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Faridabad News: दो एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए 1550 करोड़ रुपये की मंजूरी

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2026 01:00 AM IST
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Rs 1550 crore approved for two elevated corridors
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जाम से जूझते फरीदाबाद को बजट से मिली राहत, ग्रेटर फरीदाबाद में 260 किमी सड़कों को निर्माण किया जाएगा
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फरीदाबाद के उद्योगों को मिले कई लाभ, एमएसएमई पर रहा विशेष ध्यान
मिली कुल 9 नए फ्लाईओवरों की सौगात, जाम का झाम होगा खत्म

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। करीब 30 लाख की आबादी वाले औद्योगिक शहर फरीदाबाद को लंबे समय से ट्रैफिक जाम, टूटी सड़कों और धीमी औद्योगिक प्रक्रियाओं की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में मुख्यमंत्री ने इन्हीं चुनौतियों को केंद्र में रखते हुए कई अहम घोषणाएं की हैं। दो एलिवेटेड कॉरिडोर पर 1550 करोड़ रुपये की मंजूरी, ग्रेटर फरीदाबाद में 260 किलोमीटर सड़क निर्माण और उद्योगों के लिए नई नीतिगत रियायतों को शहर के लिए बड़े पैकेज के रूप में देखा जा रहा है।


फरीदाबाद-दिल्ली बॉर्डर, बाटा चौक, नीलम-बड़खल रोड और सैनिक कॉलोनी मोड़ जैसे इलाके रोजाना भीषण जाम का सामना करते हैं। शहर से बड़ी संख्या में लोग रोज दिल्ली और गुरुग्राम के लिए आवागमन करते हैं, जबकि यहां हजारों छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं। इसी दबाव को कम करने के लिए दो एलिवेटेड संपर्क मार्ग विकसित किए जाएंगे। पहला कॉरिडोर बड़खल मार्ग पर मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे से सैनिक कॉलोनी मोड़ तक करीब आठ किलोमीटर लंबा होगा। इस पर लगभग 850 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसमें पांच फ्लाईओवर शामिल होंगे।
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दूसरा कॉरिडोर बाटा मार्ग पर सैनिक कॉलोनी मोड़ से बीपीटीपी चौक तक करीब नौ किलोमीटर लंबा बनाया जाएगा। इसकी लागत लगभग 700 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसमें चार फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं। दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 1550 करोड़ रुपये होगी।

इन नौ नए फ्लाईओवरों के बाद पूर्वी और पश्चिमी फरीदाबाद के बीच यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। औद्योगिक इलाकों तक माल की आवाजाही भी सुगम होगी, जिससे परिवहन लागत में कमी आ सकती है।


ग्रेटर फरीदाबाद में नई सड़कें बनने से राह होगी आसान

पिछले एक दशक में ग्रेटर फरीदाबाद में तेजी से रिहायशी सेक्टर विकसित हुए हैं लेकिन सड़क नेटवर्क उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो पाया। बरसात के दौरान जलभराव और गड्ढों की समस्या आम रही है। बजट में 260 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण की घोषणा से हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़कें बनने से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंच आसान होगी। साथ ही प्रॉपर्टी बाजार में भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाले प्रस्तावित कॉरिडोर को लागू करने की जिम्मेदारी एफएमडीए को दी गई है, जिससे परियोजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ी है।



नए आईएमटी से औद्योगिक विस्तार की तैयारी

फरीदाबाद पहले से ही हरियाणा का प्रमुख औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल और इंजीनियरिंग इकाइयों की बड़ी संख्या है। अब एक और औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए किसानों से आवेदन लिए जा रहे हैं। नया आईएमटी स्थापित होने से भूमि की कमी से जूझ रहे उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।


लीज और फ्रीहोल्ड विकल्प से निवेश को बल
आईएमटी क्षेत्रों में उद्योगों को लीज पर प्लॉट देने के साथ जमीन को फ्रीहोल्ड कराने का विकल्प भी दिया जाएगा। उद्योग संगठन लंबे समय से स्थायी स्वामित्व की सुविधा की मांग कर रहे थे। इस कदम से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे लंबी अवधि के निवेश के लिए आगे आ सकते हैं।

कॉमन इंडस्ट्रियल सेक्रेटेरिएट और एमएसएमई को बढ़ावा

उद्योगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देने के लिए कॉमन इंडस्ट्रियल सेक्रेटेरिएट स्थापित किया जाएगा। यहां लाइसेंस, अनुमति और अन्य औपचारिकताएं एक ही स्थान पर पूरी की जा सकेंगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने, सेलर मीट आयोजित करने और दो औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने की योजना भी शामिल है। इससे निर्यात बढ़ाने और स्थानीय इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।



बिजली समस्या पर फोकस
फरीदाबाद के उद्योग लंबे समय से बिजली कटौती के कारण डीजल जनरेटर पर निर्भर हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है। बजट में उद्योगों को अधिक समय तक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। यदि यह लागू होता है तो प्रतिस्पर्धा में सुधार हो सकता है।



शहर की दिशा बदलने की कोशिश
ट्रैफिक, सड़क, औद्योगिक विस्तार और प्रशासनिक सुधारों को मिलाकर देखा जाए तो यह बजट फरीदाबाद के लिए बुनियादी बदलाव की कोशिश के रूप में सामने आया है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की होगी। शहर के नागरिक और उद्योग जगत दोनों की नजर आगामी क्रियान्वयन पर टिकी रहेगी।
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