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Ghaziabad News: बंधक जमीन बेचकर 11 लाख रुपये की फर्जी रसीद बनाई
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गाजियाबाद। सिहानी गेट क्षेत्र में सहकारी ग्राम विकास बैंक से बंधक रखी जमीन को बेचने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने लोन पूरा होने की फर्जी रसीद बनाकर खरीदारों को गुमराह किया। बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक निशा पाल ने अब्दुल्ला खां और मुस्तफा खां के खिलाफ सिहानी गेट थाने में केस दर्ज कराया है।
ढबारसी गांव निवासी ईदा खां ने दुग्ध प्रसंस्करण योजना के लिए बैंक से चार लाख रुपये का लोन लिया था। उन्होंने अपनी भूमि बैंक के पक्ष में बंधक रखी थी। बैंक का दावा है कि जमीन पर उनका प्रथम चार्ज था। ईदा खां की मृत्यु के बाद यह बंधक भूमि उनके पुत्रों अब्दुल्ला खां और मुस्तफा खां को विरासत में मिली। लोन का भार भी वारिसों पर बना रहा। आरोप है कि बैंक का प्रथम चार्ज होने के बावजूद दोनों भाइयों ने जमीन बेच दी। बैंक प्रबंधन को जानकारी मिलने पर मामले की जांच की गई। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
जमीन की बिक्री के दौरान खरीदारों को बताया गया कि लोन खाता बंद हो चुका है। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जमीन पर बैंक का कोई बकाया नहीं है। बैंक ने मूल रूप से एक लाख रुपये जमा होने की रसीद जारी की थी। आरोप है कि इस रसीद को फर्जी तरीके से ग्यारह लाख रुपये का कर दिया गया। इसी फर्जी रसीद के आधार पर खरीदारों को लोन का पूरा भुगतान होने की बात कही गई।
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सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ढबारसी गांव निवासी ईदा खां ने दुग्ध प्रसंस्करण योजना के लिए बैंक से चार लाख रुपये का लोन लिया था। उन्होंने अपनी भूमि बैंक के पक्ष में बंधक रखी थी। बैंक का दावा है कि जमीन पर उनका प्रथम चार्ज था। ईदा खां की मृत्यु के बाद यह बंधक भूमि उनके पुत्रों अब्दुल्ला खां और मुस्तफा खां को विरासत में मिली। लोन का भार भी वारिसों पर बना रहा। आरोप है कि बैंक का प्रथम चार्ज होने के बावजूद दोनों भाइयों ने जमीन बेच दी। बैंक प्रबंधन को जानकारी मिलने पर मामले की जांच की गई। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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जमीन की बिक्री के दौरान खरीदारों को बताया गया कि लोन खाता बंद हो चुका है। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जमीन पर बैंक का कोई बकाया नहीं है। बैंक ने मूल रूप से एक लाख रुपये जमा होने की रसीद जारी की थी। आरोप है कि इस रसीद को फर्जी तरीके से ग्यारह लाख रुपये का कर दिया गया। इसी फर्जी रसीद के आधार पर खरीदारों को लोन का पूरा भुगतान होने की बात कही गई।
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सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।