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Delhi: किडनी के पास पल रहा था 12 हफ्ते का भ्रूण, दिल्ली के डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान; बताया दुर्लभ मामला
Wed, 05 Aug 2026 06:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 05 Aug 2026 06:32 AM IST
सार
जांच में पता चला कि महिला की प्रेगनेंसी गर्भाशय में नहीं, बल्कि पेट के अंदर किडनी के पास विकसित हो रही थी। डॉक्टरों ने की-होल (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी के जरिए बिना बड़ा चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल मेडिकल मामले का सफल इलाज कर एक महिला की जान बचाई। जांच में पता चला कि महिला की प्रेगनेंसी गर्भाशय में नहीं, बल्कि पेट के अंदर किडनी के पास विकसित हो रही थी। डॉक्टरों ने की-होल (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी के जरिए बिना बड़ा चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया।
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बंगलूरू की रहने वाली महिला नियमित गर्भावस्था जांच के लिए दिल्ली के इस निजी अस्पताल पहुंची थी। शुरुआती अल्ट्रासाउंड में डॉक्टरों को पेट में एक बड़ी थैली जैसी संरचना दिखाई दी, जिसे पहले डर्मोइड सिस्ट (त्वचा के भीतर थैलीनुमा गांठ) समझा गया। लेकिन बाद में एमआरआई जांच से पता चला कि गर्भाशय की दीवार फट गई थी और 12 सप्ताह का भ्रूण पेट के अंदर किडनी और मुख्य रक्त वाहिकाओं के पास विकसित हो रहा था।
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अस्पताल के ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. मन्नन गुप्ता ने बताया कि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी (भ्रूण का गर्भाशय के बाहर विकसित होना ) का बेहद दुर्लभ रूप है। आमतौर पर ऐसी गर्भावस्था फैलोपियन ट्यूब या ओवरी में होती है, लेकिन इस मामले में भ्रूण किडनी के पास विकसित हो रहा था। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे चिकित्सा कॅरिअर में पहली बार ऐसा मामला देखा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का मामला लगभग 30 हजार मामलों में से किसी एक में देखने को मिलती है।
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