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विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी नहीं, स्किल्ड बनाने का प्रयास कर रही सरकार : ढांडा
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कार्यशाला में बोले शिक्षा मंत्री, शिक्षा को कौशल और उद्योग से जोड़ना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के तत्वावधान में उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित पाठ्यक्रम एवं माइक्रो क्रेडेंशियल की अनुवर्ती कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं एवं डीन से विद्यार्थियों को रोजगार सक्षम एवं उद्यमशील बनाने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने उच्च शिक्षा के स्वरूप को लचीला और रोजगारोन्मुखी बनाया है। हमें इन नीतियों को धरातल पर लागू करना होगा। इससे भारत आर्थिक महाशक्ति और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा। इससे हरियाणा की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से कौशल आधारित कार्यक्रमों और माइक्रो क्रेडेंशियल पर किए गए कार्यों की रिपोर्ट भी ली।
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उच्च शिक्षा से 50% युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य : डॉ. राज नेहरू
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने कहा कि हरियाणा में उच्च शिक्षा का ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) वर्तमान में करीब 33 प्रतिशत है। इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज उद्योग जगत माइक्रो क्रेडेंशियल को अधिक महत्व दे रहा है, इसलिए सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम और कौशल आधारित शिक्षा में इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा।
हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि यूजीसी के निर्देशों के अनुरूप इंटर्नशिप और व्यवहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से नवाचार और उद्योगों के साथ मजबूत तालमेल बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जो नवाचार नहीं करेंगे, वे पिछड़ जाएंगे। विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि स्किल्ड भी होना चाहिए।
वहीं, परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एसके गक्खड़ ने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर देने की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय स्किल आधारित शिक्षा के माध्यम से पूरे एनसीआर की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।
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माइक्रो क्रेडेंशियल से बढ़ेंगे प्लेसमेंट के अवसर : प्रो. दिनेश कुमार
एसवीएसयू के कुलगुरु प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि स्किल प्रोग्राम एनईपी के अनुरूप होने चाहिए और उनमें माइक्रो क्रेडेंशियल का प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के अवसर बढ़ेंगे और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा का आभार जताया। कार्यक्रम में परिषद के राज्य परियोजना निदेशक प्रो. आर.एस. राठौड़ ने कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी।
कार्यशाला में सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ती धर्माणी, म हर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र अनायत, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक, भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुदेश छिकारा, दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के कुलगुरु प्रो. असीम मिगलानी तथा कुलसचिव सुमन वशिष्ठ उपस्थित रहे। सभी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के तत्वावधान में उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित पाठ्यक्रम एवं माइक्रो क्रेडेंशियल की अनुवर्ती कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं एवं डीन से विद्यार्थियों को रोजगार सक्षम एवं उद्यमशील बनाने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने उच्च शिक्षा के स्वरूप को लचीला और रोजगारोन्मुखी बनाया है। हमें इन नीतियों को धरातल पर लागू करना होगा। इससे भारत आर्थिक महाशक्ति और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा। इससे हरियाणा की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से कौशल आधारित कार्यक्रमों और माइक्रो क्रेडेंशियल पर किए गए कार्यों की रिपोर्ट भी ली।
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उच्च शिक्षा से 50% युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य : डॉ. राज नेहरू
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने कहा कि हरियाणा में उच्च शिक्षा का ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) वर्तमान में करीब 33 प्रतिशत है। इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज उद्योग जगत माइक्रो क्रेडेंशियल को अधिक महत्व दे रहा है, इसलिए सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम और कौशल आधारित शिक्षा में इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा।
हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि यूजीसी के निर्देशों के अनुरूप इंटर्नशिप और व्यवहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से नवाचार और उद्योगों के साथ मजबूत तालमेल बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जो नवाचार नहीं करेंगे, वे पिछड़ जाएंगे। विद्यार्थियों को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि स्किल्ड भी होना चाहिए।
वहीं, परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एसके गक्खड़ ने कहा कि वर्तमान समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर देने की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय स्किल आधारित शिक्षा के माध्यम से पूरे एनसीआर की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।
माइक्रो क्रेडेंशियल से बढ़ेंगे प्लेसमेंट के अवसर : प्रो. दिनेश कुमार
एसवीएसयू के कुलगुरु प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि स्किल प्रोग्राम एनईपी के अनुरूप होने चाहिए और उनमें माइक्रो क्रेडेंशियल का प्रावधान अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के अवसर बढ़ेंगे और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूती मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा का आभार जताया। कार्यक्रम में परिषद के राज्य परियोजना निदेशक प्रो. आर.एस. राठौड़ ने कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी।
कार्यशाला में सीबीएलयू की कुलगुरु प्रो. दीप्ती धर्माणी, म हर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र अनायत, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक, भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुदेश छिकारा, दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के कुलगुरु प्रो. असीम मिगलानी तथा कुलसचिव सुमन वशिष्ठ उपस्थित रहे। सभी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।