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Delhi Fire: आग बुझाने से पहले हांफ रहा दमकल का थका हुआ सिस्टम, जनता को जान देकर भुगतना पड़ रहा है खामियाजा
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 21 Mar 2026 06:38 AM IST
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सार
45 हजार कर्मियों की जरूरत वाले फायर विभाग का पूरा ढांचा महज तीन हजार कर्मचारियों के सहारे चल रहा है।
पालम भीषण अग्निकांड...
- फोटो : भूपिंदर सिंह
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विस्तार
आग बुझाने का जिम्मा जिन कंधों पर है, वही सिस्टम आज खुद संसाधनों की कमी में झुलस रहा है। 45 हजार कर्मियों की जरूरत वाले फायर विभाग का पूरा ढांचा महज तीन हजार कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि न सिर्फ आधुनिक उपकरणों की भारी कमी है, बल्कि 2012 से भर्ती ठप नहीं होने से मानव संसाधन भी लगातार घटता जा रहा है। ऐसे में हर आगजनी की घटना सिर्फ लपटों से लड़ाई नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों के साथ जंग बनती जा रही है जिसका खामियाजा कभी सिस्टम, तो कभी आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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राजधानी में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और साथ ही मौतों का आंकड़ा भी। पिछले साल 18,670 आग की घटनाओं में 76 लोगों की जान चली गई जबकि इस साल 17 मार्च तक 3,001 कॉल्स में 24 लोगों की जान जा चुकी है। हालात इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि जिस सिस्टम को इन घटनाओं से निपटना है, वही संसाधनों के संकट से जूझ रहा है।
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राजधानी के करीब 70 फायर स्टेशनों के लिए 90 स्टेशन अफसरों की जरूरत है, लेकिन कार्यरत सिर्फ 18 हैं। इनमें से 12 अधिकारी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। स्थिति सिर्फ मैनपावर तक सीमित नहीं है। दमकल वाहनों की भी भारी कमी बनी हुई है। कई श्रेणियों में उपलब्ध वाहनों की संख्या जरूरत से आधी या उससे भी कम है। ऑटो वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी के कारण कई गाड़ियां मेंटेनेंस के अभाव में खराब पड़ी हैं।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में फायर सेफ्टी का सबसे बड़ा आधार तेज रिस्पॉन्स टाइम है, लेकिन जब मैनपावर और संसाधनों की कमी होती है तो हर मिनट की देरी सीधे जान का जोखिम बढ़ा देती है। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर और फायर सर्विस को समान गति से मजबूत करना बेहद जरूरी है।
-डॉ. यूएस छिल्लर, डायरेक्टर जनरल, इंस्टीट्यूशन ऑफ फायर इंजीनियर्स (इंडिया)
हाईटेक उपकरणों का संकट
लोगों ने कहा िक घनी कॉलोनियों में दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे आग पर शुरुआती दौर में काबू पाना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि तेजी से बढ़ती हाई-राइज इमारतों के मुकाबले हाईटेक उपकरणों की संख्या बेहद कम है। इससे ऊंची इमारतों में आग लगने पर खतरा और बढ़ जाता है।
राजधानी की बड़ी आबादी अनधिकृत और घनी बस्तियों में रहती है, जहां संकरी गलियों और अव्यवस्थित निर्माण के कारण आग अक्सर ज्यादा घातक साबित होती है। ऐसे इलाकों में दमकल की पहुंच सीमित होने से राहत कार्य और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।