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Faridabad News: हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंजे शिवालय
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ओल्ड फरीदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से डाक कांवड लेकर जाते कांवड़िया। फोटो जोगेंद्र शर्मा
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शिवरात्रि पर सुबह से ही मंदिरों में लगी रहीं कतार, कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक, परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार को फरीदाबाद के शिवालय हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठे। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर लौटे कांवड़ियों ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी कांवड़ यात्रा पूर्ण की। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
शिवरात्रि के अवसर पर जिले के छोटे-बड़े करीब 100 से अधिक मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की करीब आधा किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। एनआईटी स्थित महारानी वैष्णो देवी मंदिर, एनआईटी-5 के तत्कालेश्वर मंदिर, बस अड्डा स्थित प्राचीन काली मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। सोसाइटियों में बने मंदिरों में भी लोगों ने सामूहिक रूप से भगवान शिव का अभिषेक किया।
श्री सिद्धदाता आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब
शिवरात्रि पर श्री सिद्धदाता में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हरिद्वार समेत विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पहुंचे सैकड़ों कांवड़ियों और डाक कांवड़ियों ने भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया। हजारों भक्तों ने दर्शन और पूजा-अर्चना की।
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50 किलो के सुमित ने उठाया 121 किलो गंगाजल
बल्लभगढ़ के ऊंचागांव निवासी 22 वर्षीय सुमित कुमार ने अपनी आस्था और संकल्प से लोगों का ध्यान खींचा। महज 50 किलो वजन के सुमित ने हरिद्वार से 121 किलो गंगाजल कांवड़ के रूप में उठाया और पैदल यात्रा पूरी कर गांव पहुंचे।
सुरक्षा को लेकर पुलिस रही अलर्ट
शिवरात्रि को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने प्रमुख मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ वालंटियर भी लगाए गए। मंदिर परिसरों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई। कई दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर लौटे कांवड़ियों के परिवार और परिजन भी जलाभिषेक के दौरान उनके साथ मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार को फरीदाबाद के शिवालय हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठे। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर लौटे कांवड़ियों ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी कांवड़ यात्रा पूर्ण की। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
शिवरात्रि के अवसर पर जिले के छोटे-बड़े करीब 100 से अधिक मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की करीब आधा किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। एनआईटी स्थित महारानी वैष्णो देवी मंदिर, एनआईटी-5 के तत्कालेश्वर मंदिर, बस अड्डा स्थित प्राचीन काली मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। सोसाइटियों में बने मंदिरों में भी लोगों ने सामूहिक रूप से भगवान शिव का अभिषेक किया।
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श्री सिद्धदाता आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब
शिवरात्रि पर श्री सिद्धदाता में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हरिद्वार समेत विभिन्न तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर पहुंचे सैकड़ों कांवड़ियों और डाक कांवड़ियों ने भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया। हजारों भक्तों ने दर्शन और पूजा-अर्चना की।
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50 किलो के सुमित ने उठाया 121 किलो गंगाजल
बल्लभगढ़ के ऊंचागांव निवासी 22 वर्षीय सुमित कुमार ने अपनी आस्था और संकल्प से लोगों का ध्यान खींचा। महज 50 किलो वजन के सुमित ने हरिद्वार से 121 किलो गंगाजल कांवड़ के रूप में उठाया और पैदल यात्रा पूरी कर गांव पहुंचे।
सुरक्षा को लेकर पुलिस रही अलर्ट
शिवरात्रि को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने प्रमुख मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ वालंटियर भी लगाए गए। मंदिर परिसरों और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई। कई दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर लौटे कांवड़ियों के परिवार और परिजन भी जलाभिषेक के दौरान उनके साथ मौजूद रहे।

ओल्ड फरीदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से डाक कांवड लेकर जाते कांवड़िया। फोटो जोगेंद्र शर्मा

ओल्ड फरीदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से डाक कांवड लेकर जाते कांवड़िया। फोटो जोगेंद्र शर्मा

ओल्ड फरीदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग से डाक कांवड लेकर जाते कांवड़िया। फोटो जोगेंद्र शर्मा