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Faridabad News: नई गेट पास नीति पर विधायक ने जताई कड़ी नाराजगी
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-किसानों ने कहा, नई व्यवस्था से भुगतनी पड़ेंगी परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। एक अप्रैल गेहूं खरीद शुरू होने जा रही है। सीजन से ठीक पहले सरकार द्वारा लागू की गई नई गेट पास नीति ने मंडियों में विवाद खड़ा कर दिया है। किसानों के साथ अब स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने भी इस व्यवस्था का खुलकर विरोध किया है। सभी का आरोप है कि बायोमीट्रिक, टैक्टर का फोटो, नंबर प्लेट सहित कई अनिवार्यता से खरीद प्रक्रिया जटिल बना दी गई है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
किसानों का कहा कि नई नीति के तहत गेट पास केवल उसी किसान को मिलेगा, जिसके नाम पर फसल पंजीकृत है और उसकी मंडी में मौजूदगी के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। उन्होंने इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन अक्सर महिलाओं, बुजुर्गों या बाहर नौकरी करने वाले लोगों के नाम होती है, जिन्हें हर बार मंडी लाना संभव नहीं है। इससे खरीद प्रक्रिया बाधित होने का खतरा है।
किसान ताहिर नम्बरदार, जुबेर, रविन्द्र सिंह, इलियास, सूबे सिंह, इस्लाम पंच, जुबेर, राजेश, बिट्टू और अली मोहम्मद ने भी नई नीति पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि जमीन बुजुर्ग माता-पिता के नाम है, तो उन्हें हर बार मंडी लाना बेहद मुश्किल है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी। पहले ही मंडियों में लंबी लाइनें लगती हैं, अब बायोमेट्रिक की शर्त से देरी और बढ़ेगी।
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सरकार की कथनी करनी में फर्क :
किसानों ने कहा कि सरकार एक तरफ कहती है कि किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकता है, दूसरी तरफ ऐसी शर्तें लगाकर उसे उलझाया जा रहा है। इस नियम से मंडी की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाएगी और सीजन के चरम समय में अव्यवस्था फैल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फैसले ले रहे हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इससे न केवल किसानों को परेशानी होगी, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित होगी।
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नीति पूरी तरह किसान विरोधी : आफताब अहमद
स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने इस नीति को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार किसानों की सहूलियत के बजाय उन्हें तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझा रही है। बायोमीट्रिक अनिवार्यता और कड़े नियम छोटे व सीमांत किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण बनेंगे। सरकार को तुरंत इस नीति में संशोधन करना चाहिए, अन्यथा किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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संशोधन की मांग तेज :
किसान, मंडी एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है किसानों की व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नीति में तुरंत बदलाव किया जाए, ताकि गेहूं खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और किसी भी वर्ग को परेशानी न हो।
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जो आदेश आए हैं ,उनके हिसाब से तैयारी पूरी है। हमारी कोशिश होगी किसी को कोई दिक्कत न हो। हमारे स्तर पर कोई बदलाव संभव नहीं है। जो आदेश होंगे उनकी पालना की जाएगी। मंडी में सभी सुविधाएं कर दी गई हैं।
मनोज कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी, नूंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। एक अप्रैल गेहूं खरीद शुरू होने जा रही है। सीजन से ठीक पहले सरकार द्वारा लागू की गई नई गेट पास नीति ने मंडियों में विवाद खड़ा कर दिया है। किसानों के साथ अब स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने भी इस व्यवस्था का खुलकर विरोध किया है। सभी का आरोप है कि बायोमीट्रिक, टैक्टर का फोटो, नंबर प्लेट सहित कई अनिवार्यता से खरीद प्रक्रिया जटिल बना दी गई है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
किसानों का कहा कि नई नीति के तहत गेट पास केवल उसी किसान को मिलेगा, जिसके नाम पर फसल पंजीकृत है और उसकी मंडी में मौजूदगी के साथ बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा। उन्होंने इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन अक्सर महिलाओं, बुजुर्गों या बाहर नौकरी करने वाले लोगों के नाम होती है, जिन्हें हर बार मंडी लाना संभव नहीं है। इससे खरीद प्रक्रिया बाधित होने का खतरा है।
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किसान ताहिर नम्बरदार, जुबेर, रविन्द्र सिंह, इलियास, सूबे सिंह, इस्लाम पंच, जुबेर, राजेश, बिट्टू और अली मोहम्मद ने भी नई नीति पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि जमीन बुजुर्ग माता-पिता के नाम है, तो उन्हें हर बार मंडी लाना बेहद मुश्किल है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी। पहले ही मंडियों में लंबी लाइनें लगती हैं, अब बायोमेट्रिक की शर्त से देरी और बढ़ेगी।
सरकार की कथनी करनी में फर्क :
किसानों ने कहा कि सरकार एक तरफ कहती है कि किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकता है, दूसरी तरफ ऐसी शर्तें लगाकर उसे उलझाया जा रहा है। इस नियम से मंडी की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाएगी और सीजन के चरम समय में अव्यवस्था फैल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि “अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फैसले ले रहे हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। इससे न केवल किसानों को परेशानी होगी, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित होगी।
नीति पूरी तरह किसान विरोधी : आफताब अहमद
स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने इस नीति को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार किसानों की सहूलियत के बजाय उन्हें तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझा रही है। बायोमीट्रिक अनिवार्यता और कड़े नियम छोटे व सीमांत किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण बनेंगे। सरकार को तुरंत इस नीति में संशोधन करना चाहिए, अन्यथा किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
संशोधन की मांग तेज :
किसान, मंडी एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है किसानों की व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नीति में तुरंत बदलाव किया जाए, ताकि गेहूं खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और किसी भी वर्ग को परेशानी न हो।
जो आदेश आए हैं ,उनके हिसाब से तैयारी पूरी है। हमारी कोशिश होगी किसी को कोई दिक्कत न हो। हमारे स्तर पर कोई बदलाव संभव नहीं है। जो आदेश होंगे उनकी पालना की जाएगी। मंडी में सभी सुविधाएं कर दी गई हैं।
मनोज कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी, नूंह