंद ने 12-11 के अंतर से जीत दर्ज की। दरअसल, रोहिणी वार्ड समिति में कांग्रेस के वोट एकतरफा नहीं पड़े। राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि कांग्रेस के दोनों पार्षद अलग-अलग पक्षों में बंट गए। दूसरी ओर आप का दावा है कि उसे कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा के एक पार्षद का वोट मिला, जबकि भाजपा ने इस दावे को खारिज कर दिया।
आप की सियासी ताकत घटाने की राह पर कांग्रेस
दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस की रणनीति अब नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है। पार्टी का फोकस केवल भाजपा का मुकाबला करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह आम आदमी पार्टी (आप) के राजनीतिक प्रभाव को कमजोर करने की दिशा में भी सक्रिय नजर आ रही है। एमसीडी वार्ड समितियों के चुनाव में कांग्रेस के रुख को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस का आकलन है कि वर्ष 2013 के बाद उसके संगठन और पारंपरिक वोट बैंक को सबसे बड़ा नुकसान आम आदमी पार्टी के उभार से हुआ। दिल्ली में कांग्रेस का बड़ा जनाधार आप के साथ चला गया, जबकि बाद के वर्षों में पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में भी आप के विस्तार ने कांग्रेस की राजनीतिक जमीन को प्रभावित किया। पार्टी के भीतर अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि उसके पुनरुत्थान की राह में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी भी बड़ी चुनौती है।
इस सोच की झलक हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिली। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने भाजपा के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर तीखे हमले किए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की मौजूदगी ने करीब 15 विधानसभा सीटों पर आप के वोट बैंक को प्रभावित किया, जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा और वह सत्ता से बाहर हो गई। कांग्रेस भले सरकार नहीं बना सकी, लेकिन उसने चुनावी समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाई।इसी रणनीति की झलक अब एमसीडी वार्ड समिति चुनाव में भी दिखाई दी। दक्षिणी वार्ड समिति में कांग्रेस के दोनों पार्षदों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया, जिससे भाजपा को जीत मिली।
वार्ड समिति चुनाव परिणामों को भाजपा ने विकास एजेंडे की जीत बताया
एमसीडी की 12 वार्ड समितियों में से 10 पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने इसे अपने विकास एजेंडे और ट्रिपल इंजन सरकार की नीतियों पर जनप्रतिनिधियों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बुधवार को जारी अलग-अलग बयानों में कहा कि वार्ड समिति चुनाव के नतीजे दिल्ली में विकास की राजनीति के पक्ष में आए हैं।
- हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि शहरी-सदर क्षेत्र में भाजपा की जीत ऐतिहासिक है। उनके अनुसार, 24 वर्ष बाद पुरानी दिल्ली में भाजपा की उषा शर्मा क्षेत्रीय चेयरमैन चुनी गई हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की विकास यात्रा से जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि शहरी-सदर के अलावा पश्चिम और दक्षिण क्षेत्र के अधिकांश पार्षदों ने भी भाजपा के विकास एजेंडे पर भरोसा जताया है।