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Faridabad News: गैस की कमी से फैक्टरियाें में आधे से भी कम रह गया उत्पादन
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संवाद कार्यक्रम में भाग लेते उद्यमी। स्त्रोत संवाद
- फोटो : Archive
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उद्यमियों ने कहा, कुशल कारीगरों को रोक कर रखना सबसे बड़ी चुनौती, काम नहीं होगा तो मजदूर पलायन करेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। मुजेसर औद्योगिक क्षेत्र में गैस आपूर्ति में आई बाधा ने सूक्ष्म और लघु इकाइयों (एमएसएमई) के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। फैक्टरियों में उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। ये बातें उद्यमियों ने संवाद कार्यक्रम में कहीं। राजेंद्र, करमजीत सिंह, लालबाबू दूबे, अमरजीत और लवप्रीत सिंह व अन्य उद्यमियों ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह है कि फैक्टरियों में गैस वेल्डिंग और कटिंग आधारित इकाइयों के पहिये लगभग थम चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि पुराने सिलिंडर खाली हो चुके हैं और बाजार से नए कॉमर्शियल सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है।
उद्यमियों का कहना है कि काम बंद होने की कगार पर है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशल कारीगरों को रोक कर रखना है। यदि काम नहीं होगा, तो मजदूर पलायन करेंगे और यदि वे रुके रहे तो बिना उत्पादन के उन्हें वेतन देना छोटे उद्यमियों के लिए नामुमकिन होगा। उद्यमियों ने प्रशासन और संबंधित गैस एजेंसियों से मांग कि है कि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए काॅमर्शियल गैस का कोटा सुनिश्चित किया जाए, गैस की किल्लत के बीच बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर नकेल कसी जाए। साथ ही जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती छोटे उद्योगों को बिजली दरों या अन्य शुल्कों में राहत दी जाए ताकि वह कम से कम इस युद्ध के बीच अपना व्यापार चला सकें।
बातचीत
जब सीजफायर हुआ था उस समय लगा कि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होगी, पर अब जिस तरह से रोज नई जानकारी आ रही है, उसको देखकर कुछ समझ नहीं आ रहा है।-राजेश
सबसे ज्यादा समस्या गैस की ही है। पहले के कुछ सिलिंडर रखे थे, जो कि अब खत्म हो गए हैं। स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।- करमजीत सिंह
इस युद्ध ने छोटे कारोबारियों को बेहद परेशान किया है। कच्चे माल की कीमत तो बढ़ी ही है, ऊपर से गैस हमारी पहुंच से दूर है। - अमरजीत
गैस की किल्लत के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम हो गया है। ऑर्डर तो आ रहे हैं पर गैस ना होने के चलते समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है।-सुशील
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। मुजेसर औद्योगिक क्षेत्र में गैस आपूर्ति में आई बाधा ने सूक्ष्म और लघु इकाइयों (एमएसएमई) के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। फैक्टरियों में उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। ये बातें उद्यमियों ने संवाद कार्यक्रम में कहीं। राजेंद्र, करमजीत सिंह, लालबाबू दूबे, अमरजीत और लवप्रीत सिंह व अन्य उद्यमियों ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह है कि फैक्टरियों में गैस वेल्डिंग और कटिंग आधारित इकाइयों के पहिये लगभग थम चुके हैं। उद्यमियों का कहना है कि पुराने सिलिंडर खाली हो चुके हैं और बाजार से नए कॉमर्शियल सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है।
उद्यमियों का कहना है कि काम बंद होने की कगार पर है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशल कारीगरों को रोक कर रखना है। यदि काम नहीं होगा, तो मजदूर पलायन करेंगे और यदि वे रुके रहे तो बिना उत्पादन के उन्हें वेतन देना छोटे उद्यमियों के लिए नामुमकिन होगा। उद्यमियों ने प्रशासन और संबंधित गैस एजेंसियों से मांग कि है कि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए काॅमर्शियल गैस का कोटा सुनिश्चित किया जाए, गैस की किल्लत के बीच बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर नकेल कसी जाए। साथ ही जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती छोटे उद्योगों को बिजली दरों या अन्य शुल्कों में राहत दी जाए ताकि वह कम से कम इस युद्ध के बीच अपना व्यापार चला सकें।
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जब सीजफायर हुआ था उस समय लगा कि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होगी, पर अब जिस तरह से रोज नई जानकारी आ रही है, उसको देखकर कुछ समझ नहीं आ रहा है।-राजेश
सबसे ज्यादा समस्या गैस की ही है। पहले के कुछ सिलिंडर रखे थे, जो कि अब खत्म हो गए हैं। स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।- करमजीत सिंह
इस युद्ध ने छोटे कारोबारियों को बेहद परेशान किया है। कच्चे माल की कीमत तो बढ़ी ही है, ऊपर से गैस हमारी पहुंच से दूर है। - अमरजीत
गैस की किल्लत के कारण उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम हो गया है। ऑर्डर तो आ रहे हैं पर गैस ना होने के चलते समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है।-सुशील

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