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Pollution: दिल्ली-एनसीआर में वाहन प्रदूषण पर कसेगा डिजिटल शिकंजा, ANPR कैमरे से होगी कार्रवाई

Wed, 05 Aug 2026 11:39 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 05 Aug 2026 11:39 AM IST
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Digital crackdown on vehicular pollution in Delhi-NCR; action to be taken using ANPR cameras
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से लो-एमिशन जोन (एलईजेड) बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की निगरानी के लिए 156 सीमा बिंदुओं पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे। 

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साथ ही दिल्ली-एनसीआर के करीब 500 पेट्रोल पंपों को भी निगरानी प्रणाली से जोड़ा जाएगा। कैमरों को वाहन डेटाबेस और फास्टैग नेटवर्क से जोड़कर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ बिना रोके ही कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी मंगलवार को आयोजित चौथे क्लीन एयर डायलॉग कार्यक्रम में सामने आई। कार्यक्रम का आयोजन सीएक्यूएम रिसोर्स लैब ने किया। इसमें बताया गया कि सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में पीएम2.5 प्रदूषण का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण होता है।
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प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से वसूला जा सकेगा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क
सीएक्यूएम के सदस्य (तकनीकी) डॉ. विरिंदर शर्मा ने बताया कि एएनपीआर कैमरों की मदद से बीएस-1 से बीएस-4 श्रेणी के पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान की जाएगी। ऐसे वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के साथ पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क भी वसूला जा सकेगा। 
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उनका कहना है कि तकनीक आधारित निगरानी से प्रवर्तन अधिक प्रभावी होगा और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण आसान होगा। बैठक में इलेक्ट्रिक और शून्य टेलपाइप उत्सर्जन (ऐसे वाहन जो चलने के दौरान साइलेंसर या पाइप से किसी भी प्रकार की जहरीली गैस या धुआं नहीं छोड़ते हैं) वाले वाहनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल सब्सिडी देने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए चरणबद्ध अनिवार्य लक्ष्य तय किए जाएं। शुरुआत मालवाहक वाहनों, दोपहिया-तिपहिया और दिल्ली की करीब नौ हजार पीली स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक में बदलने से करने की सिफारिश की गई।  योजना का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और दिल्ली-एनसीआर को स्वच्छ परिवहन आधारित क्षेत्र में बदलना है।

तीन फीसदी वाहन, लेकिन प्रदूषण में एक-तिहाई हिस्सेदारी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने बताया कि पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाने के लिए परिवर्तन योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत वाहन स्क्रैप कराने पर सड़क कर में छूट, पंजीकरण शुल्क में राहत और ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक वाहन कुल वाहनों का केवल करीब तीन प्रतिशत हैं, लेकिन वे वाहन प्रदूषण में लगभग 33 प्रतिशत तक योगदान देते हैं। ऐसे में पुराने व अधिक प्रदूषणकारी वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना जरूरी है।

ई-वाहनों के लिए अब सिर्फ प्रोत्साहन नहीं, तय हों अनिवार्य लक्ष्य
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्वच्छ परिवहन को गति देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग संबंधी चरणबद्ध अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। उनका मानना है कि इससे मालवाहक, दोपहिया, तिपहिया व बसों के तेजी से विद्युतीकरण के साथ प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

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