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Faridabad News: नीमका जेल में बंद 3 हजार कैदियों के भविष्य संवारने की तैयारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ऊंची-ऊंची दीवारों और सख्त पहरे के बीच अब एक नई शुरुआत की तैयारी है। जिला जेल में बंद हजारों कैदियों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए जेल प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत शिक्षा विभाग से अध्यापकों की मांग की गई है, ताकि जेल के अंदर ही पढ़ाई शुरू कराई जा सके।
जिला जेल में इस समय करीब 3152 बंदी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो या तो निरक्षर हैं या फिर उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। अब जेल प्रशासन चाहता है कि सजा काटने के साथ-साथ ये कैदी शिक्षा हासिल करें और अपनी जिंदगी को नई दिशा दें। जेल अधीक्षक ने जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर कक्षा 3, 5 और 8 स्तर के अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही प्रौढ़ शिक्षा के तहत भी कैदियों को पढ़ाने की योजना बनाई गई है।
अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो जेल के अंदर ही कक्षाएं लगेंगी और कैदी किताबों से जुड़ेंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि सोच बदलना है। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा से कैदियों के भीतर सकारात्मक बदलाव आएगा और वे जेल से बाहर निकलकर एक जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है। ऐसे में अगर कैदियों को सही मार्गदर्शन और पढ़ाई का मौका मिलता है, तो वे अपने अतीत की गलतियों से सीखकर बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
हमने शिक्षकों को इसके बारे में बताना शुरू कर दिया है। जो भी शिक्षक उन्हें पढ़ाने के इच्छुक होंगे, उन्हें जल्द ही यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। इसी सप्ताह में यह करने पर जोर रहेगा। बसंत कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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फरीदाबाद। ऊंची-ऊंची दीवारों और सख्त पहरे के बीच अब एक नई शुरुआत की तैयारी है। जिला जेल में बंद हजारों कैदियों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए जेल प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत शिक्षा विभाग से अध्यापकों की मांग की गई है, ताकि जेल के अंदर ही पढ़ाई शुरू कराई जा सके।
जिला जेल में इस समय करीब 3152 बंदी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो या तो निरक्षर हैं या फिर उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। अब जेल प्रशासन चाहता है कि सजा काटने के साथ-साथ ये कैदी शिक्षा हासिल करें और अपनी जिंदगी को नई दिशा दें। जेल अधीक्षक ने जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर कक्षा 3, 5 और 8 स्तर के अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की है। साथ ही प्रौढ़ शिक्षा के तहत भी कैदियों को पढ़ाने की योजना बनाई गई है।
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अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो जेल के अंदर ही कक्षाएं लगेंगी और कैदी किताबों से जुड़ेंगे। इस पहल का मकसद सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि सोच बदलना है। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा से कैदियों के भीतर सकारात्मक बदलाव आएगा और वे जेल से बाहर निकलकर एक जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है। ऐसे में अगर कैदियों को सही मार्गदर्शन और पढ़ाई का मौका मिलता है, तो वे अपने अतीत की गलतियों से सीखकर बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
हमने शिक्षकों को इसके बारे में बताना शुरू कर दिया है। जो भी शिक्षक उन्हें पढ़ाने के इच्छुक होंगे, उन्हें जल्द ही यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। इसी सप्ताह में यह करने पर जोर रहेगा। बसंत कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
