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Ghaziabad News: जंग से सुलगी क्रूड ऑयल की कीमत...तपिश कूलर उद्योग तक
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मालीवाड़ा बाजार में बिकते कूलर। संवाद
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गाजियाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से क्रूड ऑयल के दाम में लगी आग की तपिश जिले के कूलर उद्योग में भी महसूस की जा रही है। कच्चा माल महंगा होने के कारण उत्पादन लागत बढ़ने से देश की प्रमुख कूलर मंडियों में शामिल गाजियाबाद में प्लास्टिक कूलर के दाम आठ से 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इससे व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव का असर स्थानीय उद्योगों पर साफ दिख रहा है। व्यापारियों के अनुसार, बीते 10 दिनों में कूलरों की कीमत में तेजी से उछाल आया है। पिछले साल 1,500 से 1,800 रुपये में मिलने वाला छोटा कूलर अब 2,000 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह 8,500 से 9,000 रुपये तक बिकने वाले बड़े कूलर की कीमत बढ़कर लगभग 10 हजार रुपये हो गई है।
गाजियाबाद से फरवरी से मई के बीच बड़ी संख्या में कूलरों की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों में होती है। कूलर एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष गोपीचंद ने बताया कि क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से कच्चे माल की लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर कूलर उद्योग पर पड़ा है।
क्रूड ऑयल से तैयार होता है कच्चा माल
प्लास्टिक कूलर बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल क्रूड ऑयल से तैयार होता है। इससे बनने वाले प्लास्टिक दानों का उपयोग कूलर समेत कई उत्पादों में किया जाता है। व्यापारी नेता सौरभ के अनुसार, मध्य एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चा माल महंगा हो गया है। गाजियाबाद में प्लास्टिक दाना बनाने वाली सैकड़ों इकाइयां हैं, जो इस बढ़ोतरी से प्रभावित हुई हैं।
एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार
कूलर उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, जिले में कूलर उद्योग का सालाना कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। फरवरी से मई के बीच यहां से लाखों कूलरों की सप्लाई देशभर में होती है। थोक व्यापारी और उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच के प्रदेश अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने बताया कि जिले में 100 से अधिक कूलर निर्माण इकाइयां हैं। इनकी सबसे अधिक सप्लाई उत्तर प्रदेश के भीतर ही होती है। प्रमुख ब्रांड्स का कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
इन क्षेत्रों में है कूलर उद्योग
गाजियाबाद के साउथ साइट जीटी रोड, बुलंदशहर रोड, मालीवाड़ा, विकासनगर, मेरठ रोड और मसूरी-गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र कूलर निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं।
अप्रैल में चढ़ेगा पारा, तब बढ़ेगी परेशानी
कूलर व्यापारियों का कहना है कि हर साल अप्रैल में गर्मी बढ़ते ही कूलर की मांग बढ़ जाती है। आम लोगों की पहुंच से एसी अब भी दूर है। इसलिए ठंडी हवा लेने और गर्मी की तपिश से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग कूलर खरीदते हैं। इस बार युद्ध के कारण उपजी महंगाई का असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। गोविंदपुरम निवासी सौरभ चौधरी ने बताया कि इस बार नया कूलर लेने की सोच रहे थे। पुराना कूलर कूलिंग नहीं कर रहा है। बाजार में कई दुकानों पर पता किया। एक महीने पहले जिस कूलर का दाम चार हजार रुपये था, अब वह साढ़े चार से पांच हजार का बताया जा रहा है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। शास्त्रीनगर निवासी मोहित कुमार ने बताया कि उन्हें भी नया कूलर लेना है। अब ठंडी हवा लेने के लिए बजट बढ़ाना पड़ेगा या इंतजार करना होगा।
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गाजियाबाद से फरवरी से मई के बीच बड़ी संख्या में कूलरों की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों में होती है। कूलर एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष गोपीचंद ने बताया कि क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से कच्चे माल की लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर कूलर उद्योग पर पड़ा है।
क्रूड ऑयल से तैयार होता है कच्चा माल
प्लास्टिक कूलर बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल क्रूड ऑयल से तैयार होता है। इससे बनने वाले प्लास्टिक दानों का उपयोग कूलर समेत कई उत्पादों में किया जाता है। व्यापारी नेता सौरभ के अनुसार, मध्य एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चा माल महंगा हो गया है। गाजियाबाद में प्लास्टिक दाना बनाने वाली सैकड़ों इकाइयां हैं, जो इस बढ़ोतरी से प्रभावित हुई हैं।
एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार
कूलर उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, जिले में कूलर उद्योग का सालाना कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। फरवरी से मई के बीच यहां से लाखों कूलरों की सप्लाई देशभर में होती है। थोक व्यापारी और उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच के प्रदेश अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने बताया कि जिले में 100 से अधिक कूलर निर्माण इकाइयां हैं। इनकी सबसे अधिक सप्लाई उत्तर प्रदेश के भीतर ही होती है। प्रमुख ब्रांड्स का कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
इन क्षेत्रों में है कूलर उद्योग
गाजियाबाद के साउथ साइट जीटी रोड, बुलंदशहर रोड, मालीवाड़ा, विकासनगर, मेरठ रोड और मसूरी-गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र कूलर निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं।
अप्रैल में चढ़ेगा पारा, तब बढ़ेगी परेशानी
कूलर व्यापारियों का कहना है कि हर साल अप्रैल में गर्मी बढ़ते ही कूलर की मांग बढ़ जाती है। आम लोगों की पहुंच से एसी अब भी दूर है। इसलिए ठंडी हवा लेने और गर्मी की तपिश से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग कूलर खरीदते हैं। इस बार युद्ध के कारण उपजी महंगाई का असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। गोविंदपुरम निवासी सौरभ चौधरी ने बताया कि इस बार नया कूलर लेने की सोच रहे थे। पुराना कूलर कूलिंग नहीं कर रहा है। बाजार में कई दुकानों पर पता किया। एक महीने पहले जिस कूलर का दाम चार हजार रुपये था, अब वह साढ़े चार से पांच हजार का बताया जा रहा है। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। शास्त्रीनगर निवासी मोहित कुमार ने बताया कि उन्हें भी नया कूलर लेना है। अब ठंडी हवा लेने के लिए बजट बढ़ाना पड़ेगा या इंतजार करना होगा।