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Ghaziabad News: बिजली के लंबे कट से सोसायटियों में लग रहा जोर का झटका
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गाजियाबाद। चिपचिपी गर्मी में बिजली के लंबे कटों से सोसायटियों को जोर का आर्थिक झटका लग रहा है। बिजली जाने पर लंबे समय तक डीजी सेट चलाने से हजारों लीटर डीजल प्रतिदिन फूंकना पड़ रहा है। इससे एक दिन में कई लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है। इससे निवासियों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित जीएच-7 के एओए अध्यक्ष रोहित चौधरी का कहना है कि यहां तार बदले जा रहे हैं। इस कारण हर दूसरे दिन बिजली विभाग रोस्टर के तहत 10 से 2 बजे तक आपूर्ति बंद कर रहा है, लेकिन यह लाइट कभी दो बजे नहीं आती। पांच से छह बजे तक आती है। ऐसे में हर दूसरे दिन सात से आठ घंटे लगातार डीजी सेट चलाना पड़ रहा है। बुधवार को तो बक्सा फुंकने के कारण रात दो बजे गई लाइट बृहस्पतिवार को ढाई बजे आई। 12.30 घंटे तक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगातार डीजी सेट चलाना पड़ा। इतने समय में चार लाख रुपये का डीजल फुंक गया। कुल चार हजार लीटर की खपत हुई। बिजली कटों के कारण पिछले एक महीने में हम सात से आठ लाख का डीजल फूंक चुके हैं। प्रत्येक निवासी से 17 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से उनका खर्चा भी बढ़ गया है।
राजनगर एक्सटेंशन की सेवी विला डे सोसायटी में मंंगलवार को बिजली विभाग का पीटी फुंकने से आठ घंटे बाद लाइट आई। एओए सचिव सत्यजीत कहते हैं कि इस दौरान लगातार डीजी सेट चलने से दो लाख से अधिक का डीजल फुंक गया। उनका कहना है कि लंबे कटों से सोसायटियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। एक तो डीजल मिलने में दिक्क्त है, ऊपर से बढ़ी खपत ने और परेशानी बढ़ा दी है। गुलमोहर गॉर्डन के एओए सचिव एओए कोषाध्यक्ष पीके सिंह का कहना है कि एक तो लंबे कटों आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ऊपर से बिजली बिल में फ्यूल सरचार्ज जुड़कर आने से बिल और बढ़ गया है। इससे दोहरी मार पड़ रही है। निवासियों पर भी बोझ बढ़ गया है।
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15 से 35 रुपये प्रति यूनिट लिया जाता है
डीजी सेट का शुल्क हर सोसायटी में अलग-अलग है। यह अलग-अलग सोसायटी में 15 से लेकर 35 रुपये प्रति यूनिट तक लिया जाता है। इसके अलावा प्रतिदिन 10 रुपये या कहीं 200 रुपये अलग से डीजी मरम्मत चार्ज भी लिया जाता है।
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क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित जीएच-7 के एओए अध्यक्ष रोहित चौधरी का कहना है कि यहां तार बदले जा रहे हैं। इस कारण हर दूसरे दिन बिजली विभाग रोस्टर के तहत 10 से 2 बजे तक आपूर्ति बंद कर रहा है, लेकिन यह लाइट कभी दो बजे नहीं आती। पांच से छह बजे तक आती है। ऐसे में हर दूसरे दिन सात से आठ घंटे लगातार डीजी सेट चलाना पड़ रहा है। बुधवार को तो बक्सा फुंकने के कारण रात दो बजे गई लाइट बृहस्पतिवार को ढाई बजे आई। 12.30 घंटे तक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगातार डीजी सेट चलाना पड़ा। इतने समय में चार लाख रुपये का डीजल फुंक गया। कुल चार हजार लीटर की खपत हुई। बिजली कटों के कारण पिछले एक महीने में हम सात से आठ लाख का डीजल फूंक चुके हैं। प्रत्येक निवासी से 17 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से उनका खर्चा भी बढ़ गया है।
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राजनगर एक्सटेंशन की सेवी विला डे सोसायटी में मंंगलवार को बिजली विभाग का पीटी फुंकने से आठ घंटे बाद लाइट आई। एओए सचिव सत्यजीत कहते हैं कि इस दौरान लगातार डीजी सेट चलने से दो लाख से अधिक का डीजल फुंक गया। उनका कहना है कि लंबे कटों से सोसायटियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। एक तो डीजल मिलने में दिक्क्त है, ऊपर से बढ़ी खपत ने और परेशानी बढ़ा दी है। गुलमोहर गॉर्डन के एओए सचिव एओए कोषाध्यक्ष पीके सिंह का कहना है कि एक तो लंबे कटों आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ऊपर से बिजली बिल में फ्यूल सरचार्ज जुड़कर आने से बिल और बढ़ गया है। इससे दोहरी मार पड़ रही है। निवासियों पर भी बोझ बढ़ गया है।
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15 से 35 रुपये प्रति यूनिट लिया जाता है
डीजी सेट का शुल्क हर सोसायटी में अलग-अलग है। यह अलग-अलग सोसायटी में 15 से लेकर 35 रुपये प्रति यूनिट तक लिया जाता है। इसके अलावा प्रतिदिन 10 रुपये या कहीं 200 रुपये अलग से डीजी मरम्मत चार्ज भी लिया जाता है।