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Faridabad News: एनआई की जांच टीम ने छांयसा का दौरा किया
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-एक संदिग्ध मरीज मेडिकल कॉलेज में कराया गया भर्ती
-टीम ने मृत मरीजों के लक्षणों की ली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (एनआई) चेन्नई की टीम ने भी गांव छांयसा का दौरा किया। टीम में शामिल डॉक्टर गणेश एवं उनके सहयोगियों ने गांव में मृत हुए मरीजों के बारे में जानकारी ली। रोग के लक्षण, किए गए उपचार की रिपोर्ट ली। टीम ने स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय मेडिकल अफसरों से भी विस्तृत जानकारी ली।
इस बीच गांव की एक 35 वर्षीय महिला मरीज को भी नूंह नल्हड़ स्थित मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है। उसको उल्टियां आ रही हैं। महिला मरीज की अचानक तबीयत खराब हुई। उसको पेट में दर्द एवं उल्टी की शिकायत हुई। हालत बिगड़ते देख परिवारजन उसको नूंह नल्हड़ स्थित मेडिकल कॉलेज ले गए। इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज ने जिला स्वास्थ्य विभाग को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इससे पूर्व गांव में आईसीएमआर पुणे के संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एवं दिल्ली की नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमों ने भी गांव का दौरा किया है। हेपिटाइटिस बी, सी एवं ए के पॉजिटिव एवं नेगेटिव मरीजों के सैम्पल लिए। मृत हुए लोगों के परिवारों से जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग ने भी शनिवार को गांव छांयसा में ओपीड़ी शिविर लगाया। शनिवार को शिविर में एक भी मरीज नहीं आया।
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मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाएं : मो.इसराईल
इस बीच स्थानीय विधायक मोहम्मद इसराईल चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से अपील की है कि वे गांव में कारगर कदम उठाएं। एनर्जी ड्रिंक का नाम लेकर जिम्मेदारी से अलग न हों। उन्होंने मांग की है कि गांव में हुई मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगना चाहिए। मृतकों में कई ऐसे हैं जिन्होंने एनर्जी ड्रिंक का उपयोग नहीं किया। झोलाछाप डॉक्टरों से भी इलाज नहीं कराया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वे इस मुद्दे को उठाएंगे। झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नही आए हैं। सोमवार को झोलाछाप के खिलाफ डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। उसके बाद से जिला स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने छांयसा की स्थिति के बारे में जिला सिविल सर्जन सत्येंद्र वशिष्ठ से जानकारी ली है। स्वास्थ्य मंत्री ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं गांव में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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-टीम ने मृत मरीजों के लक्षणों की ली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (एनआई) चेन्नई की टीम ने भी गांव छांयसा का दौरा किया। टीम में शामिल डॉक्टर गणेश एवं उनके सहयोगियों ने गांव में मृत हुए मरीजों के बारे में जानकारी ली। रोग के लक्षण, किए गए उपचार की रिपोर्ट ली। टीम ने स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय मेडिकल अफसरों से भी विस्तृत जानकारी ली।
इस बीच गांव की एक 35 वर्षीय महिला मरीज को भी नूंह नल्हड़ स्थित मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है। उसको उल्टियां आ रही हैं। महिला मरीज की अचानक तबीयत खराब हुई। उसको पेट में दर्द एवं उल्टी की शिकायत हुई। हालत बिगड़ते देख परिवारजन उसको नूंह नल्हड़ स्थित मेडिकल कॉलेज ले गए। इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज ने जिला स्वास्थ्य विभाग को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इससे पूर्व गांव में आईसीएमआर पुणे के संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एवं दिल्ली की नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमों ने भी गांव का दौरा किया है। हेपिटाइटिस बी, सी एवं ए के पॉजिटिव एवं नेगेटिव मरीजों के सैम्पल लिए। मृत हुए लोगों के परिवारों से जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग ने भी शनिवार को गांव छांयसा में ओपीड़ी शिविर लगाया। शनिवार को शिविर में एक भी मरीज नहीं आया।
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मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाएं : मो.इसराईल
इस बीच स्थानीय विधायक मोहम्मद इसराईल चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से अपील की है कि वे गांव में कारगर कदम उठाएं। एनर्जी ड्रिंक का नाम लेकर जिम्मेदारी से अलग न हों। उन्होंने मांग की है कि गांव में हुई मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगना चाहिए। मृतकों में कई ऐसे हैं जिन्होंने एनर्जी ड्रिंक का उपयोग नहीं किया। झोलाछाप डॉक्टरों से भी इलाज नहीं कराया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वे इस मुद्दे को उठाएंगे। झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नही आए हैं। सोमवार को झोलाछाप के खिलाफ डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। उसके बाद से जिला स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने छांयसा की स्थिति के बारे में जिला सिविल सर्जन सत्येंद्र वशिष्ठ से जानकारी ली है। स्वास्थ्य मंत्री ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं गांव में आवश्यक कदम उठाए जाएं।