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Faridabad News: बैंक लॉकर से गहने गायब होने के मामले में चोरी की प्राथमिकी दर्ज
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पुलिस ने बैंक प्रबंधक को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड मांगा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की रेलवे रोड शाखा के लॉकर से करीब 21 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण गायब होने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर, बैंक प्रबंधक को नोटिस जारी कर लॉकर की विजिट हिस्ट्री, कच्चा विजिट रजिस्टर और संचालन से जुड़े तमाम दस्तावेज मांगे हैं।
पुलिस ने बैंक पहुंचकर शुरुआती पड़ताल के बाद भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत चोरी की प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़ित आशीष कपूर अपनी 74 वर्षीय मां सुदेश कपूर के साथ इस लॉकर का संचालन कर रहे थे। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, बैंक कर्मचारियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस बात का पता लगा रही है कि लॉकर से गहने कब और कैसे गायब हुए।
12 साल पुराना लॉकर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्यरत सेक्टर-28 निवासी आशीष कपूर अपनी मां सुदेश कपूर के साथ पीएनबी की रेलवे रोड शाखा में लॉकर के संयुक्त धारक हैं। यह लॉकर वर्ष 2013 यानी करीब 12 साल पहले अलॉट हुआ था, जिसमें परिवार के 148.5 ग्राम सोने के गहने और 70 ग्राम चांदी के सात सिक्के सुरक्षित रखे गए थे।
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चाबी घुमाने पर नहीं खुला लॉकर
बीती 21 जुलाई को पीड़ित अपने गहने देखने बैंक पहुंचे थे। नियम के तहत लॉकर खोलने के लिए दो चाबियों का इस्तेमाल होता है। एक ग्राहक की और दूसरी बैंक प्रबंधक की मास्टर की। दोनों चाबियां एक साथ लगाने के बावजूद ताला नहीं घूमा और लॉकर नहीं खुला। इस पर प्रबंधक ने तकनीशियन को बुलाने की बात कहकर 28 जुलाई का समय दिया।
40वीं विजिट में तोड़ा गया लॉकर
गत 28 जुलाई को पीड़ित की लॉकर में 40वीं विजिट दर्ज की गई। जब तकनीशियन भी मूल चाबी से ताला नहीं खोल सका, तो आशीष कपूर से लिखित अनुमति लेकर लॉकर तोड़ा गया। ताला टूटते ही अंदर का नजारा देखकर सभी सन्न रह गए, क्योंकि लॉकर में रखे करीब 21 लाख रुपये के आभूषण पूरी तरह गायब थे।
बैंक ने मांगा 7 से 8 दिन का वक्त
लॉकर खाली मिलने के बाद बैंक प्रबंधन ने उसी दिन 28 जुलाई को पीड़ित को एक आधिकारिक पत्र सौंपा। इसमें बैंक ने स्वीकार किया कि लॉकर तोड़ने पर खाली पाया गया है। इसके साथ ही बैंक प्रशासन ने मामले की गहराई से आंतरिक जांच (इंटरनल इंक्वायरी) पूरी करने के लिए पीड़ित से 7 से 8 दिन का समय मांगा।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, फिंगरप्रिंट लिए गए
पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि वारदात के बाद पुलिस की सिफारिश पर फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और क्राइम यूनिट की टीम ने बैंक के लॉकर रूम का मुआयना किया। टीम ने क्षतिग्रस्त लॉकर और आसपास के हिस्सों से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) व अन्य जैविक साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जा गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की रेलवे रोड शाखा के लॉकर से करीब 21 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण गायब होने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर, बैंक प्रबंधक को नोटिस जारी कर लॉकर की विजिट हिस्ट्री, कच्चा विजिट रजिस्टर और संचालन से जुड़े तमाम दस्तावेज मांगे हैं।
पुलिस ने बैंक पहुंचकर शुरुआती पड़ताल के बाद भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत चोरी की प्राथमिकी दर्ज की है। पीड़ित आशीष कपूर अपनी 74 वर्षीय मां सुदेश कपूर के साथ इस लॉकर का संचालन कर रहे थे। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, बैंक कर्मचारियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस बात का पता लगा रही है कि लॉकर से गहने कब और कैसे गायब हुए।
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12 साल पुराना लॉकर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्यरत सेक्टर-28 निवासी आशीष कपूर अपनी मां सुदेश कपूर के साथ पीएनबी की रेलवे रोड शाखा में लॉकर के संयुक्त धारक हैं। यह लॉकर वर्ष 2013 यानी करीब 12 साल पहले अलॉट हुआ था, जिसमें परिवार के 148.5 ग्राम सोने के गहने और 70 ग्राम चांदी के सात सिक्के सुरक्षित रखे गए थे।
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चाबी घुमाने पर नहीं खुला लॉकर
बीती 21 जुलाई को पीड़ित अपने गहने देखने बैंक पहुंचे थे। नियम के तहत लॉकर खोलने के लिए दो चाबियों का इस्तेमाल होता है। एक ग्राहक की और दूसरी बैंक प्रबंधक की मास्टर की। दोनों चाबियां एक साथ लगाने के बावजूद ताला नहीं घूमा और लॉकर नहीं खुला। इस पर प्रबंधक ने तकनीशियन को बुलाने की बात कहकर 28 जुलाई का समय दिया।
40वीं विजिट में तोड़ा गया लॉकर
गत 28 जुलाई को पीड़ित की लॉकर में 40वीं विजिट दर्ज की गई। जब तकनीशियन भी मूल चाबी से ताला नहीं खोल सका, तो आशीष कपूर से लिखित अनुमति लेकर लॉकर तोड़ा गया। ताला टूटते ही अंदर का नजारा देखकर सभी सन्न रह गए, क्योंकि लॉकर में रखे करीब 21 लाख रुपये के आभूषण पूरी तरह गायब थे।
बैंक ने मांगा 7 से 8 दिन का वक्त
लॉकर खाली मिलने के बाद बैंक प्रबंधन ने उसी दिन 28 जुलाई को पीड़ित को एक आधिकारिक पत्र सौंपा। इसमें बैंक ने स्वीकार किया कि लॉकर तोड़ने पर खाली पाया गया है। इसके साथ ही बैंक प्रशासन ने मामले की गहराई से आंतरिक जांच (इंटरनल इंक्वायरी) पूरी करने के लिए पीड़ित से 7 से 8 दिन का समय मांगा।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, फिंगरप्रिंट लिए गए
पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि वारदात के बाद पुलिस की सिफारिश पर फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और क्राइम यूनिट की टीम ने बैंक के लॉकर रूम का मुआयना किया। टीम ने क्षतिग्रस्त लॉकर और आसपास के हिस्सों से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) व अन्य जैविक साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा जा गया है।