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UP: 'जो स्मार्टफोन नहीं चला सकते, उन्हें बाहर करो', जैश-ए-मोहम्मद ने दिया था जिहादी को फरमान, मिला था ये संदेश
अनिल त्यागी, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Mon, 23 Mar 2026 08:50 AM IST
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सार
जासूसी मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने मुख्य आरोपी शावेज उर्फ जिहादी को फरमान दिया था कि जो स्मार्टफोन नहीं चला सकते, उन्हें बाहर करो। कोड वर्ड में बातचीत का दबाव रहता था। ताकि पकड़े जाने पर राज न खुले। ऑनलाइन ट्रेनिंग और वीडियो के जरिये कोडिंग की जानकारी दी जाती थी।
Ghaziabad Spying Case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और फरातुल्ला गौरी ग्रुप से जुड़े छह संदिग्धों की गिरफ्तारी के मामले में जांच जैसे-जैसे बढ़ रही है, सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रकरण की जांच कर रही टीम को मुख्य आरोपी शावेज उर्फ जिहादी के मोबाइल फोन से एक अहम संदेश मिला है।
इसमें उसने पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर को सात लोगों की सूची भेजी थी। सूची में नाम के साथ उनकी शिक्षा, पेशा और स्मार्टफोन चलाने की क्षमता का भी उल्लेख था। सूची में एक व्यक्ति पश्चिम बंगाल और एक बांग्लादेश का था।
जवाब में जैश से निर्देश मिला था कि कम पढ़े-लिखे लोग भी शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन जो स्मार्टफोन चलाना नहीं जानते, उन्हें बाहर कर दिया जाए। साथ ही सूची को घटाकर तीन लोगों तक सीमित करने के लिए कहा गया था।
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इसमें उसने पाकिस्तान में बैठे जैश के हैंडलर को सात लोगों की सूची भेजी थी। सूची में नाम के साथ उनकी शिक्षा, पेशा और स्मार्टफोन चलाने की क्षमता का भी उल्लेख था। सूची में एक व्यक्ति पश्चिम बंगाल और एक बांग्लादेश का था।
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जवाब में जैश से निर्देश मिला था कि कम पढ़े-लिखे लोग भी शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन जो स्मार्टफोन चलाना नहीं जानते, उन्हें बाहर कर दिया जाए। साथ ही सूची को घटाकर तीन लोगों तक सीमित करने के लिए कहा गया था।
इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों का नजरिया भी बदला है। पेशे से वकील इकराम अली को नेटवर्क में शामिल करने के पीछे जिहादी की मंशा कानूनी पेचीदगियों से निपटने की थी। वहीं जुनैद को एलएलबी में दाखिला दिलाकर पढ़े-लिखे और कानूनी समझ रखने वाले लोगों का नेटवर्क तैयार किया जाना था।
अधिकतर बातचीत कोड वर्ड में करता था गिरोह
जांच एजेंसियों को पूछताछ में जिहादी ने यह भी बताया है कि गिरोह अधिकतर बातचीत कोड वर्ड में करता था। कई बार कोड को समझने में दिक्कत होती थी, ऐसे में वह इकराम की मदद लेता था। संदेशों के आदान-प्रदान में भी कोड वर्ड का इस्तेमाल अनिवार्य था।
जांच एजेंसियों को पूछताछ में जिहादी ने यह भी बताया है कि गिरोह अधिकतर बातचीत कोड वर्ड में करता था। कई बार कोड को समझने में दिक्कत होती थी, ऐसे में वह इकराम की मदद लेता था। संदेशों के आदान-प्रदान में भी कोड वर्ड का इस्तेमाल अनिवार्य था।
इसके लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाती थी। संदिग्धों को कई वीडियो भेजकर भी कोडिंग समझाने का प्रयास किया गया था। पुलिस को उनके मोबाइल फोन से ऐसे कई वीडियो मिले हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया गया है।
इस बारे में डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि एनआईए और इंटेलिजेंस की टीम मामले की गहन जांच कर रही हैं। इसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
संगठन विस्तार के लिए तेजी से कर रहा था काम
जांच में यह भी सामने आया है कि जिहादी संगठन विस्तार के लिए तेजी से काम कर रहा था। उसकी गतिविधियां गाजियाबाद तक ही सीमित नहीं थीं। वह और नाहल गांव के उसके साथी जुनैद, फरदीन, इकराम, फजरू और जावेद अक्सर जूम मीटिंग के जरिये जुड़ते थे और दिनभर की गतिविधियों की समीक्षा करते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिहादी संगठन विस्तार के लिए तेजी से काम कर रहा था। उसकी गतिविधियां गाजियाबाद तक ही सीमित नहीं थीं। वह और नाहल गांव के उसके साथी जुनैद, फरदीन, इकराम, फजरू और जावेद अक्सर जूम मीटिंग के जरिये जुड़ते थे और दिनभर की गतिविधियों की समीक्षा करते थे।
जिहादी को जुनैद और फरदीन की ओर से भी कुछ लोगों की सूची मिली थी। इन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की तैयारी थी। पुलिस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच शुरू कर दी है।
इकराम के जरिये संपर्क में आया था बांग्लोदश का जुबेर
आरोपी इकराम अली की मां शाहिदा मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। शाहिदा के मायके पक्ष के जरिये जिहादी की पहचान बांग्लादेश के जुबेर नामक युवक से हुई थी। जुबेर ने जिहादी को वहां हिंदुओं और मुस्लिमों पर कथित अत्याचार से जुड़े फोटो व वीडियो भेजे थे। दोनों के बीच पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर भी बातचीत होती थी।
आरोपी इकराम अली की मां शाहिदा मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। शाहिदा के मायके पक्ष के जरिये जिहादी की पहचान बांग्लादेश के जुबेर नामक युवक से हुई थी। जुबेर ने जिहादी को वहां हिंदुओं और मुस्लिमों पर कथित अत्याचार से जुड़े फोटो व वीडियो भेजे थे। दोनों के बीच पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर भी बातचीत होती थी।