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Ground Report: जिद का गीत, हौसले की मुस्कान और हर चेहरे पर उम्मीद... जंतर-मंतर की वो रात जब थकान भी हार गई

Fri, 24 Jul 2026 07:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Jul 2026 07:02 AM IST
सार

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की रात किसी धरना-स्थल से ज्यादा एक मेले जैसी लगी, लेकिन आंदोलनकारियों की व्यवस्था पूरे एक सिस्टम की तरह थी।

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Ground Report: That night at Jantar Mantar when even exhaustion gave up
जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जंतर-मंतर पर अचानक उठती आवाजें और उनमें जोश भरते युवाओं का समूह। यहां हर नुक्क्ड़ पर अलग-अलग नारे आैर गीत सुनाई देते हैँ जिनके बोल में जिद, जुनून और जज्बे का मिश्रण है। भीड़, उमस आैर कूड़े की बदबू के बावजूद यहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर एक उम्मीद है और दिल में गुस्सा जो बदलाव चाहता है। यह महसूस किया जंतर-मंतर पर एक रात बिताने वाले हमारे संवाददाताओं ने...पेश है रिपोर्ट...

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जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की रात किसी धरना-स्थल से ज्यादा एक मेले जैसी लगी, लेकिन आंदोलनकारियों की व्यवस्था पूरे एक सिस्टम की तरह थी। तड़के तीन बजे सड़कों पर भारी चहल-पहल थी। छात्र-छात्राएं मुख्य सड़क पर नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। उनके हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखे तख्तियां थीं।
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कुछ छात्र सड़क किनारे सिगरेट पीते हुए भी दिखाई दिए। सड़कों पर कुछ वाहन चल रहे थे और प्रदर्शन के दौरान चालकों को वाहन रोकने पड़ रहे थे। हालांकि छात्र उन्हें निकलने दे रहे थे। तभी एक एंबुलेंस आई, और कुछ आंदोलनकारियों ने उसके लिए तुरंत रास्ता बनाया। जंतर-मंतर के आधा किलोमीटर के दायरे में ऐसे प्रदर्शन जारी थे। जंतर-मंतर को जाने वाली सड़क पर पुलिस का पहरा था।
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कई पुलिसकर्मी खड़े थे, तो कुछ कुर्सियों पर बैठकर झपकी ले रहे थे। फुटपाथों पर कूड़े से भरे बड़े-बड़े गार्बेज बैग पड़े थे। दूसरी ओर फुटपाथों पर आंदोलनकारी छात्र-छात्राएं झाड़ू लगा रहे थे और खुद कूड़ा उठा रहे थे। कई प्रदर्शनकारी फुटपाथ पर सोए थे तो कोई गाना गा रहा था। जंतर-मंतर के मुख्य गेट पर पहुंचते ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े कार्यकर्ता और अन्य आंदोलनकारी जूस, कोल्ड ड्रिंक बांट रहे थे। 

अंदर जाने के रास्ते पर मानव शृंखला थी जो लाइन लगाकर लोगों को भीतर प्रवेश दे रही थी। दीवारें सरकार-विरोधी नारों से पटी हुई थीं। धरना-स्थल में जाने के लिए करीब 350 मीटर की लाइन लगी थी। अंदर जाते ही एक समूह पेंटिंग के जरिए सरकार और सिस्टम के कई चेहरों को दिखाती हुई प्रदर्शनी लगाए बैठा था, और कई लोग इसकी तस्वीरें ले रहे थे।

धरने के दोनों ओर वामपंथी छात्र संगठनों के समूह अपने-अपने बैनर और सरकार-विरोधी पोस्टरों के साथ बैठे थे। मंच पर कुछ लोग सोए हुए थे, लेकिन ठीक सामने कई समूहों में देशभक्ति सहित कई गाने गाए जा रहे थे, और सरकार-विरोधी नारे भी लग रहे थे। सो रहे और गाना गा रहे लोगों को अन्य छात्र-छात्राएं पंखों से हवा कर रहे थे। पास ही छात्र-छात्राओं ने मेडिकल कैंप लगाया था, जहां घायलों सहित अन्य लोगों का इलाज चल रहा था।


पूरे धरना-स्थल से लेकर आधा किलोमीटर के दायरे में मेले जैसा माहौल था। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों और पतियों के साथ धरना-स्थल पर आई थीं। अंदर से बाहर तक पीने के पानी के लिए जगह-जगह कैंपर और गिलास रखे हुए थे। वापसी में भी एक लाइन से ही लोगों को बाहर जाने दिया जा रहा था। धरना-स्थल से लेकर आधा किलोमीटर के दायरे में लोग बिना कहे सफ़ाई कर रहे थे। यह आंदोलन अपने आप में एक अनोखी मिसाल है।

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