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Blame Game: युवराज की मौत पर सिंचाई विभाग ने प्राधिकरण पर फोड़ा देरी का ठीकरा, डूबने से गई थी इंजीनियर की जान

Fri, 24 Jul 2026 03:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Jul 2026 03:59 AM IST
सार

विभाग ने कहा कि इस मामले में उसकी कोई लापरवाही नहीं है और परियोजना में हुई देरी नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर हुई।

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Irrigation Department blames Authority for delay following Yuvraj's death.
नोएडा में इंजीनियर की डूबने से मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा सेक्टर-150 में जलभराव के दौरान इंजीनियर युवराज की डूबने से हुई मौत के मामले में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपना जवाब दाखिल किया है। विभाग ने कहा कि इस मामले में उसकी कोई लापरवाही नहीं है और परियोजना में हुई देरी नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर हुई। सिंचाई विभाग की ओर से अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2015 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 के बारिश के पानी को हिंडन नदी तक पहुंचाने के लिए स्टॉर्म वाटर रेगुलेटर बनाने का प्रस्ताव भेजा था। 

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विभाग ने 2017 में ही परियोजना का पहला अनुमान तैयार कर प्राधिकरण को भेज दिया था, लेकिन बाद में प्राधिकरण ने कई बार संशोधन और नए विकल्प मांगे, जिससे प्रक्रिया लंबी होती गई। विभाग के अनुसार, तकनीकी जांच में यह स्पष्ट था कि जल निकासी के लिए रेगुलेटर ही सबसे उपयुक्त और स्थायी समाधान है। बाद में आसपास के नए सेक्टर जुड़ने से परियोजना की क्षमता बढ़ानी पड़ी और इसकी डिजाइन में भी बदलाव किए गए। 
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संशोधित परियोजना की लागत करीब 31.39 करोड़
रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित परियोजना की लागत करीब 31.39 करोड़ रुपये है। नोएडा प्राधिकरण से प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद फरवरी 2026 में समझौता ज्ञापन (एमओयू) का मसौदा भी भेज दिया। विभाग ने एनजीटी से कहा कि उसने अपनी ओर से सभी तकनीकी कार्य समय पर पूरे किए और परियोजना में देरी प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरियों के लंबित रहने के कारण हुई। 
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नोएडा प्राधिकरण का जवाब, ड्रेनेज परियोजना पहले से प्रक्रिया में थी
एनजीटी में नोएडा प्राधिकरण ने भी जवाब दाखिल किया है। प्राधिकरण ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इलाके में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था के लिए स्टॉर्म वाटर रेगुलेटर बनाने की योजना हादसे से पहले ही प्रक्रिया में थी। प्राधिकरण ने बताया कि सेक्टर-150 और आसपास के क्षेत्रों से बारिश का पानी हिंडन नदी तक पहुंचाने के लिए 2015 से उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के साथ सर्वे और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं चल रही थीं। 

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